ऑपरेशन मिलाप: दिल्ली पुलिस ने एक महीने में 159 लापता लोगों को परिवार से मिलाया, 27 बच्चे भी शामिल
Delhi Police Operation Milap: दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस ने लापता लोगों को उनके परिवारों से मिलाने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन मिलाप’ के तहत बड़ी सफलता हासिल की है. पुलिस ने 1 अगस्त से 31 अगस्त 2026 के बीच कुल 159 लापता व्यक्तियों और बच्चों को तलाश कर सुरक्षित उनके परिवारों से मिलाया. इनमें 27 लापता/अपहृत बच्चे और 132 वयस्क शामिल हैं.
दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस के मुताबिक, लापता होने की शिकायत मिलते ही संबंधित थाना पुलिस ने तत्काल तलाश अभियान शुरू किया. पुलिस टीमों ने सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ ऑटो स्टैंड, ई-रिक्शा स्टैंड, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर लापता लोगों की तस्वीरें प्रदर्शित कीं. बस चालकों, कंडक्टरों और रेहड़ी-पटरी वालों से भी पूछताछ की गई. इसके अलावा स्थानीय मुखबिरों की मदद लेने के साथ आसपास के थानों और अस्पतालों के रिकॉर्ड भी जांचे गए.
कपासहेड़ा और पालम विलेज पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को तलाशा
ऑपरेशन के दौरान थाना कपासहेड़ा पुलिस ने 5 नाबालिग बच्चों समेत 40 लोगों को तलाशा. इनमें एक बच्चा और चार बच्चियां शामिल थीं, जबकि 35 वयस्कों को भी बरामद किया गया. वहीं पालम विलेज थाना पुलिस ने 2 नाबालिग बच्चों और 18 वयस्कों समेत कुल 20 लोगों को तलाश कर परिवारों से मिलाया. वसंत कुंज साउथ थाना पुलिस ने भी 2 नाबालिग बच्चियों और 22 वयस्कों समेत कुल 24 लोगों को बरामद किया. सागरपुर थाना पुलिस ने 3 नाबालिग बच्चों और 13 वयस्कों समेत 16 लोगों को तलाशा, जबकि किशनगढ़ थाना पुलिस ने 3 नाबालिग बच्चियों और 6 वयस्कों को परिवार से मिलाया.
AHTU ने भी निभाई अहम भूमिका
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), दक्षिण-पश्चिम जिला ने अभियान के दौरान 7 नाबालिग बच्चों और एक महिला को तलाशा. सभी को सुरक्षित उनके परिवारों से मिलाया गया. इसके अलावा वसंत विहार, आरके पुरम, साउथ कैंपस, वसंत कुंज नॉर्थ, दिल्ली कैंट, सरोजिनी नगर और एस.जे. एन्क्लेव थाना पुलिस ने भी लापता बच्चों और वयस्कों को तलाशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
पिछले वर्षों से लापता लोग भी मिले
ऑपरेशन मिलाप की खास बात यह रही कि पुलिस ने सिर्फ हाल में लापता हुए लोगों को ही नहीं, बल्कि पिछले वर्षों से लापता व्यक्तियों को भी तलाशा. अगस्त महीने में बरामद 159 लोगों में 2019 में लापता हुआ एक व्यक्ति, 2022 में लापता एक व्यक्ति और 2025 में लापता 4 लोग भी शामिल हैं. पुलिस के अनुसार, अगस्त 2026 में बरामद 159 लोगों में 153 लोग वर्ष 2026 में लापता हुए थे, जबकि बाकी लोग पिछले वर्षों से लापता थे.
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आठ महीने में 1149 लोगों की घर वापसी
दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस ने बताया कि 1 जनवरी 2026 से 31 अगस्त 2026 तक कुल 1149 लापता व्यक्तियों और बच्चों को तलाश कर उनके परिवारों से मिलाया जा चुका है. इनमें 296 बच्चे और 853 वयस्क शामिल हैं. दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस का कहना है कि ‘ऑपरेशन मिलाप’ के तहत तकनीकी जांच, स्थानीय पूछताछ, सीसीटीवी निगरानी और मानवीय दृष्टिकोण के साथ लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि लापता लोगों को जल्द से जल्द तलाश कर उनके परिवारों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके. इस अभियान की निगरानी दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस के डीसीपी अमित गोयल, IPS के नेतृत्व में की जा रही है. पुलिस की इस कार्रवाई से लंबे समय से अपने परिजनों की तलाश कर रहे कई परिवारों को राहत मिली है.
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270 दिन समुद्र में रहने के बाद थाईलैंड पहुंचा USS अब्राहम लिंकन, 5 हजार सैनिकों को मिलेगा आराम
करीब नौ महीने तक लगातार समुद्र में रहने के बाद अमेरिकी नौसेना का विशाल विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन थाईलैंड पहुंचा है. लंबी और थकाऊ तैनाती के बाद पोत पर सवार करीब 5,000 अमेरिकी नौसैनिकों और मरीन को अब कुछ दिनों के आराम का मौका मिला है. थाइलैंड मीडिया आउटलेट डेली मेल के अनुसार, नेवी ने बताया कि एयरक्राफ्ट कैरियर बुधवार को पटाया पहुंचा, जहां उस पर सवार 5,000 नाविकों और मरीन को अमेरिका लौटने से पहले आराम करने का मौका मिलेगा. कैरियर स्ट्राइक ग्रुप 3 के कमांडर, रियर एडमिरल रॉबर्ट लॉफ्रन ने एक बयान में कहा, "लैम चाबांग में हमारे पहुंचने से हमारे नाविकों और मरीन को आराम करने और नई ऊर्जा पाने का एक बहुत जरूरी मौका मिला है."
यह पोत बुधवार को थाईलैंड के लाम चाबांग बंदरगाह पहुंचा. उसके साथ अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के अन्य युद्धपोत भी हैं। यह पड़ाव ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सैनिक करीब 270 दिनों से ज्यादा समय समुद्र में बिताने के बाद वापसी की राह पर हैं. यूएसएस अब्राहम लिंकन नवंबर 2025 में कैलिफोर्निया से अपने अभियान पर निकला था. शुरुआत में उसकी तैनाती एशिया-प्रशांत क्षेत्र में थी, लेकिन बाद में बदलते हालात के बीच उसे मध्य पूर्व भेज दिया गया. ईरान से जुड़े अमेरिकी सैन्य अभियान में भी इस विमानवाहक पोत की अहम भूमिका रही.
इतनी लंबी तैनाती ने जहाज पर मौजूद सैनिकों के लिए हालात आसान नहीं छोड़े. लंबे समय तक समुद्र में रहने के दौरान काम का दबाव, सीमित निजी जगह और लगातार सैन्य तैयारियों ने नौसैनिकों पर शारीरिक और मानसिक दबाव बढ़ाया. अमेरिकी मीडिया में जहाज पर रहने की परिस्थितियों और सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठे हैं. थाईलैंड पहुंचने के बाद अमेरिकी सैनिकों को करीब पांच दिन का आराम मिलने की उम्मीद है. उन्हें लाम चाबांग से पटाया ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है.
हजारों अमेरिकी सैनिकों के पटाया पहुंचने से स्थानीय कारोबारियों को भी फायदा होने की उम्मीद है. होटल, रेस्तरां, परिवहन और पर्यटन से जुड़े कारोबारों में गतिविधियां बढ़ सकती हैं. पटाया प्रशासन ने हालांकि सुरक्षा को लेकर भी व्यापक तैयारियां की हैं. बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को तैनात किया गया है। स्थानीय कारोबारियों को अमेरिकी सैनिकों से मनमाने दाम वसूलने से बचने की सलाह भी दी गई है. पटाया और अमेरिकी सेना का रिश्ता नया नहीं है. वियतनाम युद्ध के दौर से ही यह शहर अमेरिकी सैनिकों के आराम और मनोरंजन के प्रमुख ठिकानों में रहा है. हालांकि समय के साथ पटाया की पहचान एक बड़े अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित हुई है.
यूएसएस अब्राहम लिंकन को अगस्त में यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन ने मध्य पूर्व में राहत दी थी. इसके बाद अब वह अमेरिका लौटने की दिशा में है और थाईलैंड का पड़ाव उसके लंबे अभियान के बीच एक तरह का विश्राम स्थल बन गया है. अमेरिकी नौसेना ने इसे अमेरिका और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य संबंधों का हिस्सा बताया है.
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