महाराष्ट्र: एक स्कूल में परोसे गए खाने में गिरी छिपकली, 31 छात्र अस्पताल में भर्ती
मुंबई, 1 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के चंद्रपुर में एक स्कूल में मंगलवार को दोपहर का खाना खाने के बाद बीमार पड़ने पर 31 छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की जिवती तहसील में स्थित नगरला के अंब्रू नाइक सेकेंडरी आश्रम स्कूल में छात्रों को कथित तौर पर ऐसा खाना परोसा गया, जिसमें खाना पकते समय छिपकली गिर गई थी।
यह खाना छात्रों को मंगलवार को दोपहर करीब 2:30 बजे परोसा गया। बताया जा रहा है कि खाना बनाते समय उसमें गिरी छिपकली पर किसी भी कर्मचारी की नजर नहीं पड़ी।
खाना खाने के कुछ ही देर बाद छात्र बीमार पड़ने लगे। जी मिचलाने, उल्टी, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत के बाद कुल 31 छात्रों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्रभावित छात्रों को तुरंत इलाज के लिए जिवती के प्राथमिकी स्वास्थ केंद्र ले जाया गया। हालांकि, वहां पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं न होने के कारण उन्हें दूसरी जगह रेफर कर दिया गया और बाद में राजुरा के सब-डिस्ट्रिक्ट रूरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
मेडिकल अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती सभी छात्रों की हालत अभी स्थिर है और डॉक्टर उन पर नजर रखे हुए हैं। इस घटना ने आश्रम स्कूल प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसके अलावा, स्कूल प्रशासन के खिलाफ माता-पिता और ग्रामीणों में गुस्सा है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रशासन की लापरवाही के कारण मासूम छात्रों की जान खतरे में पड़ सकती थी।
माता-पिता और स्थानीय लोगों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी कर्मचारियों व संस्थान के प्रशासकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल, शिक्षा विभाग और पुलिस इस मामले की जांच कर रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही यह पता चल पाएगा कि क्या छिपकली गिरने के बावजूद छात्रों को खाना परोसा गया था और इस घटना के लिए किसकी लापरवाही जिम्मेदार है।
साथ ही, आश्रम स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाले खाने की क्वालिटी और सुरक्षा की निगरानी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस तरह की एक घटना में, 22 अगस्त को मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के सांवेर इलाके में एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 30 से ज्यादा बच्चे बीमार पड़ गए थे।
--आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी
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नाबालिग से शादी पॉक्सो के तहत कार्रवाई से नहीं बचा सकती: केरल उच्च न्यायालय
कोच्चि, एक सितंबर केरल उच्च न्यायालय ने 17 वर्षीय एक किशोरी के साथ कई बार दुष्कर्म करने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि भले ही उसकी शादी मुस्लिम धार्मिक रीति-रिवाजों से हुई हो, फिर भी यह उसे पॉक्सो कानून के तहत आपराधिक मामले से नहीं बचाएगा। न्यायमूर्ति जोबिन सेबेस्टियन ने मन्नारक्कड़ पुलिस थाने में दर्ज मामले के पहले आरोपी द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। यह मामला पट्टाम्बी की त्वरित विशेष अदालत में लंबित है।
इंडिपेंडेंट थॉट मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा तय किए गए कानून का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि जो व्यक्ति 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाता है, उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत दुष्कर्म का मुकदमा चलाया जा सकता है, भले ही पीड़िता उसकी पत्नी हो और उसकी उम्र 15 से 18 साल के बीच हो। अदालत ने 19 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘‘इसलिए, इस मामले में आरोपी आईपीसी की धारा 375 के अपवाद 2 की मदद से मुकदमे से बच नहीं सकता।’’ आरोपी के वकील की इन दलीलों को खारिज करते हुए कि किशोरी उसकी कानूनन विवाहिता पत्नी है और उनकी शादी इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार तब हुई थी जब वह 17 साल एक महीने की थी, अदालत ने कहा कि बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम तब लागू होता है जब शादी करने वालों में से कोई एक नाबालिग हो, भले ही शादी पर्सनल लॉ के तहत वैध हो। अदालत ने कहा कि आरोपी शादी के रिश्ते का हवाला देकर कानूनी कार्रवाई से बच नहीं सकता।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘अगर बहस के लिए यह मान भी लिया जाए कि शादी मुस्लिम धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार हुई थी, तो भी इससे याचिकाकर्ता की आपराधिक जवाबदेही खत्म नहीं होगी, खासकर इसलिए क्योंकि कथित शादी और उसके बाद हुए यौन अपराधों के समय लड़की की उम्र 17 साल थी।’’ अदालत ने कहा, ‘‘इसमें कोई शक नहीं कि अगर शादी करने वाले जोड़े में से कोई एक नाबालिग है, तो पॉक्सो अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे, भले ही पर्सनल लॉ के तहत शादी वैध हो या नहीं।’’ आरोपी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 528 के तहत कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 23 अक्टूबर 2021 को आरोपी किशोरी को कार में अपने घर ले गया और 23 से 26 अक्टूबर के बीच कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। दूसरे और तीसरे आरोपी ने कथित तौर पर इस अपराध में मदद की।
अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि किशोरी के माता-पिता को पहले आरोपी द्वारा किए गए कथित अपराध के बारे में पता होने के बावजूद, उन्होंने न तो उसे मायके वापस बुलाया और न ही अधिकारियों को इस मामले की सूचना दी।
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