असम में बाढ़ पीड़ितों को मिली राहत, 16,746 परिवारों को 25.12 करोड़ रुपये बांटे गए
गुवाहाटी, एक सितंबर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को कहा कि इस वर्ष राज्य के तीन जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण प्रभावित 16,746 परिवारों के खाते में अंतरिम राहत के रूप में कुल 25.12 करोड़ रुपये अंतरित किए गए हैं। शर्मा ने बताया कि शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिलों के प्रत्येक बाढ़ पीड़ित परिवार को 15-15 हजार रुपये प्राप्त हुए हैं। शर्मा ने इस मौके पर कहा कि असम हर साल बाढ़ का सामना करता है, लेकिन इस बार राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए एक नया मापदंड स्थापित किया है।
उन्होंने दावा किया कि ऐसी पहल पहले कभी देखने को नहीं मिली। उन्होंने कहा, ‘‘राज्य के राजस्व विभाग ने प्रभावित लोगों के राहत और पुनर्वास के लिए एक नया मानक स्थापित किया है। इसके प्रयासों से न केवल उन्हें मदद मिली है, बल्कि यह भी सुनिश्चित हुआ है कि वे जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कुल 1,75 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान से 1,17,095 परिवारों को एकमुश्त अंतरिम सहायता प्रदान कर रही है।
शर्मा ने कहा कि शिवसागर और चराईदेव जिलों में ‘ओरुनोदोई’ योजना के तहत महिला लाभार्थियों को सितंबर में 2,000 रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘आमतौर पर प्रत्येक लाभार्थी को प्रति माह 1,250 रुपये मिलते हैं, लेकिन बाढ़ प्रभावित जिलों शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट में पिछले माह प्रत्येक को 2,500-2,500 रुपये दिए गए थे।’’ शर्मा ने कहा कि सरकार ने अब तक स्कूलों की मरम्मत के लिए 15 करोड़ रुपये, आंगनबाड़ियों के लिए 11 करोड़ रुपये और ‘नामघरों’ (वैष्णव मठों) के लिए 16 करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित चार जिलों में 405 सड़कों और जलआपूर्ति की 244 परियोजनाओं की मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मरम्मत और बहाली कार्यों के लिए अब तक कुल 300 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि नुकसान का पूरा आकलन होने के बाद राहत और पुनर्वास कार्यों पर खर्च 1,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमें आश्वासन दिया है कि प्रभावित लोगों के हित पर खर्च करने के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी।’’ नुकसान के आकलन पर शर्मा ने बताया कि 1,182 शिक्षकों ने एक डिजिटल सर्वेक्षण किया था, जिसमें बाढ़ से प्रभावित 95,545 परिवारों की पहचान की गई।
उन्होंने कहा कि बाढ़ के नुकसान के आकलन के लिए दूसरा चरण सितंबर में होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बाढ़ के कारण बैंकों से उन लोगों को ऋण भुगतान में छूट देने को कहा गया था, जिन्होंने कर्ज लिया था। शर्मा ने कहा, ‘‘कुल 14,227 बाढ़ पीड़ितों ने छूट के लिए आवेदन किया और बैंकों ने अब तक इनमें से 13,943 लोगों को यह सुविधा प्रदान की है।’’ बीमा दावों के संबंध में शर्मा ने कहा कि चार सबसे गंभीर रूप से प्रभावित जिलों में अब तक कुल 2,728 परिवारों को इसका लाभ मिला है।
शर्मा ने जापानी प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए ‘मुख्यमंत्री फॉरेन लैंग्वेज इनिशिएटिव फॉर ग्लोबल हंट’ के तहत भी धनराशि जारी की। प्रत्येक चयनित उम्मीदवार को प्रशिक्षण सहायता के रूप में तीन किस्तों में एक लाख रुपये दिए जाएंगे, साथ ही नौकरी मिलने के बाद सहायता के रूप में प्रति उम्मीदवार 50,000 रुपये प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने ‘मुख्यमंत्री जीवन प्रेरणा योजना’ के तहत सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वालों को भी वित्तीय सहायता वितरित की।
शर्मा ने बताया कि 48,188 उम्मीदवारों को कुल 118.6 करोड़ रुपये वितरित किए जाएंगे, जिसमें से प्रत्येक उम्मीदवार को एक वर्ष तक प्रति माह 2,500 रुपये मिलेंगे।
राजस्थान में युवाओं को साधने के लिए कांग्रेस का 'जेन-जी फॉर चेंज' अभियान शुरू
जयपुर, एक सितंबर कांग्रेस की राजस्थान इकाई ने राज्य में आगामी शहरी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों से पहले युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने और विद्यार्थियों को शिक्षा, रोजगार, कौशल तथा करियर के अवसरों से जुड़े मुद्दों पर जोड़ने के लिए ‘जेन-जी फॉर चेंज’ अभियान शुरू किया है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सोशल मीडिया एवं डिजिटल मंच विभाग ने इस अभियान के लिए राज्य स्तर पर पेशेवर ‘जेन-जी’ समिति का भी गठन किया है। विभाग के अध्यक्ष सुमित भगासरा ने बताया कि इस पहल के तहत विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया जाएगा और उनकी चिंताओं, आकांक्षाओं तथा सुझावों को समझने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ‘जेन-जी’ युवा अपनी पीढ़ी की जरूरतों और चिंताओं को बेहतर तरीके से व्यक्त करने की स्थिति में हैं, तथा शिक्षा की गुणवत्ता, सीमित रोजगार अवसर, कौशल की कमी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसे मुद्दे उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। भगासरा ने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों से संवाद कर रहे हैं और राजस्थान में नई पहल के जरिए इस तरह के संपर्क को और व्यापक बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा, “अभियान के तहत विभाग कौशल विकास और करियर मार्गदर्शन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहा है।” भगासरा ने बताया कि अभियान को पूरे राज्य में विस्तार देने के लिए जिला स्तर पर भी इसी तरह की ‘जेन-जी’ समितियां गठित की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि ये समितियां कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ‘जेन-जी’ विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद करेंगी तथा उनकी समस्याओं एवं सुझावों को राज्य स्तर तक पहुंचाने का काम करेंगी। ‘जेन जी’ उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है। यह वह युवा वर्ग है जो तकनीक, इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बड़ा हुआ है।
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