जरूरत की खबर- FDA ने रोकी धतूरे की ऑनलाइन बिक्री:जानिए यह कितना खतरनाक, अगर गलती से खा लिया तो तुरंत क्या करें
कर्नाटक के फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने अमेजन, स्विगी, इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के फूड लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। जांच में पता चला कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर धतूरे के फल और बीज खाने-पीने के प्रोडक्ट्स की कैटेगरी में बेचे जा रहे थे। मामला तब सामने आया, जब एक महिला की मां ने धतूरे को सामान्य फल समझकर खा लिया और उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद फूड सेफ्टी अधिकारियों ने जांच शुरू की। दरअसल, धतूरा एक टॉक्सिक प्लांट है। इसके सेवन से गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ऐसे में इसके बारे में सही जानकारी होना जरूरी है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में धतूरा पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. एम.के सिंह, डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- धतूरा क्या है? जवाब- धतूरा एक टॉक्सिक प्लांट है, जो भारत समेत दुनिया के कई देशों में उगता है। बड़े सफेद या बैंगनी फूल और कांटेदार फल इसकी पहचान हैं। यह नाइटशेड (Solanaceae) परिवार का सदस्य है, जिसमें टमाटर, आलू और बैंगन जैसे पौधे भी शामिल हैं। हालांकि, धतूरा इन पौधों से अलग है, क्योंकि इसके बीज, पत्तियां, फूल, फल और जड़, सभी में जहरीले रसायन पाए जाते हैं। सवाल- इसे जहरीला क्यों माना जाता है? जवाब- धतूरे के सभी हिस्सों में जहरीले केमिकल होते हैं। ये ब्रेन और नर्वस सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इसलिए धतूरे को जहरीला पौधा माना जाता है। सवाल- धतूरे को खाने की चीज बताकर ऑनलाइन बेचने का पूरा मामला क्या है? क्या ये सिर्फ मिस्टेक है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- क्या यह सिर्फ गलती थी? फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने इसे साधारण गलती नहीं माना है। डिपार्टमेंट का कहना है कि धतूरा एक जहरीला पौधा है। अगर कोई प्लेटफॉर्म उसे खाने वाले प्रोडक्ट की तरह दिखाता है, तो इससे लोगों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है। इसी वजह से अधिकारियों ने केवल लिस्टिंग हटाने के बजाय लाइसेंस निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई भी की है। सवाल- धतूरे में कौन-से जहरीले तत्व होते हैं? जवाब- धतूरे में ‘ट्रोपेन एल्कलॉइड्स’ नाम के जहरीले केमिकल कंपाउंड्स होते हैं। ये केमिकल नर्वस सिस्टम को प्रभावित करते हैं और धतूरे की टॉक्सिसिटी के लिए जिम्मेदार होते हैं। ग्राफिक में इस समूह के सभी जहरीले तत्व देखिए- सवाल- अगर कोई गलती से धतूरा खा ले सेहत पर क्या असर होगा? जवाब- धतूरा खाने के बाद उसके जहरीले केमिकल पेट और आंतों से ब्लड में पहुंच जाते हैं। इसके बाद ये पूरे शरीर में फैलकर नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने लगते हैं। इसे थोड़ा विस्तार से समझिए- 1. जहर ब्लड में पहुंचता है 2. शरीर के सामान्य सिग्नल गड़बड़ होने लगते हैं 3. ब्रेन पर असर शुरू होता है 4. हार्ट और शरीर पर असर बढ़ता है 5. गंभीर टॉक्सिसिटी सवाल- धतूरा खाने पर कौन-से शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं? जवाब- धतूरा टॉक्सिसिटी के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्ति ने धतूरे की कितनी मात्रा खाई है। उसके शरीर में जहर कितना फैल चुका है। ग्राफिक में सभी लक्षण देखिए- सवाल- धतूरा खाने के कितनी देर बाद लक्षण दिख सकते हैं? जवाब- आमतौर पर इसके शुरुआती लक्षण 30 मिनट से 2 घंटे के भीतर दिखने शुरू हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इन्हें उभरने में इससे ज्यादा समय भी लग सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति ने धतूरे का कौन-सा हिस्सा खाया है, कितनी मात्रा में खाया है और उसकी उम्र और हेल्थ कंडीशन कैसी है। सवाल- क्या धतूरा जानलेवा भी हो सकता है? जवाब- हां, इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इसमें मौजूद जहरीले रसायनों की मात्रा का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। यही कारण है कि डॉक्टर धतूरा टॉक्सिसिटी के हर केस को मेडिकल इमरजेंसी मानते हैं। सवाल- अगर कोई गलती से धतूरा खा ले तो तुरंत क्या करना चाहिए? जवाब- इसे मेडिकल इमरजेंसी मानना चाहिए। घरेलू इलाज या लक्षणों के दिखने का इंतजार करने के बजाय तुरंत डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए। क्या करना चाहिए और क्या नहीं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या धतूरे को छूने से भी नुकसान हो सकता है? जवाब- पौधे को छूने के बाद अगर हाथ धोए बिना आंख, नाक या मुंह को छू लिया जाए तो समस्या हो सकती है। सवाल- क्या आयुर्वेद या पारंपरिक चिकित्सा में धतूरे का कोई इस्तेमाल है? जवाब- हां, आयुर्वेद में धतूरे का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसे सामान्य जड़ी-बूटी की तरह नहीं माना जाता। ‘जर्नल ऑफ आयुर्वेदिक एंड इंटीग्रेटेड मेडिकल साइंस’ (JIMS) में पब्लिश एक रिव्यू के मुताबिक, आयुर्वेद में धतूरे को सेमी-पॉइजनस कैटेगरी में रखा गया है। यानी यह ऐसा पदार्थ है, जिसमें औषधीय गुण भी हैं और विषैले गुण भी। इसके पत्ते, फूल, बीज और जड़ का यूज अलग-अलग आयुर्वेदिक दवाओं में होता है। हालांकि, आयुर्वेद में भी धतूरे का उपयोग बहुत सावधानी से किया जाता है। पहले विशेष प्रक्रियाओं से इसकी टॉक्सिसिटी कम की जाती है। साथ ही इसकी मात्रा का सख्ती से पालन किया जाता है, क्योंकि थोड़ी सी चूक भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। सवाल- किसी जहरीले पौधे को फूड सप्लीमेंट बताकर बेचने पर क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाब- ऐसे मामलों में फूड सेफ्टी अधिकारी जांच कर सकते हैं और कई सख्त कदम उठा सकते हैं, जैसेकि- सवाल- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऐसा प्रोडक्ट मिलने पर ग्राहक इसकी शिकायत कहां कर सकते हैं? जवाब- ग्राहक इसकी शिकायत सीधे FSSAI के ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। यह पोर्टल पैकेज्ड फूड, ऑनलाइन एग्रीगेटर और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़ी शिकायतों के लिए बनाया गया है। ग्राहक शिकायत के साथ प्रोडक्ट की फोटो, स्क्रीनशॉट, बिल या अन्य सबूत भी अपलोड कर सकते हैं। ***** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा …………………… ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- 4,000 किलो मिलावटी खोया जब्त:ऐसे करें असली खोया की पहचान, मिठाई खरीदते समय बरतें ये 8 जरूरी सावधानियां हाल ही में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटी खोया के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की। कानपुर, मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर और मुरादाबाद से अब तक करीब 4,000 किलो मिलावटी खोया जब्त करके उसे नष्ट किया जा चुका है। पूरी खबर पढ़ें…
जरूरत की खबर- बारिश में दूषित हो सकता है पानी:हो सकते हैं गंभीर हेल्थ रिस्क, एक्सपर्ट से जानें वाटर टैंक क्लीनिंग का सही तरीका
बारिश के मौसम में जल प्रदूषण का रिस्क बढ़ जाता है। कई बार पानी देखने में साफ लगता है, लेकिन उसमें बैक्टीरिया, वायरस और दूसरे हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं। सीवर लीकेज और जलभराव के कारण यह रिस्क बढ़ता है। वही वाटर सप्लाई हमारे घरों में होती है। पानी की टंकी में, अंडर वाटर टैंक में वही पानी इकट्ठा होता है। ऐसे में अगर वाटर टैंक की नियमित सफाई न हो या RO के फिल्टर समय पर बदले न जाएं तो वो दूषित पानी हमारे शरीर में पहुंच सकता है। इसे पीने से डायरिया, टाइफाइड और पीलिया जैसी बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में मानसून में पानी की टंकी और RO की सफाई पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- बारिश के मौसम में पानी की टंकी और RO की सफाई पर जोर क्यों दिया जाता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या मानसून में पानी जल्दी दूषित होता है? जवाब- हां, बारिश के दौरान मिट्टी, गंदगी और सीवेज का पानी वाटर सोर्स तक पहुंच जाता है। पाइपलाइन में लीकेज होने से सप्लाई में गंदा पानी मिल सकता है। इसके अलावा नमी की वजह से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ते हैं, जिससे पानी जल्दी दूषित होता है। सवाल- क्या सिर्फ पुराने घरों में यह समस्या होती है? जवाब- नहीं, अगर रेगुलर टंकी की सफाई न हो या समय पर RO की सर्विसिंग न हो तो यह समस्या नए घरों में भी हो सकती है। सवाल- गंदी RO मशीन के इस्तेमाल से क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- इससे बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं। ऐसी स्थिति में मशीन पानी को पूरी तरह फिल्टर नहीं कर पाती। लंबे समय तक ये दूषित पानी पीने से डाइजेस्टिव इश्यूज हो सकते हैं। सवाल- दूषित पानी पीने से किन बीमारियाें का रिस्क होता है? जवाब- दूषित पानी कई संक्रामक बीमारियों का कारण बन सकता है। इसका असर सबसे पहले डाइजेस्टिव सिस्टम पर पड़ता है और कई बार गंभीर इन्फेक्शन भी हो सकता है। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन लोगों को रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- दूषित पानी सभी के लिए नुकसानदायक है, लेकिन कुछ लोगोें के लिए ये ज्यादा रिस्की होता है, जैसेकि- सवाल- क्या दूषित पानी के इस्तेमाल से स्किन प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं? जवाब- हां, दूषित पानी के इस्तेमाल से खुजली, रैशेज, फंगल इन्फेक्शन और बाल झड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सेंसिटिव स्किन वाले लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। सवाल- पानी की टंकी कितने दिनों में साफ करनी चाहिए? जवाब- आमतौर पर घर की पानी की टंकी हर 3-6 महीने में साफ करानी चाहिए। अगर पानी में स्मेल, रंग या गंदगी नजर आए तो तुरंत सफाई करवाना बेहतर है। सवाल- कैसे जानें कि अब वाटर टैंक साफ करने की जरूरत है? जवाब- अगर पानी का रंग, स्वाद या स्मेल बदल जाए तो यह टंकी में गंदगी जमा होने का संकेत है। सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या वाटर टैंक खुला रहने से रिस्क बढ़ता है? जवाब- हां, टंकी खुली रहने से उसमें धूल, कीड़े, मच्छर और बारिश का गंदा पानी पहुंचता है। इससे बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इसलिए टंकी हमेशा पूरी तरह ढककर रखें। सवाल- क्या खुद से पानी की टंकी साफ कर सकते हैं? जवाब- छोटी टंकियों की बेसिक सफाई की जा सकती है। लेकिन बड़ी या ऊंचाई वाली टंकियों की सफाई हमेशा प्रोफेशनल्स से कराना चाहिए। सवाल- वाटर टैंक साफ करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- सफाई से पहले टंकी पूरी तरह खाली करें। साफ ब्रश और सेफ डिसइन्फेक्टेंट का यूज करें। सफाई के बाद टंकी को अच्छी तरह धोएं। सभी जरूरी सावधानियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- RO का फिल्टर कितने दिनों में बदलना चाहिए? जवाब- RO के अलग-अलग फिल्टर की लाइफ अलग होती है। आमतौर पर इन्हें इस तरह बदला जाता है- सेडिमेंट (प्री) फिल्टर: हर 3-6 महीने में। कार्बन फिल्टर: हर 6-12 महीने में। पोस्ट-कार्बन फिल्टर: हर 12 महीने में। RO मेम्ब्रेन: हर 1-2 साल में। ध्यान दें, पानी में TDS का लेवल ज्यादा हो तो फिल्टर जल्दी बदलने पड़ सकते हैं। पानी का स्वाद, स्मेल या फ्लो बदलने लगे तो फिल्टर चेक कराना चाहिए। सवाल- RO खराब या गंदा होने के संकेत क्या हैं? जवाब- RO मशीन खराब या गंदा होने के संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या सिर्फ फिल्टर बदलना काफी है? जवाब- नहीं, RO के फिल्टर के साथ मशीन, पाइप और स्टोरेज टैंक की सफाई भी जरूरी है। सवाल- क्या RO का पानी हमेशा 100% सुरक्षित होता है? जवाब- नहीं, RO तभी सुरक्षित पानी देता है, जब उसकी रेगुलर सर्विसिंग और सफाई हो। खराब या पुराने फिल्टर होने पर पानी दूषित हो सकता है। सवाल- मानसून में पानी को साफ और सुरक्षित रखने के लिए क्या करें? जवाब- मानसून में टंकी और RO की रेगुलर सफाई के साथ पाइपलाइन की जांच भी जरूरी है। सेफ वाटर के लिए ग्राफिक में दी गई कुछ बातें ध्यान रखें- सवाल- घर में पानी की क्वालिटी कैसे जांचें? जवाब- घर में पानी की क्वालिटी चेक करने के लिए ये तरीके अपनाए जा सकते हैं- सवाल- क्या RO के साथ UV (अल्ट्रावायलेट) या UF (अल्ट्राफिल्ट्रेशन) सिस्टम भी जरूरी है? जवाब- यह पानी की क्वालिटी और उसमें मौजूद टॉक्सिन्स पर निर्भर करता है, जैसेकि- सवाल- क्या RO होने पर टंकी साफ करने की जरूरत नहीं होती? जवाब- RO पानी को साफ करता है, लेकिन पानी की टंकी को साफ नहीं करता। टंकी में समय के साथ धूल, मिट्टी, जंग, शैवाल और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। RO का फिल्टर इन गंदगियों को टंकी में पहुंचने से नहीं रोकता। इसलिए RO लगा होने के बावजूद टंकी की नियमित सफाई जरूरी है। सवाल- क्या सिर्फ सोसायटी की टंकी साफ होना काफी है? जवाब- नहीं, घर की टंकी, पाइपलाइन और RO सिस्टम की सफाई भी उतनी ही जरूरी है। सवाल- किन घरों में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- …………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- बारिश में कपड़ों से आती स्मेल: हो सकती है स्किन एलर्जी, एक्सपर्ट से जानें- बैड स्मेल कैसे भगाएं, कपड़े कैसे रखें फ्रेश बारिश के मौसम में कपड़े ठीक से नहीं सूखते हैं। धूप की कमी और हवा में ज्यादा नमी की वजह से कपड़ों से अजीब स्मेल आने लगती है। कई बार अलमारी में रखे कपड़ों से भी सीलन की स्मेल आती है। पूरी खबर पढ़ें…
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