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ZEE 5 September Ott Release : सितंबर में जी5 पर आएगा तूफान, आ रही हैं ये जबरदस्त फिल्में और सीरीज

जी5 ने सितंबर में आने वाली फिल्मों और सीरीज की लिस्ट जारी की है जिसमें रिएल्टी शोज के साथ हिंदी, मलयालम और कन्नड़ फिल्में और सीरीज शामिल हैं।

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हर्षिता गौर बोलीं- ‘मिर्जापुर’ ने पहचान दी:एक साल काम नहीं मिला तो डिप्रेशन में गईं; अल्लू अर्जुन की तारीफ ने बढ़ाया हौसला

‘मिर्जापुर’ की डिंपी यानी हर्षिता गौर लंबे समय से दर्शकों के बीच पहचान बना चुकी हैं। ‘साड्डा हक’ के बाद उन्हें करीब एक साल तक काम नहीं मिला। इस दौर में उन्हें खुद भी पता नहीं था कि वह डिप्रेशन से गुजर रही हैं। एक्टिंग वर्कशॉप ने उन्हें इससे बाहर निकलने में मदद की। ‘मिर्जापुर’ ने उनके करियर को नई पहचान दी और अब वह फिल्म के जरिए बड़े पर्दे पर नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से बातचीत में हर्षिता ने करियर के उतार-चढ़ाव, लॉकडाउन, खुद को पहचानने की सीख और 2022 में अल्लू अर्जुन से हुई खास मुलाकात का किस्सा साझा किया। सवाल: ‘साड्डा हक’ के बाद आपके करियर में सबसे मुश्किल दौर कौन सा रहा? जवाब: ‘साड्डा हक’ खत्म होने के बाद करीब एक साल तक मेरे पास काम नहीं था। शो तीन साल चला था और मुझे लगा था कि अब फिल्मों में काम करूंगी। लेकिन काम मिलना आसान नहीं था। शुरुआत के एक-दो महीने घूमने-फिरने में निकल गए। उसके बाद मुंबई में बिना काम के रहना एक एक्टर के लिए काफी मुश्किल होता है। उस समय मैं डिप्रेशन में चली गई थी। सवाल: उस समय आपको पता था कि आप डिप्रेशन में जा रही हैं? जवाब: नहीं, उस समय मुझे बिल्कुल एहसास नहीं था। बाद में डिप्रेशन के लक्षणों के बारे में पता चला तो पीछे मुड़कर समझ आया कि मेरे साथ भी ऐसा ही हो रहा था। मैं मुंबई वाले घर में ही रहती थी। एक दिन पड़ोस वाली आंटी आईं और उन्होंने कहा कि काफी दिनों से दिखाई नहीं दीं। तब भी मैं किसी को ठीक से नहीं बता पा रही थी कि मेरे साथ क्या हो रहा है। सवाल: फिर इस दौर से बाहर कैसे निकलीं? जवाब: मैंने अतुल मंगिया के सजेस्ट करने पर एक एक्टिंग वर्कशॉप की। मैं आज भी उन्हें अपना गुरु मानती हूं। उन्होंने मुझे एक एक्टर के तौर पर बेहतर किया और मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे बचाया भी। वह अनुभव मेरे लिए थेरेप्यूटिक रहा। उसके बाद समझ आया कि ऐसा महसूस होने पर थेरेपिस्ट से भी बात की जा सकती है। उस समय मुझे मेंटल हेल्थ या डिप्रेशन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। सवाल: ‘मिर्जापुर’ आपके करियर में कब आया? जवाब: ‘मिर्जापुर’ मैंने अक्टूबर 2017 से करना शुरू किया था। उससे पहले मेरी एक्टिंग वर्कशॉप हो चुकी थी। यह मेरे लिए बहुत बड़ा मोड़ साबित हुआ। शो ने मुझे लोगों तक पहुंचाया और डिंपी के किरदार से मुझे अलग पहचान मिली। सवाल: ‘मिर्जापुर’ की वजह से आपको आगे कितना फायदा मिला? जवाब: बहुत फायदा हुआ। ‘जहानाबाद’ का काम भी कहीं न कहीं ‘मिर्जापुर’ की वजह से मिला। साउथ की फिल्म ‘फलकनुमा दास’ भी मिली। जब लोग आपको किसी काम में देख चुके होते हैं तो उनका भरोसा बढ़ जाता है। ‘मिर्जापुर’ ने मेरे करियर में यह भरोसा बनाने में बहुत मदद की। सवाल: साउथ की फिल्म के बाद वहां आगे काम क्यों नहीं कर पाईं? जवाब: ‘फलकनुमा दास’ 2019 में रिलीज हुई थी। उसके बाद मैं वहां और काम करना चाहती थी, लेकिन लगातार दो लॉकडाउन आ गए। मैं वापस वहां जा ही नहीं पाई। वरना मेरी साउथ में और काम करने की इच्छा थी। सवाल: लॉकडाउन का समय आपके लिए कैसा रहा? जवाब: पहला लॉकडाउन मैंने मुंबई में अपने पड़ोसी अंकल-आंटी के साथ बिताया। उनके दो घर हैं और उनका परिवार जैसा माहौल मेरे लिए हमेशा अच्छा रहा है। हम साथ रहते थे, खाते थे और समय बिताते थे। इसलिए मुझे अकेलापन महसूस नहीं हुआ। सवाल: 2022 में फिर ऐसा समय आया जब आपको लगा कि एक्टिंग सही फैसला था या नहीं? जवाब: हां, 2022 में मैं पर्सनली और प्रोफेशनली दोनों स्तर पर मुश्किल दौर से गुजर रही थी। लगता था कि अब तक मुझे यह कर लेना चाहिए था, लेकिन चीजें वैसी नहीं हो रही थीं। मन में आया कि क्या मुझे कुछ और करना चाहिए? क्या एक्टिंग में पर्याप्त मौके मिल रहे हैं या मिलेंगे? क्या मुझे खुद में बदलाव करना चाहिए? उस समय मैं थोड़ा डगमगाई थी। सवाल: फिर ऐसा क्या हुआ जिससे आपका भरोसा वापस आया? जवाब: मेरे लिए वह अल्लू अर्जुन से हुई मुलाकात थी। मैं गोवा में थी और वह अपनी फैमिली के साथ थे। उन्होंने मुझे देखा और खुद पास आकर बात की। उन्होंने ‘मिर्जापुर’ और मेरे किरदार के बारे में बात की और मेरी स्क्रीन प्रेजेंस की भी तारीफ की। मुझे बहुत अच्छा लगा, क्योंकि मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानती भी नहीं थी। सवाल: क्या इसके बाद उनसे दोबारा मुलाकात हुई? जवाब: हां, कुछ दिन बाद 31 दिसंबर को मैं उनसे फिर टकरा गई। वह अपनी फैमिली के साथ थे और मैं दोस्तों के साथ। नया साल शुरू होने वाला था, तब हमने एक-दूसरे को विश किया। उन्होंने फिर मेरे किरदार और शो की बात की और मुझसे कहा कि तुम्हें और काम करना है, तुम्हारे लिए अभी बहुत लंबा रास्ता है। सवाल: उनकी इस बात का आप पर कितना असर हुआ? जवाब: उन्हें बिल्कुल नहीं पता कि उनकी उस छोटी सी बात ने एक डिमोटिवेटेड इंसान को कितनी मोटिवेशन दी। अगले दिन यानी 1 जनवरी को मुझे लगा कि यह यूनिवर्स का सिग्नल था। वह मुझे जानते नहीं थे, मेरा उनसे कोई कॉमन लिंक नहीं था और मैंने उनकी किसी फिल्म में काम भी नहीं किया था। फिर भी उन्होंने मेरे काम की तारीफ की और आगे बढ़ने के लिए कहा। यह बात आज तक मेरे साथ है। सवाल: कभी लगा कि उनसे नंबर एक्सचेंज कर लेना चाहिए था? जवाब: अब जो हो गया, वो हो गया। मेरे पास उनके साथ एक फोटो भी नहीं है। लेकिन मानती हूं कि अगर यूनिवर्स ने उस समय उनसे मिलवाया था तो शायद दोबारा भी मिलवा देगा। मैं आज भी चाहती हूं कि उनसे मिलूं और उन्हें बताऊं कि उनकी उस एक बात का मुझ पर कितना असर हुआ था। सवाल: इस पूरी जर्नी में आपकी सबसे बड़ी सफलता क्या रही? जवाब: खुद को पहचानना। मेरे लिए पर्सनल ग्रोथ सबसे बड़ी सफलता है। इस फील्ड में रहते हुए समझ आया कि मैं कौन हूं, मेरी स्ट्रेंथ, कमजोरियां और पैटर्न क्या हैं और मैं अपने काम में क्या लेकर आती हूं। सवाल: इतने सालों में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही? जवाब: अपनी उम्मीदों और वास्तविकता के बीच संतुलन बनाना। हम ए से शुरू करते हैं और जेड तक पहुंचना चाहते हैं। बी, सी या डी तक पहुंचने पर लगता है कि अभी जेड तक नहीं पहुंचे। हम भूल जाते हैं कि शुरुआत ए से की थी। अपनी प्रगति को पहचानना और उसकी अहमियत समझना मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती रही। सवाल: करियर के उतार-चढ़ाव से आपने सबसे बड़ी सीख क्या ली? जवाब: अब मुझे लगता है कि मेहनत करना हमारे हाथ में है, लेकिन उसका फल कब और कितना मिलेगा, यह हमारे हाथ में नहीं है। इसलिए जो हमारे हाथ में नहीं है, उसकी चिंता क्यों करनी। अपना रास्ता चुनिए, मेहनत करते रहिए और आगे बढ़ते रहिए। अब मुझे हर चीज में मजा आने लगा है। _____________________ हर्षिता गौर का यह इंटरव्यू भी पढ़ें.. हर्षिता गौर ने ‘मिर्जापुर’ पहले ठुकराया था:एक्सेल ऑफिस इस उम्मीद में पहुंचीं कि फरहान अख्तर की नजर पड़ेगी और हीरोइन बना देंगे ‘मिर्जापुर’ में डिंपी पंडित का किरदार निभाकर घर-घर पहचान बनाने वालीं हर्षिता गौर अब ‘मिर्जापुर: द मूवी’ में नजर आएंगी। दिलचस्प बात यह है कि जिस सीरीज ने उन्हें पहचान दी, उसे उन्होंने शुरुआत में करने से मना कर दिया था। उस वक्त ओटीटी का दौर नया था और हर्षिता टीवी पर मुख्य किरदार निभा चुकी थीं। उन्हें लगा था कि किसी की बहन का किरदार क्यों निभाएं।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..

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वनडे में सबसे बड़ी पारी खेलने वाला कप्तान, रोहित, विराट या सचिन नहीं, इस भारतीय के नाम रिकॉर्ड

virender sehwag world record: वनडे क्रिकेट में समय के साथ कई रिकॉर्ड टूटे हैं. नए बल्लेबाज आए और बड़े स्कोर बनने लगे. इसके बावजूद कप्तान के तौर पर सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी का रिकॉर्ड अब भी वीरेंद्र सहवाग के नाम है. रोहित शर्मा, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली के तमाम वनडे रिकॉर्ड के बीच सहवाग के बल्ले से 2011 में निकले 219 रन आज भी कप्तान के रूप में सबसे बड़ी पारी का रिकॉर्ड बना हुआ है. Wed, 2 Sep 2026 05:01:03 +0530

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