Liver Health Tips: लिवर को चुपचाप नुकसान पहुंचा सकती हैं ये 5 आदतें, भूलकर भी न करें ये गलतियां!
Liver Health Tips: लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में शामिल है, जो शरीर में पोषक तत्वों के प्रोसेसिंग से लेकर कई जरूरी रासायनिक प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। परेशानी की बात यह है कि लिवर से जुड़ी कई समस्याएं शुरुआती दौर में स्पष्ट लक्षण नहीं देतीं। ऐसे में रोजमर्रा की कुछ आदतें धीरे-धीरे लिवर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं और लंबे समय में नुकसान का कारण बन सकती हैं।
हमारी लाइफस्टाइल में खान-पान, शारीरिक गतिविधि और दवाओं के इस्तेमाल से जुड़ी कई छोटी-छोटी गलतियां शामिल हो सकती हैं। इन्हें नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। अगर आप लंबे समय तक लिवर को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो इन आदतों पर नजर डालना जरूरी है।
लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं 5 आदतें
जरूरत से ज्यादा शराब का सेवन
अत्यधिक शराब का सेवन लिवर के लिए नुकसानदायक माना जाता है। लिवर शराब को प्रोसेस करता है, लेकिन लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में शराब लेने से लिवर पर लगातार दबाव पड़ सकता है। इससे फैटी लिवर से लेकर गंभीर लिवर संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए शराब का सेवन जितना कम किया जाए, उतना बेहतर है।
लगातार अनहेल्दी और ज्यादा कैलोरी वाला खाना
बहुत ज्यादा तला-भुना, प्रोसेस्ड और शुगर से भरपूर भोजन केवल वजन ही नहीं बढ़ाता, बल्कि लिवर की सेहत को भी प्रभावित कर सकता है। खासकर लंबे समय तक ज्यादा कैलोरी का सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी फैटी लिवर के जोखिम से जुड़ी हो सकती है। डाइट में सब्जियां, फल, साबुत अनाज और संतुलित भोजन को जगह देना बेहतर विकल्प है।
बिना सलाह के दवाएं लेना
सिरदर्द या छोटी-मोटी परेशानी में खुद से दवा लेना आम आदत हो सकती है, लेकिन कुछ दवाओं का गलत या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर दर्द निवारक दवाओं या सप्लीमेंट्स को डॉक्टर की सलाह के बिना अधिक मात्रा में लेने से बचना चाहिए। दवा की सही खुराक और अवधि का पालन करना जरूरी है।
लंबे समय तक बैठे रहना
शारीरिक गतिविधि की कमी भी लिवर की सेहत के लिए अच्छी नहीं मानी जाती। घंटों लगातार बैठे रहना, व्यायाम न करना और वजन बढ़ना मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ा हो सकता है, जिनका असर लिवर पर भी पड़ सकता है। रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना या नियमित एक्सरसाइज करना स्वस्थ लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा है।
ज्यादा मीठा और शुगरी ड्रिंक्स लेना
सॉफ्ट ड्रिंक, मीठे पैकेज्ड जूस, मिठाइयां और अतिरिक्त चीनी वाली चीजों का अधिक सेवन कैलोरी बढ़ा सकता है। लंबे समय तक ऐसी डाइट वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है, जिससे फैटी लिवर का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए पानी को प्राथमिकता दें और मीठे पेय पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
लिवर को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?
संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना और शराब से दूरी लिवर की सेहत के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। इसके अलावा बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं या हर्बल सप्लीमेंट्स का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर लगातार थकान, पेट में सूजन, त्वचा या आंखों का पीला पड़ना जैसे असामान्य लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
अगर आपको यह खबर उपयोगी लगी हो, तो इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूलें और हर अपडेट के लिए जुड़े रहिए [haribhoomi.com] के साथ।
लेखक: (कीर्ति)
Jaggery Benefits: गुड़ का छोटा सा टुकड़ा देगा सेहत को बड़े फायदे! डाइट में शामिल करने पर मिलेंगे ये लाभ
Paneer Kofta: होटल जैसा पनीर कोफ्ता घर पर बनाएं, ग्रेवी का स्वाद ऐसा कि हर कोई पूछेगा सीक्रेट रेसिपी!
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में किस दिन करें किस पूर्वज का श्राद्ध? यहां देखें पूरी तिथि और श्राद्ध लिस्ट
पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों का श्राद्ध करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। परिवार में जिन लोगों का निधन हो चुका है, उनके लिए उनकी मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। यही वजह है कि पितृपक्ष शुरू होने से पहले श्राद्ध की तिथियों को लेकर लोगों के बीच जानकारी लेने की उत्सुकता रहती है।
पंचांग के अनुसार, 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार से होगी। इस दिन पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ पितृपक्ष की नियमित तिथियां शुरू होंगी। वहीं 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष का समापन होगा।
किस तिथि को किस पूर्वज का श्राद्ध?
26 सितंबर, शनिवार- पूर्णिमा श्राद्ध
इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इसे पितृपक्ष की शुरुआत का महत्वपूर्ण श्राद्ध माना जाता है।
27 सितंबर, रविवार- प्रतिपदा श्राद्ध
प्रतिपदा तिथि को दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए इस दिन श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा।
28 सितंबर, सोमवार- द्वितीया श्राद्ध
जिन पूर्वजों का निधन द्वितीया तिथि को हुआ था, उनका श्राद्ध इस दिन किया जाएगा।
29 सितंबर, मंगलवार- तृतीया और महाभरणी श्राद्ध
इस दिन तृतीया श्राद्ध के साथ महाभरणी श्राद्ध भी होगा। तृतीया तिथि में दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए श्राद्ध किया जा सकता है। भरणी नक्षत्र से जुड़ा होने के कारण इस दिन पितृ कर्म का विशेष महत्व माना जाता है।
30 सितंबर, बुधवार- चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
इस दिन चतुर्थी और पंचमी दोनों तिथियों का श्राद्ध किया जाएगा। यानी इन दोनों तिथियों में दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए इसी दिन श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।
1 अक्टूबर, गुरुवार- षष्ठी श्राद्ध
षष्ठी तिथि को दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए इस दिन श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा।
2 अक्टूबर, शुक्रवार- सप्तमी श्राद्ध
सप्तमी तिथि में जिन पूर्वजों का निधन हुआ था, उनके लिए इस दिन श्राद्ध कर्म किया जाएगा।
3 अक्टूबर, शनिवार- अष्टमी श्राद्ध
अष्टमी तिथि में दिवंगत हुए पूर्वजों का श्राद्ध इस दिन किया जाएगा।
4 अक्टूबर, रविवार- नवमी श्राद्ध और मातृ नवमी
पितृपक्ष में नवमी का दिन विशेष माना जाता है। इसे मातृ नवमी भी कहा जाता है। इस दिन दिवंगत माता, दादी, नानी और परिवार की अन्य महिला पूर्वजों के लिए श्राद्ध करने की परंपरा है।
5 अक्टूबर, सोमवार- दशमी श्राद्ध
दशमी तिथि में जिन पूर्वजों का निधन हुआ था, उनके लिए इस दिन श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा।
6 अक्टूबर, मंगलवार- एकादशी श्राद्ध
एकादशी तिथि को दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए इस दिन श्राद्ध कर्म किया जाएगा।
7 अक्टूबर, बुधवार- द्वादशी और मघा श्राद्ध
इस दिन द्वादशी श्राद्ध के साथ मघा श्राद्ध भी होगा। धार्मिक परंपरा में मघा नक्षत्र को पितरों से संबंधित माना जाता है, इसलिए इस दिन किए जाने वाले पितृ कर्म का विशेष महत्व बताया जाता है।
8 अक्टूबर, गुरुवार- त्रयोदशी श्राद्ध
त्रयोदशी तिथि में दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए इस दिन श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है।
9 अक्टूबर, शुक्रवार- चतुर्दशी श्राद्ध
चतुर्दशी तिथि में दिवंगत हुए पूर्वजों का श्राद्ध इस दिन किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं में असामान्य या अकाल मृत्यु से जुड़े पितृ कर्म के लिए भी चतुर्दशी का विशेष महत्व बताया जाता है।
10 अक्टूबर, शनिवार- सर्वपितृ अमावस्या
पितृपक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या होगा। यह उन पूर्वजों के लिए महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका।
सर्वपितृ अमावस्या क्यों है खास?
पितृपक्ष में सर्वपितृ अमावस्या को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर किसी पूर्वज की मृत्यु तिथि परिवार को याद नहीं है या किसी वजह से उस तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया, तो इस दिन उनके लिए श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है। इसी वजह से पितृपक्ष की अंतिम तिथि पर बड़ी संख्या में लोग अपने ज्ञात-अज्ञात सभी पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं।
ध्यान रखें: श्राद्ध की तिथि और मुहूर्त में क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर या क्षेत्र के पंचांग के अनुसार अंतिम तिथि और श्राद्ध मुहूर्त की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi







/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
