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दिल्ली से बहरोड का सफर होगा सुपरफास्ट, राजस्थान सरकार ने आरआरटीएस प्रोजेक्ट को दी हरी झंडी
Delhi Alwar RRTS Corridor: दिल्ली से राजस्थान आने-जाने वाले लोगों के लिए एक बहुत बडी खुशखबरी सामने आई है. दिल्ली-गुरुग्राम-रेवाडी-अलवर रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी आरआरटीएस कॉरिडोर को लेकर राजस्थान सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. अब वह दिन दूर नहीं जब दिल्ली और राजस्थान के औद्योगिक शहरों के बीच का सफर घंटों के बजाय मिनटों में पूरा होगा. बुधवार को राजधानी जयपुर में शासन सचिवालय के भीतर मुख्य सचिव सुधांश पंत की अध्यक्षता में एक बडी बैठक बुलाई गई. इस बैठक का मुख्य मकसद प्रोजेक्ट की पूरक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर विचार करना और इसे जल्द से जल्द आगे बढाना था. केंद्र सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय से मिली रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली सैद्धांतिक मंजूरी से जुडे हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की गई.
अधिकारियों को मिले तेजी से काम करने के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी संबंधित महकमों को आपसी तालमेल के साथ काम करने की हिदायत दी. उन्होंने साफ कहा कि पूरक रिपोर्ट को जल्द से जल्द आवश्यक मंजूरी के लिए भेजा जाए. राज्य स्तर पर जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए इसकी सैद्धांतिक स्वीकृति भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय को तुरंत भेजी जानी चाहिए. मुख्य सचिव का मानना है कि यह रेल नेटवर्क केवल लोगों के आने-जाने का साधन भर नहीं है. यह पूरा ट्रैक पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने की ताकत रखता है. इससे जहां आम मुसाफिरों को जाम से मुक्ति मिलेगी, वहीं उद्योग धंधों और व्यापारिक गतिविधियों को एक नई गति भी प्राप्त होगी.
129 किलोमीटर का पूरा रूट और राजस्थान का हिस्सा
दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर बहरोड तक जाने वाला यह आधुनिक रेल ट्रैक कुल 129.05 किलोमीटर लंबा तैयार किया जाना है. इस पूरे मार्ग में राजस्थान की सीमा के अंदर 25.16 किलोमीटर का हिस्सा शामिल होगा. राजस्थान के इलाके में यात्रियों की सुविधा के लिए चार बडे एलिवेटेड स्टेशन बनाने की योजना तैयार की गई है. ये स्टेशन शाहजहांपुर, नीमराना और बहरोड जैसे प्रमुख स्थानों से जुडे होंगे. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सीधे जुडने के कारण यह पूरा इलाका भविष्य में बहुत बडा कमर्शियल हब बनने की राह पर है. नीमराना और बहरोड में काम करने वाले कर्मचारियों, कारोबारियों और स्थानीय निवासियों के लिए यह रैपिड रेल किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी.
प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 7,747 करोड रुपये
इस महत्वपूर्ण योजना के बावल से बहरोड वाले खंड को पूरा करने में करीब 7,747 करोड रुपये की अनुमानित लागत आने की बात सामने आई है. वित्तीय ढांचे की बात करें तो इसमें 5,167.28 करोड रुपये निर्माण की मूल लागत के रूप में तय किए गए हैं. इसके अलावा जमीन अधिग्रहण के लिए लगभग 640 करोड रुपये और उद्यम निधि के लिए 1,861 करोड रुपये का प्रावधान रखा गया है. बैठक के दौरान सरकार पर आने वाले वित्तीय भार, चरणबद्ध तरीके से होने वाले खर्च और पैसों के बेहतर प्रबंधन पर भी गंभीर चर्चा की गई. इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए जरूरी संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी कोटपूतली-बहरोड के जिला कलक्टर और बीडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सौंपी गई है.
दो राज्यों की साझेदारी से खुलेगा तरक्की का रास्ता
परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए राजस्थान और हरियाणा के बीच बेहतर सामंजस्य जरूरी है. राजस्थान और हरियाणा की सीमा तक बावल से जुडे हिस्से की कुल लागत को दोनों राज्यों द्वारा मिलकर वहन करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके साथ ही हरियाणा सरकार की तरफ से भेजे गए समझौता ज्ञापन के प्रारूप पर भी बैठक में मंथन किया गया. राज्य सरकार अब बिना किसी देरी के सभी स्वीकृतियां पूरी करके केंद्र को अपनी अंतिम सहमति भेजने के मूड में है. आने वाले समय में यह आरआरटीएस कॉरिडोर राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को देश की राजधानी से जोडकर विकास के नए दरवाजे खोलने जा रहा है.
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