भारत का मीडिया अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करे तो गोदी मीडिया बता दिया जाता है। लेकिन अब एक ऐसे देश के एक ऐसे अखबार ने नरेंद्र मोदी का महिमा मंडन कर डाला है जिस पर भारत में मोदी विरोधियों का काफी भरोसा था। वहां से प्रधानमंत्री के खिलाफ आई एक आवाज को भारत में ऐसे एंपलीफाई किया जाता रहा है जैसे वो आवाज शाश्वत ईश्वर की आवाज हो। लेकिन आज जब वहीं से प्रधानमंत्री मोदी उनके वर्किंग स्टाइल की तारीफ हुई है तब भारत में कंप्लीट सन्नाटा है यानी साइलेंस है। बात रविवार की है अमेरिका के सबसे बड़े अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक खबर छापी जिसका शीर्षक यानी हेडिंग था स्ट्राइकिंग डील्स अराउंड वर्ल्ड मोदी इज हैेजिंग अगेंस्ट ट्रंप। इसके मायने यह हैं कि अमेरिका के टेरिफ दबाव और वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत अपनी निर्भरता कम करने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार नई-नई डील्स कर रहा है देश के पक्ष में। यानी एक तरफ अमेरिका का दुनिया पर दबाव बढ़ता गया। दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी ने दबाव के सामने झुकने की बजाय भारत के लिए नए और आत्मनिर्भर रास्ते तलाश लिए। डॉनाल्ड ट्रंप ने भारत की अर्थव्यवस्था को डेड बताया था और नरेंद्र मोदी ने एफटीए पर एफटीए साइन किए। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि ट्रंप ने डेड इकोनमी कहा तो पीछे राहुल गांधी ने भी उनके बयान को सेकंड कर डाला था एलओपी राहुल गांधी। लेकिन अब न्यूयॉर्क टाइम्स ने प्रधानमंत्री मोदी की भरपेट तारीफ की है तो विपक्ष का एक भी नेता सामने नहीं आ सका है।
न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है कि जब डोनाल्ड ट्रंप भारत के रास्तों में कांटे बिछा रहे थे तब पीएम मोदी बहुत ही शांति से दुनिया के साथ ऐसी डील्स कर रहे थे जिसने ट्रंप के हर वॉार को बेकार कर दिया। दरअसल न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप ने भारत पर टेरिफ लगाए डिफेंस इंडस्ट्री को बदनाम करने की कोशिश की और यहां तक कि कच्चे तेल की सप्लाई रोकने का दबाव बनाया। लेकिन पीएम मोदी का विज़न कुछ और ही था। अब ट्रंप की घेराबंदी और पीएम मोदी का पलटवार कैसा है यह भी समझ लीजिए। वह भी आंकड़ों के अनुसार। इसका पहला पॉइंट है टेरिफ का जवाब। जब डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापारिक दीवारें खड़ी की तो पीएम मोदी ने ब्रिटेन और यूरोपीय संघ यानी ईयू के साथ ऐतिहासिक एफटीए की नींव रख दी। ब्रिटेन के साथ 1000 से अधिक वस्तुओं पर टेरिफ जीरो लगवा दिया। अब दूसरा पॉइंट है इसका तेल का खेल। अमेरिका ने ईरान और रूस से तेल लेने पर आंखें दिखाई। तो पीएम मोदी ने यूएई, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के नए विकल्प खोल दिए। भारत ने अमेरिका के दबाव के बावजूद रूस से तेल खरीदना जारी रखा और देश में पेट्रोल डीजल की किल्लत नहीं होने दी। अभिलेख के मुताबिक पीएम मोदी की हर विदेश यात्रा का एक स्पेसिफिक टारगेट था।
यह सिर्फ दौरे नहीं है। यात्राएं नहीं है बल्कि भारत के भविष्य की तैयारी थी। फ्रांस भारत का सबसे बड़ा एआई और डिफेंस पार्टनर बना। साउथ कोरिया शिप बिल्डिंग में दुनिया के सबसे उन्नत जहाज अब भारत के साथ मिलकर बना रहा है और न्यूजीलैंड मेरिटाइम सिक्योरिटी पार्टनर बना भारत का ताकि समुद्र में भारत के जहाज सुरक्षित रहें। नॉर्वे की बात करें तो 100 बिलियन डॉलर का निवेश और लाखों नौकरियां। सोचिए जहां दुनिया युद्ध और मंदी से जूझ रही थी वहां पीएम मोदी एक-एक कर भारत के लिए सुरक्षा कवच तैयार कर रहे थे। अब न्यूयॉर्क टाइम्स के लेखक ने एक बड़ा सवाल उठाया कि ट्रंप के तमाम नखरों और मुश्किलों के बावजूद भारत डिरेल क्यों नहीं हुआ? दरअसल इसका जवाब है विजनरी मोदी। जब चीन की अर्थव्यवस्था हाफ रही थी। पाकिस्तान भीख मांग रहा है तब भारत दुनिया की चमकती उम्मीद बना हुआ है।
पीएम मोदी ने कभी शोर नहीं मचाया। बस विकल्पों पर काम किया। ट्रंप ने भारत और चीन के बीच दरार डालने की कोशिश की तो पीएम मोदी ने एसइओ और ब्रिक्स में अपनी ताकत बढ़ाकर अपनी अहमियत और मजबूत कर ली। अब रिपोर्ट में एक और दिलचस्प बात है कि भारत का मानवीय दृष्टिकोण तुर्की हो, नेपाल हो या बांग्लादेश। भारत ने हमेशा बड़ा भाई बनकर मदद की। लेखक में एक बिच्छू और संत की कहानी के जरिए समझाया गया भारत की प्रवृत्ति ही बचाने की है। जापान जैसा देश जो 80 साल से किसी के साथ सैन्य समझौता नहीं करता था। उसने भारत पर भरोसा किया।
Continue reading on the app