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SC से छात्रों को बड़ी राहत! सरकार ने FIR रद्द करने के फैसले का किया स्वागत, नड्डा बोले- छात्रों का भविष्य प्राथमिकता

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले का स्वागत किया जिसमें देश भर में छात्र प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ 20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज सभी FIR को रद्द कर दिया गया है। यह फ़ैसला 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा 5 सितंबर को अपना मार्च वापस लेने के बाद आया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, नड्डा ने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार शिक्षा सुधारों को लेकर CJP की सभी मांगों को पूरा करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं का उत्थान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
 

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नड्डा ने कहा कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, हमने भारत सरकार की ओर से भरोसा दिलाया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे और भविष्य में उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी क्रम में, हमने बीजेपी शासित राज्यों की सरकारों से भी बातचीत की और अब हम उस वादे को पूरा कर रहे हैं। इससे पहले NEET परीक्षा विवाद को लेकर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों को बड़ी राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया और उनके खिलाफ देश भर में दर्ज FIR को रद्द कर दिया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि सिर्फ विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अपने आप में कोई अपराध नहीं है। बेंच ने यह भी कहा कि जिन लोगों पर शारीरिक नुकसान पहुंचाने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप है, उनके खिलाफ कार्रवाई करने की राज्य की छूट बनी रहेगी। साथ ही, कोर्ट ने कहा कि उसके ये निर्देश फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी से जुड़ी लंबित संवैधानिक चुनौती पर कोई असर नहीं डालेंगे।
 

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शुरुआत में, केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सरकार विरोध-प्रदर्शन की उन खास घटनाओं से जुड़ी FIR पर आगे नहीं बढ़ेगी और उन्हीं घटनाओं के लिए कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार मुआवज़े के अपने वादे पर कायम है और राज्यों व अन्य संबंधित पक्षों से बातचीत करके मुआवज़े के तौर-तरीके तय किए जाएंगे।
 
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बच्ची तस्करी मामले में मुख्य आरोपी को न पकड़ने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस को फटकारा

नयी दिल्ली, एक सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक बच्ची की तस्करी के 2024 के मामले में मुख्य आरोपी बताई जा रही एक नर्स को गिरफ्तार नहीं किए जाने को लेकर पुलिस को फटकार लगाई और कहा कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के मामले में ‘‘चुनिंदा रवैया’’ नहीं अपना सकती। न्यायमूर्ति गिरिश कठपालिया ने मामले में एक सह-आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि अदालत राज्य की उस नीति को मंजूरी नहीं दे सकती जिसमें केवल कुछ आरोपियों को चुनिंदा तरीके से गिरफ्तार किया जाए। मामले में मौजूदा याचिकाकर्ता ने एक अन्य आरोपी के साथ कथित तौर पर पति-पत्नी बनकर एक नवजात बच्ची को गोद लिया था।

बाद में बच्ची को एक अन्य सह-आरोपी को बेच दिया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और मुख्य आरोपी नर्स कुलविंदर कौर को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। अदालत ने 31 अगस्त को पारित आदेश में कहा, ‘‘राज्य द्वारा कुछ आरोपियों को चुनिंदा तरीके से गिरफ्तार करने की नीति को मंजूर नहीं किया जा सकता।

पुलिस को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वह किसी आरोपी को गिरफ्तार करना चाहती है या नहीं। अदालत पुलिस को ऐसा करने या नहीं करने का निर्देश नहीं दे सकती। गिरफ्तारी के मामले में इस तरह का चुनिंदा रवैया निंदनीय है।’’ अदालत ने जांच अधिकारी से कौर की स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

उसने कहा कि इस मामले में शामिल आरोपियों की ‘‘चुनिंदा गिरफ्तारी’’ का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है और पुलिस उसके खिलाफ व्यावहारिक रूप से कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। अभियोजन पक्ष के वकील ने कहा कि कौर ‘‘बिना पात्रता वाली नर्स’’ है और आश्वासन दिया कि उसे गिरफ्तार किया जाएगा। न्यायमूर्ति कठपालिया ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि अब राज्य को कथित अपराध की गंभीरता का एहसास हुआ है।

मेरा स्पष्ट मत है कि केवल इसलिए कि पुलिस ने किसी अज्ञात कारण से किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं करने का फैसला किया, अदालत कथित अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं कर सकती।’’ अदालत ने संबंधित पुलिस उपायुक्त को बच्ची को जल्द से जल्द बरामद कराने का निर्देश दिया और चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री से पता चलता है कि परिवार में छठी संतान रही नवजात बच्ची को मौजूदा याचिकाकर्ता ने बेच दिया था। अदालत ने कहा कि तस्वीरों में उसे उसके जैविक माता-पिता की मौजूदगी में बच्ची को लेते हुए देखा जा सकता है।

अदालत ने कहा कि उसने यह भी स्वीकार किया है कि फिलहाल बच्ची उसके पास नहीं है। अदालत ने कहा कि जब बच्ची को उसके जैविक माता-पिता, खासकर मां से अलग किया जाता है और फिर उसे दूसरे लोगों के पास भेजा जाता है तो उसके मन पर ‘‘गहरा मानसिक आघात’’ पड़ता है। अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी की भूमिका ‘‘अत्यंत चौंकाने वाली’’ है और यह उसे हिरासत से रिहा करने के लिए उपयुक्त मामला नहीं है।

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BCCI की रीव्यू मीटिंग में होगा बवाल, चोटिल खिलाड़ियों की बढ़ती संख्या पर होगी चर्चा, जडेजा-रोहित के लिए भी बड़ा दिन

review meeting: न्यूजीलैंड का दौरा अक्टूबर-नवंबर में निर्धारित है. चोट से संबंधित समय-सीमा भारतीय क्रिकेट में नवीनतम घटनाक्रमों पर नज़र रखने वाले कहते हैं कि अगरकर और गंभीर बेंगलुरु स्थित सीओई में पुनर्वास से गुजर रहे घायल केंद्रीय अनुबंधित और लक्षित खिलाड़ियों पर कुछ बहुत विशिष्ट प्रश्न पूछ सकते हैं . Wed, 2 Sep 2026 17:58:37 +0530

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