अगली बार फाइनल मैच खेलने उतरेंगे वैभव सूर्यवंशी, ट्रॉफी पर होंगी नजरें, नोट कर लीजिए डेट और सही टाइम
Vaibhav Sooryavanshi: दलीप ट्रॉफी रोमांचक अंदाज में आगे बढ़ते हुए अब फाइनल मुकाबले तक आ पहुंची है. पहला सेमीफाइनल मैच सेंट्रल जोन और ईस्ट जोन के बीच खेला गया, जिसे ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन की टीम ने जीतकर अपने नाम किया और फाइनल में एंट्री की. ऐसे में अब वैभव सूर्यवंशी अगली बार फाइनल मैच खेलने मैदान पर उतरेंगे, जिसपर उनकी नजरें ट्रॉफी पर उतरेंगी. हालांकि, अभी दूसरा सेमीफाइनल नॉर्थ जोन और साउथ जोन के बीच खेला जा रहा है, जिसके बाद ही फैसला होगा कि फाइनल मैच में ईस्ट जोन का सामना किस टीम से होने वाला है. तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं फाइनल मैच कब, कहां और कितने बजे से खेला जाएगा.
कितनी तारीख से खेला जाएगा फाइनल मैच?
दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला 6 सितंबर से खेला जाने वाला है. 6 सितंबर से ये मैच चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा, जिसपर हर किसी की नजरें टिकी होंगी. चूंकि, इस मैच में एक बार फिर वैभव सूर्यवंशी एक्शन में नजर आने वाले हैं.
4⃣,6⃣,4⃣,4⃣, ????
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) September 1, 2026
Vaibhav Sooryavanshi ???? Yash Thakur battle part 2⃣ ????#DuleepTrophy | #CZvEZ
Scorecard ▶️ https://t.co/kyExeix2VY pic.twitter.com/wX8L5AHdTB
कितने बजे से शुरू होगा फाइनल मैच?
दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल मैच भी बाकी के मुकाबलों की ही तरह सुबह 9.30 बजे से शुरू होगा, जिसके टॉस के लिए दोनों कप्तान 9 बजे मैदान पर उतरेंगे. यदि ईस्ट जोन की टीम पहले बल्लेबाजी करती है, तो आपको वैभव सूर्यवंशी ठीक 9.30 बजे से एक्शन में नजर आ सकते हैं. लेकिन, अगर ईस्ट जोन पहले फील्डिंग करती है, तो आपको वैभव की बैटिंग देखने के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है.
कहां देख सकेंगे फाइनल मुकाबला?
15 साल के वैभव सूर्यवंशी अब अगली बार दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में खेलते दिखने वाले हैं. टूर्नामेंट के बाकी मुकाबलों की ही तरह फाइनल मैच को भी आप टीवी पर स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर और ओटीटी प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर लाइव देख सकते हैं. इसका मतलब है कि वैभव सूर्यवंशी को आप टीवी पर स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर देख सकेंगे और उनके मैच की लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार पर देख सकेंगे.
वैभव सूर्यवंशी ने सेमीफाइनल में की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी
दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मैच में सेंट्रल जोन के खिलाफ वैभव सूर्यवंशी ने शानदार बल्लेबाजी की थी. उन्होंने पहली पारी में 81 गेंदों पर 92 रनों की धाकड़ पारी खेली थी, जिसमें 7 चौके और 7 छक्के लगाए थे. भले ही वह शतक लगाने से चूक गए हो, लेकिन उस मैच में अर्धशतक लगाने के साथ ही वैभव दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक लगाने वाले सबसे युवा क्रिकेटर बन गए. दूसरी पारी में वैभव ने अच्छी शुरुआत की.
मगर, वह 43 गेंद पर 40 रनों की पारी खेलकर आउट हो गए. अपनी पारी में वैभव ने 3 चौके और 2 छक्के भी लगाए. इस तरह सेमीफाइनल मैच में वैभव सूर्यवंशी अपनी ईस्ट जोन की टीम की ओर से सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. ऐसे में अब सभी की नजरें उनपर टिकी होंगी और उनकी टीम को उनसे बड़ी पारी की उम्मीद रहेगी.
What. A. Catch ????
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) September 1, 2026
Central Zone captain Rajat Patidar pulls off an absolute blinder ????
Scorecard ▶️ https://t.co/kyExeix2VY#DuleepTrophy | #CZvEZ pic.twitter.com/NfAD3Kk9RH
ईस्ट जोन की टीम है ऐसी
ईस्ट जोन टीम: वैभव सूर्यवंशी, अभिमन्यु ईश्वरन, इशान किशन (विकेटकीपर/कप्तान), सुभ्रांशु सेनापति, विराट सिंह, शाहबाज अहमद, अनुकूल रॉय, अभिजीत के सरकार, मुकेश कुमार, मोहम्मद शमी, डेनिश दास, कुमार कुशाग्र, सुदीप कुमार घरामी, सूरज सिंधु जयसवाल, शिखर मोहन
ये भी पढ़ें: IND VS AFG: 13 सितंबर से एक्शन में लौटेगी टीम इंडिया, नोट कर लीजिए भारत-अफगानिस्तान सीरीज का शेड्यूल और टाइम
Har Chhath Vrat Katha 2026: हर छठ आज, संतान सुख के लिए जरूर पढ़ें हल षष्ठी की ये पौराणिक कथा
Har Chhath Vrat Katha 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हर छठ या हल षष्ठी का व्रत रखा जाता है। इस साल यह पर्व 2 सितंबर, बुधवार को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी के जन्मोत्सव से जुड़ा है। बलराम जी का प्रमुख शस्त्र हल माना जाता है, इसलिए इस पर्व को हल षष्ठी या हल छठ भी कहा जाता है।
यह व्रत विशेष रूप से संतान की सुख-समृद्धि से जुड़ा माना जाता है। माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ व्रत रखती हैं। इस दिन पूजा-पाठ के साथ हर छठ की कथा पढ़ने और सुनने की भी परंपरा है।
हर छठ की लोकप्रिय पौराणिक कथा
लोकप्रिय पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक ग्वालिन रहती थी। वह दूध, दही और मक्खन बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती थी। एक बार वह गर्भवती हुई और प्रसव का समय नजदीक आ गया, लेकिन उसने रोजी-रोटी के लिए अपना काम जारी रखा।
एक दिन अचानक उसे रास्ते में प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। पास में झरबेरी की झाड़ियां देखकर वह उनकी ओट में बैठ गई। कुछ समय बाद उसने एक पुत्र को जन्म दिया।
कथा के अनुसार, ग्वालिन को उस दिन भी अपना दूध-दही और मक्खन बेचने की चिंता थी। उसने नवजात बच्चे को कपड़े में लपेटकर झाड़ियों के पास छोड़ दिया और सामान बेचने के लिए गांव की ओर चली गई।
व्रत रखने वाली महिलाओं से बोला झूठ
उस दिन गांव की कई महिलाओं ने हर छठ का व्रत रखा था। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस व्रत में गाय के दूध से बनी चीजों का सेवन नहीं किया जाता और भैंस के दूध से बनी सामग्री का उपयोग किया जाता है।
ग्वालिन के पास मौजूद दूध, दही और मक्खन में गाय और भैंस दोनों का दूध मिला हुआ था। लेकिन उसने महिलाओं से कहा कि उसके पास मौजूद सारी सामग्री भैंस के दूध से बनी है। महिलाओं ने उसकी बात पर भरोसा कर लिया और उससे दूध, दही और मक्खन खरीद लिया। सामान बिक जाने के बाद ग्वालिन वापस लौट गई।
हल की चपेट में आया नवजात
कथा के अनुसार, जिस जगह ग्वालिन ने अपने बच्चे को छोड़ा था, उसके पास एक किसान खेत में हल चला रहा था। अचानक उसके बैल इधर-उधर भागने लगे। इसी दौरान हल उस स्थान की ओर पहुंच गया, जहां नवजात बच्चा रखा था।
हल की चोट से बच्चा घायल हो गया। कुछ देर बाद किसान को बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। वह झाड़ियों के पास पहुंचा तो वहां घायल अवस्था में एक नवजात को देखा। घबराहट में उसने बच्चे के घाव को जोड़ने का प्रयास किया और वहां से चला गया।
बच्चे की हालत देखकर टूट गई ग्वालिन
जब ग्वालिन अपना सामान बेचकर वापस लौटी तो उसने अपने बच्चे को घायल अवस्था में देखा। यह देखकर वह बेहद दुखी हो गई और रोने लगी। उसे अपनी कही हुई बात याद आई। उसे एहसास हुआ कि उसने हर छठ का व्रत रखने वाली महिलाओं से झूठ बोलकर उन्हें गाय के दूध से बनी सामग्री भी बेच दी थी। कथा के अनुसार, उसने अपने बच्चे के साथ हुई घटना को अपने झूठ और छल का परिणाम माना। इसके बाद उसने अपनी गलती स्वीकार करने और महिलाओं से माफी मांगने का फैसला किया।
महिलाओं के सामने स्वीकार की अपनी गलती
ग्वालिन उसी गांव में पहुंची और महिलाओं को पूरी बात बता दी। उसने स्वीकार किया कि उसने जो दूध, दही और मक्खन बेचा था, उसमें गाय का दूध भी मिला हुआ था।
उसने महिलाओं से अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी और अपने बच्चे के साथ हुई घटना भी बताई। उसका पश्चाताप देखकर व्रत रखने वाली महिलाओं ने उसे माफ कर दिया और आशीर्वाद दिया।
आशीर्वाद के बाद बच्चे को जीवित पाया
मान्यता के अनुसार, महिलाओं से माफी मांगने के बाद ग्वालिन जब वापस झरबेरी की झाड़ियों के पास पहुंची तो उसने अपने बच्चे को जीवित पाया। अपने पुत्र को सुरक्षित देखकर उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने इसे हर छठ की महिमा और भगवान की कृपा माना।
कथा के अनुसार, इस घटना के बाद ग्वालिन ने जीवन में कभी झूठ नहीं बोलने का संकल्प लिया और श्रद्धा के साथ हर छठ या हल षष्ठी का व्रत रखने लगी।
हर छठ की कथा से क्या संदेश मिलता है?
इस लोकप्रिय कथा को धार्मिक परंपरा में सत्य, नियमों के पालन और अपनी गलती स्वीकार करने के संदेश से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि हर छठ का व्रत संतान के कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है।
इसी वजह से हर छठ के दिन महिलाएं विधि-विधान से पूजा करने के साथ व्रत कथा पढ़ती और सुनती हैं। कथा के बाद भगवान बलराम और संबंधित देवी-देवताओं का स्मरण कर संतान की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation
Haribhoomi









