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IIT : आईआईटी के छात्रों के लिए जापान में बरसेंगी नौकरियां, प्लेसमेंट और इंटर्नशिप को लेकर बड़ा कदम

आईआईटी बीएचयू ने जापान और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में पहल की है। अंतरराष्ट्रीय कंपनी टैलेंडी होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ आईआईटी ने बुधवार को एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

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Health Tips: Heart Disease और Dementia का खतरा कम कर सकती है Shingles Vaccine, रिसर्च का दावा

दुनियाभर में जिन बीमारियों की वजह सबसे अधिक लोगों की मौत हो जाती है। जिनमें से हृदय रोग सबसे प्रमुख है। हाल ही के सालों में कम उम्र के लोगों में हार्ट फेलियर और हार्ट अटैक के मामले बढ़े हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक दिल की बीमारियों से बचे रहने के लिए खानपान और लाइफस्टाइल में सुधार करना बेहद जरूरी है। लेकिन अक्सर लोगों में मन में यह सवाल रहता है कि क्या कोई ऐसी वैक्सीन है, जो दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक से होने वाली मौतों को कम कर सकें।

हेल्थ एक्सपर्ट ने इस बारे में एक बड़ी जानकारी शेयर की है। अध्ययन में पाया गया है कि शिंगल्स रोग से बचाने के लिए दी जाने वाली शिंग्रिक्स वैक्सीन कुछ लोगों में स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसे बड़े जोखिमों को कम करने में सहायता करती है। इसको डिमेंशिया से बचाने वाला भी पाया गया है। बता दें कि शिंगल्स या हर्पीज जोस्टर एक वायरल संक्रमण है, जो शरीर पर दर्दनाक चकत्ते और फफोले पैदा करता है।

इसे भी पढ़ें: Expired Food सेहत के लिए जहर: पहचानें धोखाधड़ी, FSSAI के नियम क्या कहते हैं? Health Risk


शोधकर्ताओं के मुताबिक शिंगल्स से बचाव के लिए वैक्सीन शिंग्रिक्स दी जाती है। इन लोगों में गंभीर हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या ये वैक्सीन हार्ट अटैक के जोखिम को भी कम कर सकती है।

हार्ट डिजीज से बचाने वाली वैक्सीन

करीब 20 से ज्यादा उम्र के 70 हजार से ज्यादा लोगों पर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि शिंग्रिक्स लेने वालों में कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा करीब 10% तक कम होता है। वहीं इस वैक्सीन से हार्ट फेलियर का खतरा करीब 12 फीसदी कम देखा गया है।

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक बुजुर्गों में वैक्सीन के फायदे देखे गए हैं। वहीं 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को यह वैक्सीन दी जाए, तो बड़ी संख्या में गंभीर हृदय रोगों और उनसे होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। 

वहीं इससे पहले हुए अध्ययनों में शिंगल्स की वैक्सीन को डिमेंशिया के जोखिम को कम करने वाला पाया गया है। इस बीमारी में धीरे-धीरे याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता कमजोर होने लगती है।

क्या है शिंगल्स रोग

यह एक दर्दनाक बीमारी है, जो उसी वायरस के दोबारा एक्टिव होने से होती है। जोकि बचपन में चिकनपॉक्स यानी कि चेचक जैसी बीमारी की वजह बनती है।

चिकनपॉक्स के पूरी तरह से ठीक होने के बाद भी यह वायरस शरीर में छिपा रह सकता है। वहीं कई सालों बाद यह दोबारा सक्रिय होकर शिंगल्स पैदा कर सकता है।

बढ़ती उम्र क साथ-साथ शिंगल्स अधिक गंभीर हो सकता है और इससे नसों में लंबे समय तक दर्द बना रहता है।

वहीं कुछ मामलों में यह भी पाया गया है कि इससे सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और आंखों की रोशनी जाने का भी जोखिम रहता है।

इस बीमारी से बचाव के लिए शिंग्रिक्स और कई स्थानों पर जोस्टोवैक्स वैक्सीन दी जाती है।

शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया कि यह वैक्सीन लेने वाले लोगों में रक्त वाहिकाओं और दिल से जुड़े बड़े जोखिम का खतरा 12% तक कम हो सकता है।

जानें अध्ययन में क्या पता चला

इस अध्ययन में 60 साल से ज्यादा उम्र के करीब 70 हजार से अधिक लोगों पर मेडिकल डेटा का विश्लेषण किया गया।

जिसमें करीब 7 साल तक प्रतिभागियों की सेहत पर लगातार नजर रखी गई।

इस शोध में पाया गया है कि कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा शिंग्रिक्स लेने वाले लोगों में करीब 10% कम था।

कोरोनरी हार्ट डिजीज का मतलब एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हार्ट तक ब्लड पहुंचाने वाली नसों में चर्बी जमने लगती है। जिस कारण ब्लड सर्कुलेशन कम हो सकता है। इस कारण से हार्ट फेलियर और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ सकता है।

वहीं 7 सालों के दौरान शिंग्रिक्स लेने वालों में हार्ट फेलियर का जोखिम करीब 12 फीसदी कम देखने को मिला।

महिलाओं और पुरुषों दोनों में यह फायदा दिखा। वहीं पुरुषों में स्ट्रोक से बचाने में भी शिंग्रिक्स के फायदे देखने को मिले।

दिल को कैसे फायदा पहुंचा सकती है वैक्सीन 

शिंग्रिक्स वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को उस वायरस को पहचानने के साथ-साथ वायरस से लड़ना सिखाती है। जो शिंगल्स की वजह बनता है। लेकिन इस वैक्सीन में कुछ ऐसे पदार्थ भी हैं, जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने में सहायता करते हैं।

प्रतिरक्षा प्रणाली को मिलने वाला यह एक किक और शरीर में लंबे समय से होने वाली सूजन को भी कम कर सकता है।

अगर शरीर में लंबे समय तक हल्की सूजन रहती है, तो यह आगे चलकर दिमाग, नसों और दिल से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकती है।

इस शोध ने शिंगल्स वैक्सीन के फायदे को स्पष्ट मजबूत करती है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारियों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की भूमिका अहम हो सकती है।

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  Sports

BCCI का Cricket Expansion प्लान: Japan में पहली बार भिड़ेंगे दोनों देश, 75 साल की दोस्ती का ऐतिहासिक क्षण

भारत और जापान के बीच कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर क्रिकेट के मैदान पर एक ऐतिहासिक मुकाबला देखने को मिलेगा। बीसीसीआई ने घोषणा की है कि दोनों देशों की पुरुष क्रिकेट टीमें पहली बार अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में आमने-सामने उतरेंगी। यह एकमात्र बीस ओवर का अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 22 सितंबर को जापान के तोचिगी प्रांत स्थित सानो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में खेला जाएगा।

बता दें कि यह मुकाबला केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण और कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के समारोह का हिस्सा है। दोनों देशों के बीच क्रिकेट का यह पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होने के कारण इसे खास माना जा रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह आयोजन खेल के माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाने की व्यापक पहल से जुड़ा है। भारत द्वारा वर्ष 2036 के ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी की महत्वाकांक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पहल को खेल सहयोग के नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

यह पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान बने व्यापक सहयोग के विचार से आगे बढ़ी है। इसके तहत भारत और जापान खेल के क्षेत्र में आपसी संपर्क, खिलाड़ियों के आदान-प्रदान और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देशों के बीच खेल आधारित इस कार्यक्रम को “खेल 75” पहल की शुरुआती कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने इस फैसले को क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया है। उनके अनुसार, भारतीय और जापानी पुरुष टीमों का जापान में विशेष मुकाबले के लिए एक साथ आना ऐतिहासिक क्षण है। इससे भारतीय टीम को एक नए क्रिकेट क्षेत्र में खेलने का मौका मिलेगा और जापान के साथ-साथ पूर्वी एशिया के अन्य हिस्सों में भी क्रिकेट को नए दर्शकों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

देवजीत सैकिया ने कहा कि भारत और जापान के बीच मजबूत और लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। ऐसे में दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर क्रिकेट का जुड़ना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने इस मुकाबले को संभव बनाने में जापान क्रिकेट संघ के प्रयासों की भी सराहना की है।

गौरतलब है कि बीसीसीआई लंबे समय से क्रिकेट के विस्तार को पारंपरिक क्रिकेट देशों तक सीमित न रखने की बात करता रहा है। दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट संगठनों में शामिल होने के नाते भारतीय बोर्ड का मानना है कि खेल को नए देशों और नए दर्शकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसकी है। बोर्ड ने संकेत दिया है कि वह आने वाले समय में जापान क्रिकेट संघ के साथ मिलकर वहां क्रिकेट को मजबूत करने के लिए काम करेगा।

जापान क्रिकेट संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नाओकी मियाजी ने भी भारतीय टीम के आगमन को अपने देश के क्रिकेट इतिहास का बड़ा अवसर बताया है। उनके अनुसार, मौजूदा विश्व विजेता भारतीय टीम का जापान आना जापानी क्रिकेट के लिए यादगार क्षण होगा। उन्होंने कहा कि यह मुकाबला स्थानीय लोगों को क्रिकेट को करीब से समझने और इस खेल से जुड़ने का अवसर देगा।

जापान में क्रिकेट अभी उतना लोकप्रिय नहीं है जितना बेसबॉल, फुटबॉल या अन्य खेल हैं, लेकिन वहां इस खेल को विकसित करने की कोशिश लगातार की जा रही है। भारतीय टीम की मौजूदगी से जापान में क्रिकेट को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग और क्रिकेट फैंस भी इस मुकाबले को देखने पहुंच सकते हैं।

कुल मिलाकर 22 सितंबर का यह मुकाबला केवल जीत और हार तक सीमित नहीं रहेगा। यह भारत और जापान के बीच 75 वर्षों की साझेदारी, दोस्ती और आपसी सहयोग का प्रतीक भी बनेगा। साथ ही यह क्रिकेट को नए देशों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है और दोनों देशों के खेल संबंधों के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही हैं।
Fri, 04 Sep 2026 19:54:00 +0530

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