यूपी में महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत, मैटरनिटी लीव के नियम बदले; अब नहीं होगी 2 साल के अंतर की बाध्यता
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. सरकार ने दो मातृत्व अवकाश के बीच कम से कम दो साल के अंतर की पुरानी शर्त को समाप्त कर दिया है. इस फैसले से उन महिला कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जिनके दो बच्चों के जन्म के बीच दो साल से कम का अंतर है.
कैबिनेट ने यह फैसला 22 अगस्त 2026 को सर्कुलेशन के जरिए मंजूर किया. इसके बाद मातृत्व अवकाश से संबंधित नियमों में बदलाव का रास्ता साफ हुआ है.
पहले क्या था नियम?
उत्तर प्रदेश में महिला सरकारी कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश का लाभ मिलता है, लेकिन पहले दो प्रसूति अवकाश के बीच दो साल का अंतर होना जरूरी माना जाता था. यानी यदि किसी महिला के दो बच्चों के जन्म के बीच निर्धारित अंतर नहीं है, तो उसे दूसरे मातृत्व अवकाश को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता था.
इसी प्रावधान को लेकर एक महिला कर्मचारी ने अदालत का रुख किया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दो बच्चों की उम्र में दो साल से कम अंतर होने के आधार पर मातृत्व अवकाश से इनकार करने की व्यवस्था पर सवाल उठाया था. इसके बाद सरकार ने नियम में बदलाव का फैसला किया.
अब क्या बदला है?
संशोधित व्यवस्था में दो मातृत्व अवकाश के बीच दो साल के अंतर की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है. इसका मतलब है कि पात्र महिला कर्मचारी को केवल इस आधार पर मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं किया जा सकेगा कि पिछले बच्चे के जन्म के दो साल पूरे नहीं हुए हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक, पात्र महिला सरकारी कर्मचारी अपनी सेवा अवधि में निर्धारित शर्तों के तहत 180 दिन का मातृत्व अवकाश दो बार ले सकती हैं. यह अवकाश भुगतान सहित उपलब्ध होने की व्यवस्था बताई गई है.
दूसरे बच्चे के मामले में ज्यादा राहत
सरकार के इस फैसले का सबसे सीधा असर उन महिला कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनका दूसरा बच्चा पहले बच्चे के दो साल के भीतर जन्म लेता है. पुराने नियम के कारण ऐसी महिलाओं को छुट्टी की पात्रता को लेकर दिक्कत हो सकती थी.
नए प्रावधान से अब बच्चे के जन्म के बीच दो साल का अंतर होने की शर्त हट गई है. इससे महिलाओं को मातृत्व और नौकरी के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
अदालत के फैसले के बाद बदला नियम
इस बदलाव की पृष्ठभूमि में न्यायिक हस्तक्षेप भी महत्वपूर्ण रहा. एक महिला कर्मचारी को केवल इसलिए मातृत्व अवकाश देने से इनकार किया गया था क्योंकि उसके दोनों बच्चों के बीच उम्र का अंतर दो वर्ष से कम था. मामले में हाईकोर्ट ने महिला को राहत दी और इसके बाद राज्य सरकार ने संबंधित नियम में बदलाव किया.
किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?
यह बदलाव मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश सरकार के पात्र महिला कर्मचारियों से संबंधित है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इसका लाभ निजी क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं पर सीधे लागू नहीं होता. निजी क्षेत्र में मातृत्व लाभ के लिए केंद्रीय कानून और संबंधित नियम प्रभावी रहते हैं.
महिला कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला?
मातृत्व के दौरान महिला को प्रसव से पहले और बाद में स्वास्थ्य संबंधी देखभाल के साथ नवजात बच्चे की देखभाल के लिए भी पर्याप्त समय की जरूरत होती है. दो बच्चों के जन्म के बीच अंतर कम होने की स्थिति में पुराने नियम से पैदा होने वाली प्रशासनिक बाधा अब दूर हो गई है.
सरकार के इस बदलाव को कामकाजी महिलाओं के लिए अधिक व्यावहारिक और परिवार-केंद्रित व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे महिला कर्मचारियों को मातृत्व के अधिकार और नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिल सकती है.
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फ्लाइंग कार बनाने वाले रवि टमटा से मिले सीएम धामी, स्टार्टअप को सरकारी मदद के निर्देश
Uttarakhand Flying Car Innovation: फ्लाइंग कार बनाने वाले युवा नवोन्मेषक एवं स्टार्टअप उद्यमी रवि टमटा ने आज मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की. इस दौरान टमटा ने मुख्यमंत्री को फ्लाइंग कार के निर्माण से संबंधित अपने तकनीकी नवाचार, अब तक की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रवि टमटा के अभिनव प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और नवाचार की अपार संभावनाएं हैं. राज्य सरकार का प्रयास है कि ऐसे युवाओं को अपने नए विचारों और तकनीकी प्रयोगों को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक सहयोग और अवसर उपलब्ध कराए जाएं.
मुख्यमंत्री ने कहा, 'उत्तराखंड के युवाओं के सपनों को पंख देना हमारी सरकार की प्राथमिकता है. हमारे युवा नए विचारों और आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ रहे हैं. सरकार उनके नवाचार को केवल प्रोत्साहित ही नहीं करेगी, बल्कि उसे धरातल पर उतारने के लिए हरसंभव सहयोग भी प्रदान करेगी.'
स्टार्टअप को सरकारी सहायता देने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने मौके पर ही सचिव उद्योग को निर्देश दिए कि रवि टमटा के स्टार्टअप को नियमानुसार आवश्यक शासकीय सहयोग एवं सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही की जाए. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की प्रचलित स्टार्टअप एवं औद्योगिक नीतियों के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं का लाभ दिलाने की संभावनाओं का परीक्षण किया जाए और आवश्यक प्रक्रियाओं में सहयोग प्रदान किया जाए.
AI, ड्रोन और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे युवा
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दौर तकनीक और नवाचार का है. उत्तराखंड के युवा भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, एयरोस्पेस और अन्य आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे नवाचार न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करते हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देते हैं.
उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में नई तकनीकों के प्रयोग की व्यापक संभावनाएं हैं. भविष्य में तकनीक आधारित परिवहन व्यवस्था राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. हालांकि, ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए तकनीकी, सुरक्षा और नियामकीय मानकों का पालन आवश्यक होगा.
रवि टमटा ने मुख्यमंत्री को दी प्रोजेक्ट की जानकारी
रवि टमटा ने मुख्यमंत्री को अपने फ्लाइंग कार प्रोजेक्ट की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि वे इस क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहे हैं और भविष्य में इसे और विकसित करने की दिशा में प्रयासरत हैं.
मुख्यमंत्री धामी ने टमटा के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रतिभावान युवाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर इकोसिस्टम उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'नया उत्तराखंड केवल विकास परियोजनाओं से नहीं, बल्कि युवाओं के नए विचारों, नवाचार और उद्यमिता से भी बनेगा. हमारी कोशिश है कि उत्तराखंड का कोई भी प्रतिभाशाली युवा संसाधनों के अभाव में अपने सपने को अधूरा न छोड़े.'
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को स्टार्टअप और इनोवेशन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है. युवाओं के नवाचारों को प्रोत्साहन देकर उन्हें रोजगार सृजन, आत्मनिर्भरता और राज्य की आर्थिक प्रगति का माध्यम बनाया जा सकता है.
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