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पूजा में इस्तेमाल दीये और बाती को दोबारा क्यों नहीं जलाना चाहिए? जानें इसका धार्मिक महत्व और नियम
Puja me jali hui baati ko dobara kyon nahin jalana chahiye: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान इस्तेमाल होने वाले दीपक और उसकी बाती को लेकर भी कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि एक बार पूरी तरह जल चुकी बाती को दोबारा पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। यही कारण है कि प्रतिदिन की पूजा में नई बाती का इस्तेमाल करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
दीपक की बाती को लेकर धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, दीपक की लौ को ज्ञान, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जब कोई बाती पूरी तरह जलकर समाप्त हो जाती है, तो उसकी ऊर्जा भी पूरी तरह उपयोग हो चुकी मानी जाती है, इसी वजह से इसे दोबारा जलाना उचित नहीं माना जाता। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि पूजा में इस्तेमाल होने वाली हर सामग्री को शुद्धता और ताजगी के साथ अर्पित करना आवश्यक बताया गया है, और जली हुई बाती इस मापदंड पर खरी नहीं उतरती।
दीपक जलाने का सही नियम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, प्रतिदिन पूजा के लिए नई रुई की बाती का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि बाती बनाते समय स्वच्छ रुई का उपयोग करना चाहिए, और इसे बनाने के दौरान मन में भगवान का ध्यान करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इसके अलावा दीपक में शुद्ध घी या तिल के तेल का इस्तेमाल करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
आधी जली बाती को लेकर क्या है मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर पूजा के दौरान किसी कारणवश दीपक बीच में ही बुझ जाता है और बाती पूरी तरह नहीं जली है, तो कुछ परंपराओं में उसे दोबारा जलाने की अनुमति दी जाती है, बशर्ते बाती को साफ करके सही स्थिति में रखा जाए। हालांकि जो बाती पूरी तरह जलकर राख हो चुकी है, उसे किसी भी परिस्थिति में दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
दीपक की राख का सही निपटान
धार्मिक परंपराओं में यह भी बताया गया है कि दीपक की जली हुई बाती की राख को सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय किसी पवित्र स्थान, जैसे तुलसी के पौधे के पास या मिट्टी में विसर्जित करना उचित माना जाता है। मान्यता है कि इससे पूजा सामग्री का सम्मान बना रहता है और इसका सही तरीके से निपटान भी सुनिश्चित होता है।
आज भी हर घर में निभाया जाता है यह नियम
समय के साथ भले ही पूजा-पाठ के तौर-तरीकों में कुछ बदलाव आया हो, लेकिन प्रतिदिन नई बाती से दीपक जलाने की यह परंपरा आज भी अधिकतर हिंदू घरों में उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। आज भी सुबह-शाम की पूजा में नई और स्वच्छ बाती का इस्तेमाल करना एक अनिवार्य परंपरा मानी जाती है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
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