Miss World की चमक के बाद कहां गायब हो गईं ये हसीनाएं? कभी सिर पर सजा था ताज, अब हैं लाइमलाइट से बेहद दूर
Miss World: भारत की खूबसूरत और टैलेंटेड महिलाओं ने इंटरनेशनल ब्यूटी पेजेंट्स में देश का नाम कई बार रोशन किया है. खासकर Miss World के मंच पर भारत का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है. रीता फारिया से लेकर ऐश्वर्या राय, डायना हेडन, युक्ता मुखी, प्रियंका चोपड़ा और मानुषी छिल्लर तक कई भारतीय हसीनाएं इस सम्मानित खिताब को अपने नाम कर चुकी हैं. भारत ने अब तक 6 बार मिस वर्ल्ड का ताज जीता है. इनमें से कुछ विनर्स ने ताज जीतने के बाद फिल्मों और ग्लैमर की दुनिया में ऐसी पहचान बनाई कि आज भी उनका नाम दुनियाभर में जाना जाता है. ऐश्वर्या राय और प्रियंका चोपड़ा इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं. लेकिन कुछ ऐसी मिस वर्ल्ड विनर्स भी हैं, जो ताज जीतने के बाद धीरे-धीरे फिल्मों और मीडिया की चकाचौंध से दूर होती चली गईं. आइए जानते हैं उनके बारे में...
डायना हेडन
साल 1997 में डायना हेडन ने मिस वर्ल्ड का खिताब जीतकर भारत का नाम रोशन किया था. वो मिस वर्ल्ड जीतने वाली भारत की तीसरी महिला बनी थीं. खास बात ये है कि उन्होंने इस प्रतियोगिता में तीन सब-टाइटल भी अपने नाम किए थे. मिस वर्ल्ड बनने के बाद डायना ने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने लंदन जाकर रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट और ड्रामा स्टूडियो लंदन में अभिनय की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ टेलीविजन होस्टिंग भी की.
डायना ने 2001 में स्क्रीन पर डेब्यू किया और बाद में टेलीविजन पर भी नजर आईं. हालांकि, उन्हें बॉलीवुड में वो सफलता नहीं मिल पाई, जिसकी उम्मीद आमतौर पर मिस वर्ल्ड का ताज जीतने वाली किसी खूबसूरती से की जाती है. धीरे-धीरे उन्होंने ग्लैमर इंडस्ट्री से दूरी बना ली और अपनी निजी जिंदगी तथा दूसरे कामों पर ध्यान देने लगीं. आज डायना पहले की तरह फिल्मों और बॉलीवुड पार्टियों में नजर नहीं आतीं. वो शादीशुदा हैं और तीन बच्चों की मां हैं. साथ ही वो अलग-अलग सामाजिक और प्रोफेशनल एक्टिविटीज से भी जुड़ी रही हैं.
युक्ता मुखी
साल 1999 में युक्ता मुखी ने मिस वर्ल्ड का ताज जीतकर भारत को प्राउड किया था. वो ये खिताब जीतने वाली भारत की चौथी महिला बनी थीं. मिस वर्ल्ड बनने के बाद युक्ता ने फिल्मों में करियर बनाने की कोशिश की. उन्होंने तमिल फिल्म से एक्टिंग की शुरुआत की और इसके बाद हिंदी फिल्म ‘प्यासा’ में नजर आईं. लेकिन उनकी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर खास सफलता नहीं मिली. ‘प्यासा’ के बाद भी उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिले, लेकिन उनका फिल्मी करियर ज्यादा आगे नहीं बढ़ सका.
युक्ता ने हिंदी के अलावा रीजनल फिल्म्स में भी काम किया, लेकिन वो इंडस्ट्री में लंबे समय तक अपनी जगह नहीं बना पाईं. उनकी आखिरी चर्चित फिल्मी मौजूदगी लंबे अंतराल के बाद ‘गुड न्यूज़’ में बताई जाती है. इसके बाद वो लाइमलाइट से काफी दूर हो गईं. उनकी निजी जिंदगी भी काफी चर्चा में रही. 2008 में उन्होंने बिजनेसमैन प्रिंस तुली से शादी की थी. बाद में दोनों के रिश्ते में विवाद हुआ और 2013 में युक्ता ने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा के आरोपों को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद दोनों अलग हो गए. हालांकि, एक्टिंग से दूर होने के बाद युक्ता पूरी तरह इनएक्टिव नहीं हुईं. वो सामाजिक और चैरिटी से जुड़े कामों में भी सक्रिय रही हैं. खुद युक्ता ने बाद में मिस वर्ल्ड के ताज को सामाजिक मुद्दों पर काम करने के लिए एक प्लेटफॉर्म बताया था.
रीता फारिया
भारत की पहली मिस वर्ल्ड रीता फारिया थीं. उन्होंने 1966 में ये खिताब जीतकर इतिहास रचा था. वो मिस वर्ल्ड का ताज जीतने वाली पहली भारतीय और पहली एशियाई महिला बनी थीं. रीता फारिया ने मिस वर्ल्ड बनने के बाद सीधे बॉलीवुड का रुख करने के बजाय अपनी मेडिकल पढ़ाई को प्राथमिकता दी. यही वजह है कि उनका सफर ऐश्वर्या या प्रियंका जैसा फिल्मी नहीं रहा. वो डॉक्टर बनीं और बाद में अपनी निजी जिंदगी में व्यस्त हो गईं. यही कारण है कि आज की युवा पीढ़ी उन्हें फिल्मों की एक्ट्रेस के तौर पर नहीं, बल्कि भारत की पहली मिस वर्ल्ड के रूप में ज्यादा जानती है.
भारतीय रेलवे ने ट्रैक पर कवच सिस्टम की तैनाती के लिए 170 करोड़ रुपए मंजूर किए
नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे ने कवच 4.0 सिस्टम की तैनाती के लिए 170 करोड़ रुपए को मंजूरी दी है। इसके तहत उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद डिवीजन के 712 रूट किलोमीटर के बाकी बचे हिस्सों पर कचव सिस्टम लगाया जाएगा। यह जानकारी सरकार की ओर से मंगलवार को दी गई।
रेल मंत्रालय के बयान के अनुसार, मंजूर की गई राशि से स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाकर डिवीजन के सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि कवच 4.0 को लागू करने से चिन्हित सेक्शन में ट्रेन संचालन के लिए सुरक्षा की एक एडवांस्ड लेयर मिलेगी।
कवच देश में ही विकसित एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) सिस्टम है, जिसे ऑपरेशनल सुरक्षा बढ़ाने के लिए बनाया गया है। यह सिग्नल पासिंग एट डेंजर (एसपीएडी) को रोकने में मदद करता है, असुरक्षित स्थितियों से बचने के लिए जरूरत पड़ने पर अपने-आप ब्रेक लगाता है, मुश्किल हालात में ट्रेन की स्पीड को कंट्रोल करता है और ट्रेनों की टक्कर का खतरा काफी कम करता है।
बयान में कहा गया है, यह पहल भारतीय रेलवे की उस लगातार कोशिश का हिस्सा है जिसके तहत वह अपने नेटवर्क पर कवच का दायरा बढ़ा रही है और रेलवे सिग्नलिंग व ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को आधुनिक बना रही है।
मंत्रालय ने जुलाई में बताया था कि भारतीय रेलवे में सुरक्षा में काफी सुधार हुआ है। ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 2014–15 में 135 से घटकर 2025–26 में 16 रह गई है और चालू वर्ष में जून तक केवल दो दुर्घटनाएं हुई हैं।
कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स (यानी प्रति मिलियन ट्रेन-किलोमीटर होने वाली दुर्घटनाएं) 2014–15 में 0.11 से घटकर 2025–26 में 0.01 हो गया है, जो लगभग 91 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है।
सुरक्षा से जुड़े कामों पर खर्च लगातार बढ़ा है; यह 2013–14 में 39,200 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026–27 में 1,20,389 करोड़ रुपए हो गया है।
6,671 स्टेशनों पर सेंट्रलाइज़्ड ऑपरेशन वाले इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाए गए हैं और इन सभी स्टेशनों पर पूरा ट्रैक सर्किटिंग सिस्टम भी लगाया गया है। लेवल क्रॉसिंग (एलसी) गेट्स पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए 10,395 एलसी गेट्स पर इंटरलॉकिंग की सुविधा दी गई है।
--आईएएनएस
एबीएस
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