Punjab Police ने ED से मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूरे दस्तावेज और योग्य अधिकारी भेजने को कहा
चंडीगढ़, दो सितंबर पंजाब पुलिस ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को एक और पत्र लिखकर धनशोधन मामले से संबंधित पूरी और स्पष्ट सामग्री के साथ एक अधिकारी को भेजने के लिये कहा है। ईडी ने धनशोधन मामले की जांच के दौरान साझा की गई जानकारी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था। पंजाब पुलिस का यह पत्र ईडी के 31 अगस्त के पत्र के अलावा भेजा गया है, जिसमें केंद्रीय एजेंसी ने कहा था कि संबंधित जानकारी और सामग्री 30 जुलाई तथा सात अगस्त को भेजे गए पत्रों के माध्यम से पहले ही साझा की जा चुकी है।
यह मामला धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत ईडी की जांच से जुड़ा है। ईडी ने मई में भू-उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) मामले के संबंध में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (बीओआई) ने प्रवर्तन निदेशालय के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय के सहायक निदेशक को भेजे अपने ताजा पत्र में कहा कि यह अनुस्मारक धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 66(2) के तहत भेजे गए कार्यालय के पत्र के संदर्भ में जारी किया गया है।
पंजाब बीओआई ने कहा कि उसने ईडी को सूचित किया था कि कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के लिए उक्त पत्र के आधार पर प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें मामले की जांच, सत्यापन और आकलन किया जाना है। हालांकि, उसने कहा कि ईडी के पत्र के साथ दी गई सामग्री मामले में आगे कानूनी कार्रवाई के लिए पर्याप्त नहीं थी। पंजाब बीओआई के अनुसार, उपलब्ध सामग्री से उसमें दी गई बातों की संतोषजनक तरीके से पुष्टि नहीं हो पा रही थी।
पंजाब बीओआई ने कहा कि मामले में आगे बढ़ने के लिए पूरी जानकारी वाले दस्तावेज जरूरी हैं, ताकि कानूनी मानकों और उचित जांच प्रक्रिया का पालन किया जा सके। उसने यह भी कहा कि मंगलवार को पंजाब बीओआई कार्यालय पहुंचे ईडी के एक हेड कांस्टेबल स्तर के अधिकारी को मामले के तथ्यों की जानकारी नहीं थी। पंजाब बीओआई ने ईडी से अनुरोध किया कि वह बृहस्पतिवार को अपराह्न तीन बजे मामले के तथ्यों से पूरी तरह परिचित किसी अधिकारी को भेजे।
अधिकारी के साथ मामले की पूरी सामग्री और पूरी फाइल भी होनी चाहिए। इसके अलावा वह स्पष्ट सामग्री भी उपलब्ध कराई जाए, जिसके आधार पर ईडी ने संज्ञेय अपराध किए जाने का कथित निष्कर्ष निकाला है। ईडी ने 31 अगस्त को तीसरी बार पंजाब पुलिस को पत्र लिखकर निजी व्यक्ति नितिन गोहल और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था।
आरोप है कि उन्होंने सरकारी अधिकारियों के तबादलों और तैनाती को प्रभावित करने, हथियार लाइसेंस मंजूर कराने तथा सरकारी मंजूरियां हासिल करने में मदद की। ईडी के अनुसार, गोहल ने कथित तौर पर इच्छुक लोगों और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) राजबीर घुम्मन के बीच बिचौलिए की भूमिका निभाई। गोहल और घुम्मन दोनों ही इन आरोपों को पहले ही खारिज कर चुके हैं।
NHRC ने Gujarat सरकार को दिया निर्देश, पीड़ित महिला को दें 7.5 लाख रुपये मुआवजा
अहमदाबाद, दो सितंबर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बुधवार को गुजरात सरकार को निर्देश दिया कि कथित जालसाजी के मामले में गिरफ्तारी के बाद सार्वजनिक रूप से घुमाई गई महिला को मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए 7.5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। पायल गोटी को 2024 के अमरेली फर्जी पत्र मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था और तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था।
यह आदेश गांधीनगर में आयोग की दो दिन की खुली सुनवाई के दौरान एनएचआरसी की एक पीठ ने दिया, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन और सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) विद्युत रंजन सारंगी और विजया भारती सयानी शामिल थे। गोटी के वकील बृज शेठ ने कहा कि आयोग ने पाया कि उनकी गिरफ्तारी के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि आयोग ने यह भी गौर किया कि पुलिस ने गोटी की जमानत याचिका का विरोध नहीं किया था और बाद में सी समरी रिपोर्ट (मामला वापस लेने की मांग करते हुए) दाखिल की थी।
सेठ ने कहा, राज्य सरकार को पायल-बेन को मुआवज़े के तौर पर 7.5 लाख रुपये देने का आदेश दिया गया है। गोटी और तीन अन्य लोगों को दिसंबर 2024 में अमरेली तालुका पंचायत अध्यक्ष के नाम कथित तौर पर जारी किए गए फर्जी पत्र को तैयार करने और प्रसारित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस पत्र के जरिये भाजपा विधायक एवं मंत्री कौशिक वेकारिया को बदनाम करने का प्रयास किया गया था।
कंप्यूटर ऑपरेटर गोटी पर आरोप था कि उन्होंने दस्तावेज को टाइप करने, प्रिंट करने और पीडीएफ में बदलने में मदद की थी, जिसके बाद इसे सोशल मीडिया पर साझा किया गया। आरोपियों के खिलाफ जालसाजी, गलत सूचना फैलाने और मानहानि से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। महिला का आरोप है कि उसे आधी रात के आस-पास हिरासत में लिया गया था, जबकि प्राथमिकी बाद में सुबह करीब 5:30 बजे दर्ज की गई।
उसने दावा किया कि उसे स्थानीय अपराध शाखा के कार्यालय में रखा गया था। गोटी ने दावा किया कि इसके अलावा, अमरेली के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने एक संवादादाता सम्मेलन में उनकी पहचान उजागर की और अगले दिन घटना के नाटकीय रुपांतरण के नाम पर उन्हें और अन्य आरोपियों को अमरेली शहर में घुमाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में उनके साथ मारपीट की गई।
गोटी को जनवरी 2025 में जमानत मिल गई थी।
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