होर्मुज में अमेरिका की नाकेबंदी, यमन में हूतियों का मिसाइल अटैक; 86 जहाजों का बदला रास्ता, 10 बैलिस्टिक मिसाइलों से बढ़ी टेंशन
होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकेबंदी जारी है, जिससे समुद्री आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. इसी बीच, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है.
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CVC Annual Report: सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की 70,584 शिकायतें; करप्शन के मामलों में बैंक और रेलवे सबसे आगे
पारदर्शिता और ईमानदारी की निगरानी करने वाली देश की शीर्ष संस्था केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की नवीनतम रिपोर्ट में सरकारी महकमों की कार्यप्रणाली को लेकर बड़े आंकड़े सामने आए हैं।
आयोग के तहत काम करने वाले मुख्य सतर्कता अधिकारियों (CVOs) को वर्ष 2025 के दौरान कुल 70,584 शिकायतें मिली थीं। हालांकि, इनमें से 64,905 शिकायतों का त्वरित निपटारा 31 दिसंबर 2025 तक कर दिया गया, जबकि 5,679 मामले साल के अंत तक लंबित रहे।
बैंकिंग और रेलवे सेक्टर में भ्रष्टाचार की सबसे ज्यादा शिकायतें
आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि बैंकिंग क्षेत्र के खिलाफ सर्वाधिक 9,933 शिकायतें मिलीं, जिनमें से 9,520 का निपटारा हुआ और 413 मामले पेंडिंग रह गए। इसके ठीक बाद रेलवे से जुड़ी 9,381 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 8,754 मामलों को निपटाया गया और 627 शिकायतें लंबित रहीं। इन दोनों ही विभागों के पास आम नागरिकों और सार्वजनिक लेनदेन का सबसे बड़ा दायरा होने के कारण शिकायतों का आंकड़ा सबसे ऊंचा रहा।
आवास, स्थानीय निकाय और अन्य मंत्रालयों की स्थिति
बैंक और रेलवे के अलावा आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय से संबंधित 6,531 शिकायतें सामने आईं। वहीं दिल्ली सरकार को छोड़कर अन्य स्थानीय निकायों के खिलाफ 4,834 शिकायतें दर्ज हुईं। इनके अलावा कोयला क्षेत्र (4,118), वित्त क्षेत्र (3,107), दिल्ली सरकार (2,804), पेट्रोलियम मंत्रालय (2,722) और दिल्ली पुलिस (2,633) के कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले आयोग तक पहुंचे।
तीन महीने की तय समयसीमा और पेंडिंग मामलों की चुनौती
सीवीसी के नियमों के अनुसार, मुख्य सतर्कता अधिकारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे किसी भी शिकायत की प्राथमिक जांच और निपटारा तीन महीने के भीतर पूरा करें। इसके बावजूद, वर्ष 2025 के अंत तक 2,002 ऐसी शिकायतें पाई गईं जो निर्धारित तीन महीने की समयसीमा से अधिक समय से लंबित चल रही थीं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वे लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर रहे हैं ताकि जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
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