Bhotekoshi Flood Alert: भोटेकोशी नदी का जलस्तर फिर तेजी से बढ़ा; नेपाल में नई जलप्रलय और भारी तबाही की आहट!
नेपाल अभी लांगतांग लिरुंग ग्लेशियर के टूटने से आई भीषण बाढ़ के जख्मों से उबरा भी नहीं था कि भोटेकोशी नदी के उफान ने एक बार फिर खौफ का माहौल बना दिया है। नेपाल और तिब्बत सीमा के ऊपरी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और मलबे के खिसकने से नदी का जलस्तर दोबारा तेजी से बढ़ रहा है।
मौसम विभाग (DHRJ) ने नदी के आसपास के इलाकों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। खतरे को देखते हुए सीमावर्ती रसुवा और नुवाकोट जिलों के तटीय क्षेत्रों में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
भोटेकोशी का जलस्तर बढ़ा, नई आपदा की आहट से सहमे लोग
उपग्रह तस्वीरों और जमीनी मॉनिटरिंग के अनुसार, भोटेकोशी नदी में पानी और मलबे का प्रवाह फिर से बढ़ गया है। ऊपरी पहाड़ी हिस्सों में प्राकृतिक रुकावटों के फिर से बनने और टूटने की आशंका जताई जा रही है।
नदी के बढ़ते जलस्तर ने त्रिशूली और भोटेकोशी नदी घाटी के आसपास चल रहे राहत कार्यों में बड़ी बाधा खड़ी कर दी है। स्थानीय प्रशासन ने लाउडस्पीकर और एनटीसी (NTC) के इमरजेंसी एसएमएस अलर्ट के जरिए तटीय गांवों को तुरंत खाली करने की चेतावनी दी है।
टनल में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए रात-दिन जारी रेस्क्यू
भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में स्थित हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स की टनल (सुरंग) के भीतर फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। भारी मलबे, पानी के रिसाव और कीचड़ की वजह से रेस्क्यू टीम को टनल के भीतर प्रवेश करने में अत्यधिक मशक्कत करनी पड़ रही है।
आपातकालीन ऑक्सीजन पाइपलाइन और भारी ड्रिलिंग उपकरणों के सहारे मजदूरों तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि लगातार बढ़ते जलस्तर से टनल के अंदर पानी भरने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, राहत सामग्री और एनडीआरएफ तैनात
नेपाल में आए इस मानवीय संकट को देखते हुए भारत सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत अभियान शुरू किया है। भारत की ओर से एनडीआरएफ की विशेष रेस्क्यू टीमों को आधुनिक खोज एवं बचाव उपकरणों के साथ नेपाल भेजा जा रहा है। इसके साथ ही खाद्य सामग्री, पीने का पानी, टेंट, दवाएं और इमरजेंसी मेडिकल किट्स की बड़ी खेप सीमावर्ती रास्तों और वायुसेना के विमानों के जरिए आपदा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई जा रही है।
प्रशासन की अपील: नदियों के किनारे न जाएं, अलर्ट पर रहें
नेपाल सरकार, DHRJ और नेपाल टेलीकॉम (NTC) की ओर से संयुक्त रूप से एडवाइजरी जारी कर नागरिकों से नदी के किनारों, पुलों और संवेदनशील पहाड़ी ढलानों से दूर रहने की अपील की गई है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि ऊपरी इलाकों में बनी अस्थिर प्राकृतिक झीलें फिर से फूटती हैं, तो निचले इलाकों में भारी तबाही आ सकती है। फिलहाल सेना, पुलिस और अंतर्राष्ट्रीय राहत एजेंसियां किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।
काम के हिसाब से एआई मॉडल चुनेगा सिस्टम,:गति बढ़ाने, खर्च घटाने के लिए ऑटोमैटिक काम बांटने की नई टेक्नोलॉजी; खर्च दो तिहाई कम
एआई एप्लीकेशंस की लागत दो-तिहाई घटाने के लिए कंपनियां मॉडल राउटिंग सिस्टम बना रही हैं। ये एप्लीकेशंस सीधे चैटबॉट के बजाय इंसानी टीम की तरह काम कर रहे हैं। कंपनियां पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक ही एआई मॉडल के बजाय ऐसा राउटिंग सिस्टम बना रही हैं, जो हर काम सही मॉडल के पास भेजता है। जब एआई एजेंट्स जटिल काम संभालते हैं, तब यह सिस्टम तय करता है कि कौन सा मॉडल क्या करेगा। कोडिंग में फाइलें पढ़ने, नियम समझने, नया कोड लिखने और जांच जैसे काम अलग-अलग एजेंट्स में बांट दिए जाते हैं। कठिन काम एडवांस मॉडल, जबकि सामान्य काम छोटे मॉडल करते हैं। एनवीडिया ने ‘रस्ट लैंग्वेज’ पर आधारित ‘नीमो स्विचयार्ड’ नाम का ओपन-सोर्स टूल जारी किया है। यह एआई ट्रैफिक को मॉडल्स के बीच ट्रांसफर करता है और ओपनएआई व एंथ्रोपिक के बीच भाषा का अनुवाद करता है। इससे इंजीनियरों को नया मॉडल जोड़ते समय बार-बार पूरा कोड बदलने से मुक्ति मिलती है। एनवीडिया इसे ‘सिस्टम ऑफ मॉडल्स’ कहती है, जो एडवांस मॉडल योजना बनाता है और छोटा मॉडल कोड जांचता है। ‘नीमो स्विचयार्ड’ में मॉडल का चुनाव सिर्फ शुरुआत में नहीं होता। यह सिस्टम काम के दौरान नतीजों और गलतियों को देखकर तुरंत फैसला बदल देता है। कोडिंग की शुरुआत में बड़े मॉडल की मदद ली जाती है। रास्ता साफ होते ही छोटा मॉडल काम संभालता है। जांच सही रहने पर बड़े मॉडल की जरूरत नहीं पड़ती। बड़ी तकनीकी खराबी पर ही उसे दोबारा जिम्मेदारी दी जाती है। साधारण चैटबॉट एक सवाल पर एकाध बार ही एआई से संपर्क करता है, जबकि एजेंट काम पूरा करने में दर्जनों बार एआई को कॉल करता है। हर छोटी कॉल के लिए सबसे महंगा मॉडल इस्तेमाल करने पर खर्च और समय बढ़ते हैं, पर सबसे सस्ता मॉडल लगाने पर गलतियां बढ़ती हैं। ‘नीमो स्विचयार्ड’ ने सटीकता बनाए रखते हुए खर्च को क्लॉड ओपस 4.8 के मुकाबले घटाकर एक-तिहाई कर दिया है। ऑपरेशन सिस्टम तय करता है कि पूरी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी, वहीं राउटिंग टूल सिर्फ यह तय करता है कि कौन सा मॉडल किस कॉल को संभालेगा। एनवीडिया डेवलपर्स को गुणवत्ता, गति या लागत को प्राथमिकता पर सेट करने की आजादी देती है। लैंगचेन, लाइट-एलएलएम और कांग जैसी कंपनियां भी मॉडल्स के बीच की कड़ी मजबूत कर रही हैं। इससे नए मॉडल अपनाना और डेटा सुरक्षित रखना आसान हो गया है। टेक्नोलॉजी: एंथ्रोपिक और गूगल की काम करने की शैली एक-दूसरे से अलग एंथ्रोपिक ‘सलाहकार’ मॉडल पर काम कर रही है। इसमें बड़ा मॉडल केवल योजना बनाता है और छोटे मॉडल्स जमीन पर सारा काम निपटाते हैं। दूसरी तरफ गूगल क्लाउड ने अपने मुख्य गेटवे में ही राउटिंग दे दी है। यह जेमिनी के अलावा दूसरे मॉडल्स पर भी रिक्वेस्ट भेज सकता है। गूगल का एजेंट डेवलपमेंट किट भी कई अलग-अलग तरीकों से काम करने की सुविधा देता है। जैसे रोबोटैक्सी बाजार में जूक्स और टेस्ला का मॉडल अलग है, वैसे ही एआई कंपनियां भी काम के तरीके अलग-अलग अपना रही हैं।
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