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E-Scooter: सिंपल एनर्जी का नया फैमिली ई-स्कूटर लॉन्च, धांसू स्टोरेज के साथ मिलेंगे ये फीचर्स

E-Scooter: सिंपल एनर्जी ने भारतीय बाजार में नया इलेक्ट्रिक स्कूटर सिंपल वेव लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे रोजाना के इस्तेमाल, बेहतर आराम और ज्यादा प्रैक्टिकैलिटी को ध्यान में रखते हुए फैमिली-ओरिएंटेड इलेक्ट्रिक स्कूटर के तौर पर पेश किया है। कंपनी की मौजूदा सिंपल वन रेंज जहां मुख्य रूप से परफॉर्मेंस पर केंद्रित है, वहीं वेव के जरिए कंपनी ने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के मास-मार्केट सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। यह स्कूटर भारतीय बाजार में एथर, टीवीएस और बजाज जैसे ब्रांड्स के लोकप्रिय फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटरों को टक्कर देगा।

70 लीटर तक का स्टोरेज
सिंपल वेव की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्रैक्टिकैलिटी है। इसमें कुल 70 लीटर तक का स्टोरेज स्पेस मिलता है। इसके सीट के नीचे 63 लीटर का बड़ा स्टोरेज कम्पार्टमेंट दिया गया है। इसके अलावा 3 लीटर का ग्लवबॉक्स और साइड पैनल में 4 लीटर की अतिरिक्त स्टोरेज जगह मिलती है।

साइड में दी गई इस अतिरिक्त स्टोरेज जगह को कंपनी ने 'पिल' नाम दिया है। कंपनी का दावा है कि यह इंडस्ट्री का पहला ऐसा फीचर है, जिसके जरिए राइडर मेन स्टोरेज कम्पार्टमेंट खोले बिना छोटी और जरूरी चीजें आसानी से रख सकता है।

अलग-अलग बैटरी पैक के साथ कई वेरिएंट
सिंपल वेव को कंपनी ने अलग-अलग बैटरी और डिस्प्ले कॉन्फिगरेशन वाले कई वेरिएंट में पेश किया है। इनमें वेव प्लस सबसे ज्यादा क्षमता वाली बैटरी के साथ आता है, जबकि अन्य वेरिएंट छोटे बैटरी पैक के साथ उपलब्ध हैं।

स्पेसिफिकेशन    वेव प्लस    वेव टीएफटी    वेव ईबीएन    वेव एस टीएफटी    वेव एस ईबीएन    वेव एस ईबीएन
बैटरी    5 किलोवॉट-घंटा    3.7 किलोवॉट-घंटा    3.7 किलोवॉट-घंटा    2.7 किलोवॉट-घंटा    2.7 किलोवॉट-घंटा    2.2 किलोवॉट-घंटा
आईडीसी रेंज    243 किमी    171 किमी    171 किमी    132 किमी    132 किमी    110 किमी
मोटर पावर    6.4 किलोवॉट    6.4 किलोवॉट    6.4 किलोवॉट    6.4 किलोवॉट    6.4 किलोवॉट    4.5 किलोवॉट
कलर ऑप्शन    6    6    6    4    4    2

सस्पेंशन और ब्रेकिंग
सिंपल वेव में ट्यूबलर स्टील फ्रेम के साथ टेलीस्कोपिक फ्रंट सस्पेंशन और ट्विन रियर शॉक एब्जॉर्बर दिए गए हैं। स्कूटर में 12-इंच के अलॉय व्हील्स मिलते हैं। ब्रेकिंग के लिए फ्रंट में डिस्क और रियर में ड्रम ब्रेक का इस्तेमाल किया गया है, जबकि सुरक्षा के लिए सीबीएस दिया गया है।

खास बात यह है कि सिंपल एनर्जी ने अपने इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में चेन-ड्राइव ट्रांसमिशन का इस्तेमाल किया है। इलेक्ट्रिक स्कूटरों में आमतौर पर बेल्ट या डायरेक्ट-ड्राइव सिस्टम देखने को मिलता है।

तीन राइडिंग मोड और प्रीमियम वेरिएंट में स्पोर्ट मोड
सिंपल वेव में राइड, ईको और ईकोएक्स जैसे राइडिंग मोड दिए गए हैं। वहीं इसके हायर वेरिएंट में स्पोर्ट मोड भी मिलता है। स्कूटर की सीट हाइट 775 मिलीमीटर है, जबकि ग्राउंड क्लियरेंस 175 मिलीमीटर है। कंपनी ने इन दोनों चीजों को भारतीय शहरों की रोजमर्रा की सड़कों और उपयोग को ध्यान में रखकर रखा है।

बैटरी और मोटर को पानी और धूल से सुरक्षा के लिए आईपी67 रेटिंग दी गई है।

750 वॉट चार्जर और फास्ट चार्जिंग
चार्जिंग के लिए सिंपल वेव के साथ पोर्टेबल 750 वॉट चार्जर दिया जाता है। वहीं टॉप-स्पेक वेव प्लस वेरिएंट फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है। कंपनी के अनुसार, फास्ट चार्जिंग की मदद से बैटरी को 0 से 80 फीसदी तक करीब 2 घंटे 15 मिनट में चार्ज किया जा सकता है।

7-इंच टीएफटी डिस्प्ले समेत कई फीचर्स
वेरिएंट के आधार पर सिंपल वेव में 7-इंच टीएफटी डिस्प्ले या 5-इंच ईबीएन यूनिट मिलती है। टीएफटी डिस्प्ले वाले वेरिएंट में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन, जीपीएस ट्रैकिंग, कॉल और म्यूजिक कंट्रोल, यूएसबी चार्जिंग और ओटीए अपडेट जैसे फीचर्स दिए गए हैं।

इसके महंगे वेरिएंट में ट्रैक्शन कंट्रोल, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, हिल-होल्ड असिस्ट, रिवर्स मोड, क्रॉल मोड और व्हीकल ट्रैकिंग जैसे एडवांस फीचर्स भी मिलते हैं। सभी वेरिएंट में एलईडी लाइटिंग को स्टैंडर्ड रखा गया है।

बुकिंग शुरू, सितंबर के अंत से डिलीवरी
सिंपल वेव की बुकिंग कंपनी के टचपॉइंट्स के जरिए शुरू हो चुकी है। कंपनी के मुताबिक, इसकी डिलीवरी सितंबर 2026 के आखिरी सप्ताह से शुरू की जाएगी। इस स्कूटर के जरिए सिंपल एनर्जी का लक्ष्य रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए ज्यादा प्रैक्टिकल और फीचर-पैक इलेक्ट्रिक स्कूटर चाहने वाले ग्राहकों को आकर्षित करना है।

(मंजू कुमारी)

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Indian Economy की मिली-जुली तस्वीर: GST Collection और Digital Payments में उछाल, लेकिन Manufacturing PMI ने बढ़ाई चिंता

भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही की शुरुआत में अब तक मजबूती के संकेत दिए हैं, लेकिन तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं है। एक तरफ कर संग्रह, डिजिटल भुगतान और वाहन बिक्री में तेजी दिखी है, वहीं कारखानों की गतिविधियों और रोजगार से जुड़े आंकड़ों ने चिंता बढ़ाई है। यानी घरेलू मांग फिलहाल अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र पर दबाव के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार अगस्त में सकल वस्तु एवं सेवा कर संग्रह करीब 15 प्रतिशत बढ़कर लगभग दो लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया। यह लगातार तीसरा महीना है जब कर संग्रह में दो अंकों की वृद्धि दर्ज हुई है। जुलाई में इसमें 15.4 प्रतिशत और जून में 13.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि अगस्त की मजबूती में आयात से मिलने वाले कर का बड़ा योगदान रहा।

आयात से प्राप्त कर 29 प्रतिशत बढ़कर 62,604 करोड़ रुपये हो गया, जबकि घरेलू कारोबार से मिलने वाला संग्रह 9.3 प्रतिशत बढ़कर 1.37 लाख करोड़ रुपये रहा। अप्रैल से अगस्त के बीच कुल कर संग्रह 10.43 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, जिसमें 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। डेलॉयट इंडिया के महेश जयसिंग के मुताबिक मजबूत घरेलू कर संग्रह हालिया आर्थिक गतिविधियों में बनी मजबूती से मेल खाता है।

डिजिटल भुगतान के मोर्चे पर भी तस्वीर उत्साहजनक रही। अगस्त में एकीकृत भुगतान प्रणाली के जरिये रिकॉर्ड 24.5 अरब लेनदेन हुए, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 23.7 अरब था। सालाना आधार पर लेनदेन में 22.5 प्रतिशत वृद्धि हुई। इन लेनदेन का कुल मूल्य करीब 29.8 लाख करोड़ रुपये रहा। पे नियरबाय के संस्थापक और प्रबंध निदेशक आनंद कुमार बजाज ने कहा कि त्योहारों के मौसम में छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान की गतिविधियां और बढ़ सकती हैं।

वाहन बिक्री ने भी घरेलू खपत की मजबूती का संकेत दिया। मारुति सुजुकी की कुल बिक्री 21.3 प्रतिशत बढ़कर 2,19,220 वाहन रही। महिंद्रा की यात्री वाहन बिक्री 50.4 प्रतिशत बढ़ी। हुंडई की कुल बिक्री में 8.8 प्रतिशत और घरेलू बिक्री में 23.6 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई। बजाज की बिक्री 10 प्रतिशत, होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया की बिक्री 8 प्रतिशत और एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ट्रैक्टर बिक्री 20.5 प्रतिशत बढ़ी।

लेकिन विनिर्माण क्षेत्र ने चिंता बढ़ाई है। एचएसबीसी का भारत मैन्युफैक्चरिंग खरीद प्रबंधक सूचकांक अगस्त में घटकर 52.8 रह गया, जो पांच साल का सबसे निचला स्तर है। हालांकि 50 से ऊपर का आंकड़ा विस्तार दर्शाता है, लेकिन नए आदेश और उत्पादन की वृद्धि अगस्त 2021 के बाद सबसे कमजोर रही। रोजगार में भी ढाई साल बाद पहली बार कमी आई। एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी ने इसे दो वर्षों से अधिक समय बाद रोजगार में पहली गिरावट बताया।

वहीं कोल इंडिया का अगस्त उत्पादन 5.8 प्रतिशत घटा, हालांकि उसकी आपूर्ति 5.6 प्रतिशत बढ़ी। बता दें कि इसी दौरान पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से एक सितंबर को ब्रेंट कच्चा तेल 92 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था। ऐसे में महंगी ऊर्जा, वैश्विक अनिश्चितता और कमजोर औद्योगिक मांग आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है, जबकि घरेलू खपत फिलहाल मजबूती का आधार बनी हुई हैं।

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