जयपुर, एक सितंबर कांग्रेस की राजस्थान इकाई ने राज्य में आगामी शहरी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों से पहले युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने और विद्यार्थियों को शिक्षा, रोजगार, कौशल तथा करियर के अवसरों से जुड़े मुद्दों पर जोड़ने के लिए ‘जेन-जी फॉर चेंज’ अभियान शुरू किया है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सोशल मीडिया एवं डिजिटल मंच विभाग ने इस अभियान के लिए राज्य स्तर पर पेशेवर ‘जेन-जी’ समिति का भी गठन किया है। विभाग के अध्यक्ष सुमित भगासरा ने बताया कि इस पहल के तहत विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया जाएगा और उनकी चिंताओं, आकांक्षाओं तथा सुझावों को समझने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ‘जेन-जी’ युवा अपनी पीढ़ी की जरूरतों और चिंताओं को बेहतर तरीके से व्यक्त करने की स्थिति में हैं, तथा शिक्षा की गुणवत्ता, सीमित रोजगार अवसर, कौशल की कमी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसे मुद्दे उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। भगासरा ने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों से संवाद कर रहे हैं और राजस्थान में नई पहल के जरिए इस तरह के संपर्क को और व्यापक बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा, “अभियान के तहत विभाग कौशल विकास और करियर मार्गदर्शन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहा है।”
भगासरा ने बताया कि अभियान को पूरे राज्य में विस्तार देने के लिए जिला स्तर पर भी इसी तरह की ‘जेन-जी’ समितियां गठित की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि ये समितियां कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ‘जेन-जी’ विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद करेंगी तथा उनकी समस्याओं एवं सुझावों को राज्य स्तर तक पहुंचाने का काम करेंगी। ‘जेन जी’ उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है। यह वह युवा वर्ग है जो तकनीक, इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बड़ा हुआ है।
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दिल्ली में प्याज की बढ़ती कीमतों और उसकी उपलब्धता को लेकर चिंता के बीच, सरकार ने ग्राहकों को राहत देने के लिए कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार राजधानी में 1,000 मीट्रिक टन प्याज़ की सप्लाई करेगी, जिसे उचित मूल्य वाली दुकानों (फेयर प्राइस शॉप्स) के ज़रिए ₹35 प्रति किलो के भाव पर बेचा जाएगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार प्याज़ की कीमतों और उपलब्धता पर बारीकी से नज़र रख रही है और राजधानी में प्याज़ की कोई कमी नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद यह पक्का करना है कि लोगों को ज़रूरी खाने-पीने की चीज़ें किफायती दामों पर मिलती रहें।
सब्सिडी वाले प्याज़ को ज़्यादा लोगों तक पहुँचाने के लिए, सरकार दिल्ली के सभी 13 ज़िलों में एक-एक मोबाइल वैन भी तैनात करेगी। ये वैन अलग-अलग इलाकों में जाकर ₹35 प्रति किलो के भाव पर प्याज़ बेचेंगी, जिससे खासकर उन लोगों को मदद मिलेगी जिनकी उचित मूल्य वाली दुकानों तक आसान पहुँच नहीं है। इस कदम का मकसद पूरे शहर में किफायती प्याज़ की उपलब्धता बढ़ाना और यह पक्का करना है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग सरकार की इस पहल का फ़ायदा उठा सकें।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार स्थिति पर नज़र रखेगी और प्याज़ की कमी या कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठाएगी। केंद्र सरकार के 1,000 मीट्रिक टन प्याज़ की सप्लाई करने के फ़ैसले से प्याज़ की उपलब्धता बेहतर होने और दिल्ली के ग्राहकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इससे पहले, 25 अगस्त को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली में प्याज़ और चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर एक समीक्षा बैठक हुई थी। बैठक में यह बात सामने आई कि राजधानी में अभी प्याज़ या चीनी की कोई कमी नहीं है। हालाँकि, अगर कीमतें और बढ़ती हैं, तो दिल्ली सरकार यह पक्का करेगी कि लोगों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, ऐसी स्थिति में सरकार केंद्र सरकार की संस्था 'नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड' (NAFED) से प्याज़ और चीनी खरीदेगी और उन्हें राजधानी में अलग-अलग जगहों पर उपलब्ध कराने का इंतज़ाम करेगी। ये चीज़ें उसी कीमत पर बेची जाएंगी जिस कीमत पर इन्हें NAFED से खरीदा जाएगा, जबकि ट्रांसपोर्ट और दूसरे संबंधित खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। CMO ने कहा कि विभाग से कहा गया है कि वह दिल्ली में आने वाले प्याज़ की सप्लाई पर नज़र रखने, यह पक्का करने कि वह बाज़ार तक सही ढंग से पहुँचे और जमाखोरी रोकने के लिए इंतज़ाम करे, साथ ही ज़रूरत पड़ने पर ज़रूरी कार्रवाई भी करे।
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