शारीरिक और मानसिक शांति के लिए करें योगमुद्रासन, जानें इसके लाभ
नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। आज की व्यस्त जीवनशैली में जहां तनाव, कब्ज और पीठ दर्द जैसी शारीरिक समस्याएं आम हो गई हैं, वहां योगमुद्रासन एक संजीवनी की तरह काम करता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क संतुलित रहता है।
यह एक ऐसी योग मुद्रा है, जिसे दो शब्दों योग, यानी जोड़ना, और मुद्रा, यानी प्रतीक, से मिलकर बनाया गया है, जबकि अंग्रेजी में इसे साइकिक यूनियन पोज कहते हैं, जिसका हिन्दी भाषा में अर्थ मानस को जोड़ना होता है। योग मुद्रासन, असल में, शरीर और मन के बीच अंतर को मिटाकर सामंजस्य स्थापित करने वाला योगासन है।
इस आसन करने के दौरान शरीर ध्यान, समर्पण और आंतरिक शांति की स्थिति में जाता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने योगासन को लेकर कुछ गाइडलाइन्स दिए हैं, जिसके अनुसार, यह पेट के अंगों को सक्रिय, पाचन में सुधार और मन को शांत करने में मदद करता है। इसके अभ्यास से पेल्विक मसल्स मजबूत होती और महिलाओं में प्रजनन अंगों से संबंधित समस्याओं को कम किया जा सकता है।
लंबे समय तक इस आसन का अभ्यास करने से शरीर और दिमाग में स्थिरता और एकाग्रता बढ़ती है। साथ ही, यह मणिपुर चक्र (मानव शरीर के सात मुख्य चक्रों में से तीसरा ऊर्जा केंद्र है, जो आत्मविश्वास, पाचन और अग्नि तत्व से जुड़ा) को सक्रिय और स्टिम्यूलेट करता है, जिससे शरीर में प्राणिक ऊर्जा को नियंत्रित करता है।
इस आसन को करना बेहद आसान है, जिसे करने के लिए सबसे साधक पद्मासन की स्थिति में बैठ जाएं। अब अपने दोनों हाथों की कलाई को पीछे की ओर ले जाकर पकड़ें या पैरों के अंगूठे को पकड़ें। लंबी गहरी सांस लेते और छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। अपने माथे को जमीन पर स्पर्श कराने का प्रयास करें और शरीर को ढीला छोड़ दें। सामान्य: सांस लेते हुए कुछ सेकंड रुकें, फिर सांस लेते हुए वापस शुरुआती स्थिति में आएं।
शुरू में इस आसन को करने के लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। कुछ दिनों के अभ्यास के बाद यह आसन करना काफी आसान हो जाता है। रीढ़ की हड्डी और पैरों सहित लगभग पूरा शरीर इस आसन में शामिल होता है, इसलिए स्वास्थ्य की दृष्टि से यह शरीर के विभिन्न अंगों के लिए फायदेमंद होता है।
--आईएएनएस
एनएस/डीकेपी
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अब आम लोग भी बचा सकेंगे जान, रांची सदर अस्पताल में CPR प्रशिक्षण से बढ़ी जीवनरक्षक जागरूकता
Ranchi Sadar Hospital: रांची में स्वास्थ्य सेवाओं को केवल इलाज तक सीमित न रखते हुए अब लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने के लिए भी तैयार किया जा रहा है. इसी दिशा में रांची सदर अस्पताल ने एक सराहनीय पहल करते हुए जीवनरक्षक तकनीक सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया. इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आम नागरिकों और स्वास्थ्यकर्मियों को ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार करना था, जब किसी व्यक्ति की अचानक हृदय गति रुक जाए या उसे हार्ट अटैक आए.
सदर अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में आयोजित इस कार्यशाला में अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों के परिजनों और आम लोगों सहित 50 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने सीपीआर की वैज्ञानिक और व्यावहारिक विधि को आसान तरीके से समझाया और प्रतिभागियों को खुद अभ्यास भी कराया, ताकि जरूरत पड़ने पर वे बिना घबराए सही तकनीक का इस्तेमाल कर सकें.
कार्यशाला का संचालन वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार झा के मार्गदर्शन में किया गया. इस दौरान मेडिकल ऑफिसर डॉ. शुभम शेखर ने भी प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि किसी व्यक्ति की सांस या दिल की धड़कन अचानक बंद होने पर शुरुआती कुछ मिनट सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं. यदि इसी दौरान सही तरीके से सीपीआर दिया जाए, तो मरीज के बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.
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क्यों सीखना है जरुरी?
डॉ. राजेश कुमार झा ने कहा कि हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति में एंबुलेंस या डॉक्टर के पहुंचने का इंतजार करना हमेशा संभव नहीं होता. ऐसे समय में मौके पर मौजूद व्यक्ति यदि सीपीआर देना जानता हो, तो वह मरीज के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है. इसलिए हर नागरिक को इस तकनीक की बुनियादी जानकारी होना बेहद जरूरी है.
उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल स्वास्थ्यकर्मियों के लिए ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी बेहद उपयोगी हैं. इससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और वे किसी भी आपात स्थिति में घबराने के बजाय आत्मविश्वास के साथ प्राथमिक सहायता दे सकेंगे. समय पर दी गई सही प्राथमिक चिकित्सा कई बार मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है.
लोगों का जागरूक होना है जरुरी
अस्पताल प्रशासन का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इलाज के साथ-साथ लोगों को जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है. इसी सोच के तहत भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग सीपीआर जैसी जीवनरक्षक तकनीक सीख सकें और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद कर सकें.
डॉ. राजेश कुमार झा ने इस जनहितकारी पहल को सफल बनाने में सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार, उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह तथा डॉ. अखिलेश कुमार झा के सहयोग की सराहना की. उन्होंने कहा कि सभी के संयुक्त प्रयास से यह प्रशिक्षण सफल रहा और आने वाले समय में इसे और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की योजना है.
अस्पताल बना उदाहरण
रांची सदर अस्पताल की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सही प्रशिक्षण और जागरूकता के माध्यम से आम नागरिकों को भी आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक की भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जा सकता है. यदि समाज में अधिक से अधिक लोग सीपीआर जैसी तकनीक सीख लें, तो सड़क दुर्घटनाओं, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी घटनाओं में समय रहते प्राथमिक सहायता देकर कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं.
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