राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में झमाझम मानसूनी बारिश का दौर लगातार जारी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी ट्रफ के प्रभाव से राजधानी और आसपास के इलाकों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की स्थिति बनी रहेगी।
बारिश के कारण जहां लोगों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली है, वहीं निचले इलाकों में जलभराव और सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम ने आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अगले 3 दिनों तक तेज बारिश और आंधी का अनुमान मौसम विज्ञान विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि मंगलवार को दिनभर घने काले बादल छाए रहेंगे। इस दौरान गरज-चमक के साथ कई दौर की मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।
विभाग के मुताबिक, तेज हवाओं की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। अधिकतम तापमान गिरकर 31 से 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का पूर्वानुमान है।
सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम से थमी रफ्तार लगातार हो रही बारिश के कारण दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम के प्रमुख मार्गों, अंडरपासों और चौराहों पर भारी जलजमाव की स्थिति पैदा हो गई है। आईटीओ, मथुरा रोड, धौला कुआं, आश्रम, कनाट प्लेस और आउटर रिंग रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय नगर निगमों की टीमें पानी निकासी के लिए पंपिंग मशीनों के साथ तैनात हैं, साथ ही यात्रियों को जलभराव वाले मार्गों से बचने की सलाह दी जा रही है।
उड़ानों पर पड़ा असर और गुरुग्राम में वर्क फ्रॉम होम खराब मौसम और कम दृश्यता के चलते दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर विमानों का संचालन भी प्रभावित हुआ है। खराब मौसम के कारण कई उड़ानों को नजदीकी हवाई अड्डों जैसे जयपुर और लखनऊ के लिए डायवर्ट किया गया, जबकि कई उड़ानों में देरी दर्ज की गई।
वहीं गुरुग्राम प्रशासन ने जलभराव और सड़कों पर जाम की स्थिति को देखते हुए कॉरपोरेट कंपनियों और निजी संस्थानों को एहतियात के तौर पर वर्क फ्रॉम होम (WFH) लागू करने की एडवाइजरी जारी की है।
प्रशासन की एडवाइजरी और सुरक्षा के निर्देश
मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भारी बारिश के दौरान आम जनता को पुराने व जर्जर भवनों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने के निर्देश दिए हैं। वाहन चालकों को धीमी गति से चलने और अंडरपास में पानी भरे होने की स्थिति में वहां से न गुजरने की सख्त हिदायत दी गई है।
इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर के सभी संबंधित विभागों को कंट्रोल रूम सक्रिय रखने और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने का आदेश दिया गया है।
आज के समय में कार खरीदते वक्त लोग केवल इंजन, माइलेज या डिजाइन ही नहीं देखते, बल्कि आधुनिक सेफ्टी फीचर्स पर भी खास ध्यान देते हैं। इन्हीं में सबसे चर्चित तकनीक ADAS (Advanced Driver Assistance System) है। यह सिस्टम ड्राइविंग को सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, जितनी तेजी से यह तकनीक लोकप्रिय हो रही है, उतना ही जरूरी है कि इसके काम करने के तरीके और सीमाओं को भी समझा जाए। खासतौर पर भारतीय सड़कों और ट्रैफिक की वास्तविक परिस्थितियों में ADAS हर समय समान प्रदर्शन नहीं कर पाता।
ADAS कैसे करता है काम?
ADAS कई आधुनिक तकनीकों का संयोजन है। इसमें कैमरे, रडार, अल्ट्रासोनिक सेंसर और कुछ मॉडलों में LiDAR जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। ये सिस्टम सड़क की लेन, आगे चल रहे वाहनों, पैदल यात्रियों और अन्य संभावित बाधाओं की लगातार निगरानी करते हैं। किसी खतरे की स्थिति बनने पर यह ड्राइवर को चेतावनी देता है और जरूरत पड़ने पर ब्रेकिंग या स्टीयरिंग में भी सहायता करता है।
भारत की कई सड़कों पर लेन मार्किंग या तो मिट चुकी होती है या फिर साफ दिखाई नहीं देती। ऐसे में लेन कीप असिस्ट और लेन डिपार्चर वार्निंग जैसे फीचर सही तरीके से काम नहीं कर पाते। यदि सिस्टम लेन को पहचानने में असफल हो जाए, तो वह अचानक निष्क्रिय हो सकता है। ऐसी स्थिति में वाहन का पूरा नियंत्रण तुरंत ड्राइवर को संभालना पड़ता है।
अनियमित ट्रैफिक पैटर्न से बढ़ती है मुश्किल
भारतीय ट्रैफिक दुनिया के सबसे जटिल ट्रैफिक सिस्टम में से एक माना जाता है। सड़क पर अचानक बाइक, ऑटो, साइकिल, पैदल यात्री या जानवर आ जाना आम बात है। कई बार ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) ऐसे हालात में जरूरत से पहले ब्रेक लगा देता है, जबकि कुछ स्थितियों में बाधा को सही समय पर पहचानने में भी दिक्कत हो सकती है। इससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।
खराब मौसम में घट सकती है सिस्टम की क्षमता
तेज बारिश, घना कोहरा, धूल या कीचड़ कैमरा और रडार की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। यदि सेंसर सही तरीके से आसपास का वातावरण नहीं देख पाएंगे, तो ADAS फीचर्स अस्थायी रूप से बंद हो सकते हैं या उनकी सटीकता कम हो सकती है। इसलिए खराब मौसम में केवल इस तकनीक पर निर्भर रहना सुरक्षित नहीं माना जाता।
सेंसर की सफाई और रखरखाव भी है जरूरी
कई लोग यह भूल जाते हैं कि ADAS का प्रदर्शन सेंसर और कैमरों की साफ-सफाई पर भी निर्भर करता है। यदि इन पर धूल, कीचड़ या पानी की परत जम जाए तो सिस्टम गलत अलर्ट दे सकता है या काम करना बंद कर सकता है। नियमित सर्विसिंग और सेंसर की जांच इस तकनीक की विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ADAS का सही इस्तेमाल कैसे करें?
ADAS को कभी भी ऑटो-पायलट या पूरी तरह स्वचालित ड्राइविंग सिस्टम न समझें। यह केवल ड्राइवर की सहायता करने वाली तकनीक है। ड्राइविंग के दौरान हमेशा दोनों हाथ स्टीयरिंग पर रखें, सड़क पर पूरा ध्यान दें और वाहन की गति परिस्थितियों के अनुसार नियंत्रित रखें। खराब मौसम, भीड़भाड़ वाले इलाके और ग्रामीण सड़कों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतना सबसे बेहतर विकल्प है।
ADAS आधुनिक कारों की सुरक्षा को नई ऊंचाई देता है और दुर्घटनाओं की संभावना कम करने में मददगार साबित हो सकता है। लेकिन भारतीय सड़कों की वास्तविक परिस्थितियों में इसकी कुछ व्यावहारिक सीमाएं भी हैं। इसलिए इस तकनीक को ड्राइवर का विकल्प नहीं, बल्कि एक स्मार्ट सहायक के रूप में इस्तेमाल करना ही समझदारी है। सुरक्षित ड्राइविंग का सबसे बड़ा आधार आज भी सतर्क और जिम्मेदार चालक ही है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अधिकारी गुरुवार को मुंबई में भारत के हेड कोच, चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर और सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के हेड वीवीएस लक्ष्मण के साथ एक अहम बैठक करेंगे। इस बैठक में टीम के हालिया नतीजों का आकलन किया जाएगा और इंटरनेशनल कैलेंडर के अगले चरण के लिए योजना बनाई जाएगी। इस चर्चा में आयरलैंड और इंग्लैंड में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के साथ-साथ खिलाड़ियों की फिटनेस और चोट के मैनेजमेंट से जुड़ी चिंताओं पर भी बात होगी। बोर्ड के सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने पहले ही संकेत दिया था कि भारत के विदेशी दौरों पर किए गए प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी, हालांकि कुछ कारणों से बैठक टाल दी गई थी, जिनका खुलासा नहीं किया गया है।
हाल ही में, भारत के नतीजों ने उनके 'अवे फ़ॉर्म' (घर से बाहर खेलने के प्रदर्शन) पर सवाल खड़े कर दिए हैं। टीम जून में आयरलैंड में T20I सीरीज़ के दोनों मैच हार गई, जिससे उनकी लगभग तीन साल से चली आ रही 16 सीरीज़ की अजेय रहने की लय टूट गई। इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर भी टीम को और झटके लगे। भारत पांच मैचों की T20I सीरीज़ 4-0 से हार गया, जिसमें नॉटिंघम में 125 रनों की हार भी शामिल थी। इसके बाद उन्होंने बर्मिंघम में पहला वनडे जीता, लेकिन तीन मैचों की सीरीज़ 2-1 से हार गए।
तब से, श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम को ज़िम्बाब्वे में सफलता मिली, और भारत ने श्रीलंका के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ भी जीती, लेकिन वे कोलंबो में दूसरा मैच नहीं जीत पाए, जिसका असर WTC की स्थिति में टीम पर पड़ सकता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल के आखिर में भारत के न्यूज़ीलैंड दौरे को देखते हुए BCCI चाहता है कि कोचिंग स्टाफ़, सेलेक्टर और सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस एक ही प्लान पर काम करें, खासकर 2027 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए। खिलाड़ियों की फिटनेस इस मामले में अहम विषयों में से एक होगी।
अहम दौरों से पहले कई खिलाड़ियों के फ़िटनेस से जुड़ी दिक्कतों का सामना करने के बाद BCCI और सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस की आलोचना हुई है। खिलाड़ियों, सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस और सिलेक्शन कमिटी के बीच बातचीत को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं। एक मामले में, सिलेक्शन कमिटी को कथित तौर पर यह जानकारी नहीं दी गई थी कि जसप्रीत बुमराह फ़िटनेस से जुड़ी दिक्कतों के कारण दौरे के लिए उपलब्ध नहीं हैं। वॉशिंगटन सुंदर भी बाहर हो गए थे, जबकि साई सुदर्शन को ठीक होने में उम्मीद से ज़्यादा समय लगा।
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