काम के हिसाब से एआई मॉडल चुनेगा सिस्टम,:गति बढ़ाने, खर्च घटाने के लिए ऑटोमैटिक काम बांटने की नई टेक्नोलॉजी; खर्च दो तिहाई कम
एआई एप्लीकेशंस की लागत दो-तिहाई घटाने के लिए कंपनियां मॉडल राउटिंग सिस्टम बना रही हैं। ये एप्लीकेशंस सीधे चैटबॉट के बजाय इंसानी टीम की तरह काम कर रहे हैं। कंपनियां पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक ही एआई मॉडल के बजाय ऐसा राउटिंग सिस्टम बना रही हैं, जो हर काम सही मॉडल के पास भेजता है। जब एआई एजेंट्स जटिल काम संभालते हैं, तब यह सिस्टम तय करता है कि कौन सा मॉडल क्या करेगा। कोडिंग में फाइलें पढ़ने, नियम समझने, नया कोड लिखने और जांच जैसे काम अलग-अलग एजेंट्स में बांट दिए जाते हैं। कठिन काम एडवांस मॉडल, जबकि सामान्य काम छोटे मॉडल करते हैं। एनवीडिया ने ‘रस्ट लैंग्वेज’ पर आधारित ‘नीमो स्विचयार्ड’ नाम का ओपन-सोर्स टूल जारी किया है। यह एआई ट्रैफिक को मॉडल्स के बीच ट्रांसफर करता है और ओपनएआई व एंथ्रोपिक के बीच भाषा का अनुवाद करता है। इससे इंजीनियरों को नया मॉडल जोड़ते समय बार-बार पूरा कोड बदलने से मुक्ति मिलती है। एनवीडिया इसे ‘सिस्टम ऑफ मॉडल्स’ कहती है, जो एडवांस मॉडल योजना बनाता है और छोटा मॉडल कोड जांचता है। ‘नीमो स्विचयार्ड’ में मॉडल का चुनाव सिर्फ शुरुआत में नहीं होता। यह सिस्टम काम के दौरान नतीजों और गलतियों को देखकर तुरंत फैसला बदल देता है। कोडिंग की शुरुआत में बड़े मॉडल की मदद ली जाती है। रास्ता साफ होते ही छोटा मॉडल काम संभालता है। जांच सही रहने पर बड़े मॉडल की जरूरत नहीं पड़ती। बड़ी तकनीकी खराबी पर ही उसे दोबारा जिम्मेदारी दी जाती है। साधारण चैटबॉट एक सवाल पर एकाध बार ही एआई से संपर्क करता है, जबकि एजेंट काम पूरा करने में दर्जनों बार एआई को कॉल करता है। हर छोटी कॉल के लिए सबसे महंगा मॉडल इस्तेमाल करने पर खर्च और समय बढ़ते हैं, पर सबसे सस्ता मॉडल लगाने पर गलतियां बढ़ती हैं। ‘नीमो स्विचयार्ड’ ने सटीकता बनाए रखते हुए खर्च को क्लॉड ओपस 4.8 के मुकाबले घटाकर एक-तिहाई कर दिया है। ऑपरेशन सिस्टम तय करता है कि पूरी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी, वहीं राउटिंग टूल सिर्फ यह तय करता है कि कौन सा मॉडल किस कॉल को संभालेगा। एनवीडिया डेवलपर्स को गुणवत्ता, गति या लागत को प्राथमिकता पर सेट करने की आजादी देती है। लैंगचेन, लाइट-एलएलएम और कांग जैसी कंपनियां भी मॉडल्स के बीच की कड़ी मजबूत कर रही हैं। इससे नए मॉडल अपनाना और डेटा सुरक्षित रखना आसान हो गया है। टेक्नोलॉजी: एंथ्रोपिक और गूगल की काम करने की शैली एक-दूसरे से अलग एंथ्रोपिक ‘सलाहकार’ मॉडल पर काम कर रही है। इसमें बड़ा मॉडल केवल योजना बनाता है और छोटे मॉडल्स जमीन पर सारा काम निपटाते हैं। दूसरी तरफ गूगल क्लाउड ने अपने मुख्य गेटवे में ही राउटिंग दे दी है। यह जेमिनी के अलावा दूसरे मॉडल्स पर भी रिक्वेस्ट भेज सकता है। गूगल का एजेंट डेवलपमेंट किट भी कई अलग-अलग तरीकों से काम करने की सुविधा देता है। जैसे रोबोटैक्सी बाजार में जूक्स और टेस्ला का मॉडल अलग है, वैसे ही एआई कंपनियां भी काम के तरीके अलग-अलग अपना रही हैं।
India GDP Growth: फाइनेंशियल ईयर 2027 में 7.2% रह सकती है ग्रोथ, घरेलू मांग से मिलेगा सहारा
भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार वित्त वर्ष 2026-27 में मजबूत बनी रह सकती। EY की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2027 में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7 से 7.2% के बीच रह सकती। घरेलू मांग और सरकार के लगातार बढ़ते कैपिटल एक्सपेंडिचर को इसका बड़ा आधार माना गया है। वहीं, नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 12.5 से 13% तक पहुंच सकती।
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और कमजोर ग्लोबल ट्रेड भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। इसके बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।
23 महीने के हाई पर पहुंची औद्योगिक ग्रोथ
EY ने बताया कि जून 2026 में भारत की इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन यानी आईआईपी ग्रोथ बढ़कर 7.3% हो गई। यह 23 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में औद्योगिक उत्पादन की औसत ग्रोथ 5.7% रही, जो पिछले आठ तिमाहियों में सबसे ज्यादा है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। जून में मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट 7.8% बढ़ा। इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, मोटर व्हीकल, टेक्सटाइल और फूड प्रोडक्ट्स जैसे सेक्टरों में मजबूत गतिविधि देखने को मिली।
हालांकि, जुलाई में कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स में रफ्तार थोड़ी कमजोर हुई। मैन्युफैक्चरिंग PMI जून के 54.2 से घटकर 53.5 और सर्विसेज PMI 57.4 से घटकर 53.3 रहा। दोनों अब भी 50 से ऊपर हैं, यानी अर्थव्यवस्था में विस्तार जारी है।
बैंक क्रेडिट और सरकारी खर्च से सपोर्ट
बैंकिंग सेक्टर से भी अर्थव्यवस्था को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। जून में ग्रॉस बैंक क्रेडिट ग्रोथ बढ़कर 18.6% हो गई, जो 25 महीने का उच्च स्तर है।सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर में भी तेज सुधार हुआ। FY27 की पहली तिमाही में सरकारी कैपेक्स 23.7% बढ़ा, जबकि FY26 की चौथी तिमाही में इसमें 23.3% की गिरावट आई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, कैपेक्स में यह तेजी घरेलू मांग को मजबूत करने और GDP ग्रोथ को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभा सकती है। वहीं, वित्तीय घाटा सालाना बजट लक्ष्य के 18.2% पर नियंत्रित रहा।
महंगाई और कच्चा तेल बड़ी चुनौती
महंगाई को लेकर तस्वीर पूरी तरह राहत वाली नहीं है। जुलाई में कंज्यूमर प्राइस इंफ्लेशन 4.4% रहा, जबकि होलसेल प्राइस इंफ्लेशन 9.8% के ऊंचे स्तर पर रहा। मिनरल ऑयल, खाद्य वस्तुओं, धातुओं, केमिकल्स और ईंधन की कीमतों ने WPI पर दबाव बढ़ाया।
EY के मुताबिक, ऊंची WPI महंगाई नॉमिनल GDP ग्रोथ को सरकार के बजट अनुमान 10.04% से ऊपर ले जा सकती है। इससे सरकार के राजस्व संग्रह को सहारा मिल सकता है और कैपेक्स जारी रखने में मदद मिल सकती है।
ग्लोबल रिस्क के बीच आयात घटाने पर जोर
वैश्विक मांग कमजोर रहने और ऊर्जा लागत बढ़ने से भारत के एक्सपोर्ट पर दबाव रह सकता है। ओईसीडी के अनुमान के मुताबिक, FY27 में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट GDP के 1.9% तक पहुंच सकता है।
हालांकि, EY का मानना है कि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूशन को बढ़ावा देकर भारत बाहरी जोखिम कम कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, 1272 प्रोडक्ट्स पर लक्षित रणनीति से करीब 189 अरब डॉलर के आयात को घरेलू उत्पादन से बदला जा सकता है। इसके साथ एक्सपोर्ट बढ़ाने और घरेलू वैल्यू एडिशन पर जोर देने से अर्थव्यवस्था की सप्लाई साइड मजबूत हो सकती है।
(प्रियंका कुमारी)
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