ऐसे समय में जब ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खुलकर ईरान के समर्थन में उतर आए हैं। पुतिन ने ईरानी जनता के “साहस और धैर्य” की प्रशंसा करते हुए कहा है कि रूस इस कठिन दौर में तेहरान को आवश्यक सहायता और जरूरी सामान उपलब्ध करा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका के खिलाफ अकेले मोर्चा लेने वाले ईरान में पुतिन को अपने संघर्ष की एक झलक दिखाई दे रही है। खुद रूस भी यूक्रेन को लगातार मिल रहे अमेरिकी और पश्चिमी समर्थन के बावजूद वर्षों से युद्ध जारी रखे हुए है और पुतिन लगातार दावा कर रहे हैं कि रूस आखिरकार इस लड़ाई में जीत हासिल करेगा।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात में पुतिन ने कहा, “रूस ईरानी लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है और अपनी स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष में उनके साहस और दृढ़ता की प्रशंसा करता है।” उन्होंने पेजेशकियन से ईरान के सर्वोच्च नेता तक अपने अभिवादन और “भाईचारे के समर्थन” का संदेश पहुंचाने को भी कहा। पुतिन ने स्पष्ट किया कि मौजूदा कठिन परिस्थितियों में मॉस्को तेहरान की मदद करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमने इस विषय पर चर्चा की है और हम आपको जरूरी सामान उपलब्ध करा रहे हैं।”
हम आपको बता दें कि सैन्य और राजनीतिक तनाव के बावजूद रूस और ईरान के बीच आर्थिक संबंधों की रफ्तार बनी हुई है तथा दोनों देश अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग जारी रखे हुए हैं। रूस और ईरान के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में काफी गहरे हुए हैं। खासतौर पर यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के सैन्य अभियान के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग तेजी से बढ़ा है। पेजेशकियन ने भी युद्ध के दौरान और पश्चिमी प्रतिबंधों के वर्षों में रूस के समर्थन के लिए पुतिन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि रूस ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान का साथ दिया है। पेजेशकियन के अनुसार, यही साबित करता है कि दोनों देशों का रिश्ता सामान्य नहीं, बल्कि “रणनीतिक संबंध” है।
ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत एवं विस्तारित करने के उपायों पर चर्चा की। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात दिसंबर 2025 में तुर्कमेनिस्तान में एक शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। साथ ही अप्रैल के अंत में सेंट पीटर्सबर्ग में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात के दौरान भी पुतिन ने कहा था कि रूस पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए “हर संभव प्रयास” करेगा।
खास बात यह है कि पुतिन और पेजेशकियन की यह बैठक उस युद्ध के बाद दोनों नेताओं की पहली मुलाकात है, जो 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ था। हालांकि 8 अप्रैल के युद्धविराम ने लड़ाई पर रोक लगाई थी, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास छिटपुट हमले जारी रहे और स्थायी शांति की उम्मीद धुंधली बनी रही। अब फिर से ईरान और अमेरिका आमने सामने हैं और साथ ही ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ उस अभियान को भी तेज कर रहा है, जिसे वह “आर्थिक घुटन” की रणनीति बता रहा है। इस सबके बीच पुतिन से मिले समर्थन के चलते ईरान का जोश हाई नजर आ रहा है।
उधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मंगलवार को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े वायु रक्षा ठिकानों, रडार सिस्टम, समुद्री संसाधनों, बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं और संचार केंद्रों पर हमलों की पुष्टि की। ईरान ने आरोप लगाया कि एक हमले में शादी समारोह के दौरान पांच नागरिक मारे गए और दर्जनों घायल हुए। ईरानी मीडिया के अनुसार, देश के कई हिस्सों में हमले हुए, जिनमें अनेक लक्ष्य होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास थे। जवाब में ईरान ने जॉर्डन और इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों का दावा किया, जबकि बहरीन पर भी ड्रोन हमलों की खबरें आईं। जॉर्डन ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने 13 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 10 को मार गिराया। बहरीन ने भी ईरानी ड्रोन को नष्ट करने की जानकारी दी। हालांकि ईरान के कुछ दावों, विशेषकर अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
उधर, इसी एससीओ सम्मेलन के बाद पुतिन ने यूक्रेन युद्ध पर भी बेहद आक्रामक रुख दिखाया। साढ़े चार साल से अधिक समय से चल रहे युद्ध में रूस यूक्रेन के करीब पांचवें हिस्से पर नियंत्रण का दावा कर रहा है। पुतिन ने कहा कि रूसी सेना लगातार आगे बढ़ रही है और “दुश्मन आखिरकार बिखर जाएगा।” उन्होंने डोनेट्स्क क्षेत्र में अगस्त के दौरान 270 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जे और यूक्रेनी सैनिकों के दो बड़े समूहों को घेरने का दावा किया, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।
पुतिन ने यह भी स्वीकार किया कि यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूसी तेल रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है और केवल 10 प्रतिशत रिफाइनरियों की मरम्मत बाकी है। उन्होंने स्लोवियांस्क और क्रामातोर्स्क की दिशा में रूसी बढ़त का दावा करते हुए यूक्रेन की ऊर्जा संरचना पर बड़े हमलों की तैयारी की बात भी कही। पुतिन ने यूक्रेनी नेतृत्व को “आतंकवादी” बताते हुए कहा कि ऐसे लोगों से बातचीत मुश्किल है, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया कि रूस युद्ध को केवल अस्थायी रूप से रोकने की बजाय स्थायी रूप से समाप्त करने वाली वार्ता के लिए तैयार है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूतों से बातचीत की संभावना भी खुली रखी।
बहरहाल, ईरान और अमेरिका के बीच फिर तेज हुई लड़ाई तथा यूक्रेन युद्ध पर पुतिन के आक्रामक रुख ने साफ कर दिया है कि रूस और ईरान अब केवल कूटनीतिक साझेदार नहीं रहना चाहते। अमेरिका और पश्चिमी दबाव के बीच दोनों देश एक-दूसरे के लिए रणनीतिक सहारे के रूप में उभर रहे हैं। ऐसे में पुतिन का ईरान के “साहस और दृढ़ता” की प्रशंसा करना बदलती वैश्विक राजनीति में अमेरिका-विरोधी धुरी के और मजबूत होने का संकेत माना जा रहा है।
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सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, दो सितंबर अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने रिपब्लिकन पार्टी से सांसद बिल हुइजेंगा से मुलाकात की और उन्हें ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की नयी दिल्ली की पहल तथा रक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी के बारे में जानकारी दी। क्वात्रा ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘दक्षिण और मध्य एशिया पर सदन की विदेश मामलों की समिति की उपसमिति के अध्यक्ष सांसद बिल हुइजेंगा के साथ सार्थक बातचीत हुई।’’
भारतीय राजदूत ने हुइजेंगा के साथ भारत-अमेरिका साझेदारी से जुड़े हालिया घटनाक्रम और प्रगति पर विचार विमर्श किया। इसमें रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग जैसे क्षेत्र शामिल रहे।
क्वात्रा ने कहा, ‘‘मैंने ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में हमारी बढ़ती साझेदारी, जिसमें आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाना शामिल है, और क्षेत्रीय मुद्दों पर हमारे बढ़ते सहयोग के बारे में उन्हें जानकारी दी। साथ ही दोनों देशों के बीच संबंधों के लिए अमेरिकी कांग्रेस में द्विदलीय समर्थन को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया।’’
ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं के बीच अमेरिका भारत के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है।
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