Responsive Scrollable Menu

Explainer: होर्मुज में ईरान की नई चाल से डरा अमेरिका? रॉकेट से समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने का दावा कितना सच

US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. अमेरिका ने रविवार को ईरान के लारक द्वीप पर हमला किया. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यहां मौजूद ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि ईरान इनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए कर सकता था.

अमेरिका का दावा है कि ईरान की इस गतिविधि का मकसद होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा करना था. हालांकि, कुछ सैन्य विशेषज्ञों को अमेरिका का यह दावा पूरी तरह भरोसेमंद नहीं लगता. उनका कहना है कि रॉकेट से समुद्री खदानें बिछाना सामान्य तरीका नहीं है. अमेरिका लगता ईरान के खात्मे का दावा कर रहा है. अमेरिका कहना है कि ईरान पूरी तरह बर्बाद हो चुका है. वहीं अब अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिए हैं. 

अमेरिका को किस बात का डर था?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है. यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है. ऐसे में अगर इस इलाके में बड़ी संख्या में समुद्री खदानें बिछा दी जाएं, तो जहाजों की आवाजाही बेहद मुश्किल हो सकती है. अमेरिकी सेना के मुताबिक, उसे जानकारी मिली थी कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) समुद्री खदानों को रॉकेट के जरिए लॉन्च करने की तैयारी कर रही थी. इसी खतरे को रोकने के लिए अमेरिका ने लारक द्वीप पर मौजूद रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया.

यह भी पढ़ें: Russia Attack: रूस का यूक्रेन का राजधानी कीव पर ड्रोन हमला, भारतीय नागरिक समेत 12 लोगों की मौत

 

क्या ईरान पहले भी ऐसा कर चुका है?

यही बात अमेरिका के दावे को कुछ हद तक दिलचस्प बनाती है. ईरान ने जनवरी 2025 में एक सैन्य अभ्यास के दौरान ऐसी तकनीक का प्रदर्शन किया था, जिसमें ऐसा दिखाई दिया कि फजर-5 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम की मदद से समुद्र में बारूदी सुरंगें बिखेरी जा रही हैं. फजर-5 मूल रूप से जमीन पर मौजूद लक्ष्यों पर रॉकेट हमला करने के लिए बनाया गया है. लेकिन ईरान ने इसे अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करने की कोशिश की. यही ईरान की सैन्य रणनीति की खासियत मानी जाती है, वह हमेशा महंगे और पारंपरिक हथियारों पर निर्भर रहने के बजाय मौजूदा हथियारों को नए तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश करता है.

रॉकेट से खदानें कैसे बिछाई जा सकती हैं?

सैद्धांतिक रूप से रॉकेट के अंदर पारंपरिक विस्फोटक वारहेड की जगह छोटी समुद्री खदानें रखी जा सकती हैं. रॉकेट तय इलाके तक पहुंचने के बाद इन खदानों को हवा में छोड़ सकता है. खदानों की गिरने की गति कम करने के लिए पैराशूट या दूसरी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके बाद ये खदानें समुद्र में गिरकर पानी के अंदर अपनी जगह बना सकती हैं. इस तरह एक रॉकेट के जरिए एक साथ बड़ी संख्या में खदानें फैलाने की कोशिश की जा सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यह तरीका आसान या पूरी तरह साबित तकनीक है. अमेरिकी नौसेना के कुछ पूर्व अधिकारियों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि तेज गति से पानी में गिरने वाला रॉकेट खदानों को नुकसान पहुंचा सकता है.

यह भी पढ़ें: Ground Report: रसुवा में सैलाब का तांडव: बर्बादी के बीच थमी घड़ी की सुइयां, ग्राउंड जीरो से खौफनाक तस्वीरें

 

ईरान के लिए होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के ऊर्जा कारोबार के लिए इसकी अहमियत बहुत ज्यादा है. अगर यहां समुद्री खदानें बिछाई जाती हैं, तो उनका असर सिर्फ सैन्य जहाजों पर नहीं बल्कि तेल टैंकरों और दूसरे व्यापारिक जहाजों पर भी पड़ सकता है. यही वजह है कि अमेरिका के लिए इस इलाके में किसी भी तरह की माइनिंग गतिविधि गंभीर खतरा मानी जा रही है.

 

समुद्री खदानों को हटाना भी आसान नहीं

समुद्र में खदानें बिछाने के बाद उन्हें हटाना काफी मुश्किल और धीमा काम होता है. अमेरिकी नौसेना इसके लिए विशेष माइन-काउंटरमेजर जहाजों और दूसरे उपकरणों का इस्तेमाल करती है. पहले खदान का पता लगाया जाता है और फिर उसे नियंत्रित तरीके से नष्ट किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है. इस दौरान जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है. यानी ईरान के लिए समुद्री खदानों का इस्तेमाल केवल हमला करने का तरीका नहीं, बल्कि समुद्री रास्ते को लंबे समय तक बाधित करने की रणनीति भी हो सकती है.

यह भी पढ़ें: 'ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, अगर होते तो...', राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा दावा

क्या अमेरिका खुद भी हवाई या दूर से खदानें बिछा सकता है?

हां, अमेरिका के पास भी समुद्र में दूर से खदानें तैनात करने की क्षमता है. अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ऐसे हथियारों का इस्तेमाल कर सकती हैं जिन्हें विमान से समुद्र में गिराया जाता है. इनमें गाइडेंस सिस्टम भी लगाए जा सकते हैं, जिससे उन्हें ज्यादा सटीक तरीके से निर्धारित इलाके में पहुंचाया जा सके. यानी समुद्री माइनिंग सिर्फ ईरान की रणनीति नहीं है. आधुनिक युद्ध में कई देश दूर से समुद्री खदानें तैनात करने की तकनीक विकसित कर रहे हैं.

असली चिंता क्या है?

पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान पारंपरिक हथियारों को अलग तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश करता रहा है. फजर-5 जैसे रॉकेट मूल रूप से समुद्री खदानें बिछाने के लिए नहीं बनाए गए थे. लेकिन अगर इन्हें इस काम के लिए बदला जाता है, तो ईरान कम लागत में समुद्र के बड़े इलाके को खतरे में डालने की कोशिश कर सकता है. यही वजह है कि अमेरिका ने लारक द्वीप पर मौजूद रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया.

हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि ईरान वास्तव में मौजूदा तनाव के दौरान रॉकेटों से समुद्री खदानें बिछा रहा था या नहीं. अमेरिका के दावे और सैन्य विशेषज्ञों की राय में इस मुद्दे पर मतभेद हैं. लेकिन इतना जरूर है कि होर्मुज में समुद्री खदानों का खतरा अमेरिका के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि यहां छोटी-सी रुकावट भी वैश्विक तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार पर बड़ा असर डाल सकती है.

यह भी पढ़ें: Explainer: अब कंगाल हो जाएगा ईरान? खार्ग द्वीप के तबाह होने से तेल निर्यात पर लगेगा ब्रेक, अब क्या बचे विकल्प

 

Continue reading on the app

Miss World की चमक के बाद कहां गायब हो गईं ये हसीनाएं? कभी सिर पर सजा था ताज, अब हैं लाइमलाइट से बेहद दूर

Miss World: भारत की खूबसूरत और टैलेंटेड महिलाओं ने इंटरनेशनल ब्यूटी पेजेंट्स में देश का नाम कई बार रोशन किया है. खासकर Miss World के मंच पर भारत का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है. रीता फारिया से लेकर ऐश्वर्या राय, डायना हेडन, युक्ता मुखी, प्रियंका चोपड़ा और मानुषी छिल्लर तक कई भारतीय हसीनाएं इस सम्मानित खिताब को अपने नाम कर चुकी हैं. भारत ने अब तक 6 बार मिस वर्ल्ड का ताज जीता है. इनमें से कुछ विनर्स ने ताज जीतने के बाद फिल्मों और ग्लैमर की दुनिया में ऐसी पहचान बनाई कि आज भी उनका नाम दुनियाभर में जाना जाता है. ऐश्वर्या राय और प्रियंका चोपड़ा इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं. लेकिन कुछ ऐसी मिस वर्ल्ड विनर्स भी हैं, जो ताज जीतने के बाद धीरे-धीरे फिल्मों और मीडिया की चकाचौंध से दूर होती चली गईं. आइए जानते हैं उनके बारे में...

डायना हेडन

साल 1997 में डायना हेडन ने मिस वर्ल्ड का खिताब जीतकर भारत का नाम रोशन किया था. वो मिस वर्ल्ड जीतने वाली भारत की तीसरी महिला बनी थीं. खास बात ये है कि उन्होंने इस प्रतियोगिता में तीन सब-टाइटल भी अपने नाम किए थे. मिस वर्ल्ड बनने के बाद डायना ने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने लंदन जाकर रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट और ड्रामा स्टूडियो लंदन में अभिनय की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ टेलीविजन होस्टिंग भी की. 

डायना ने 2001 में स्क्रीन पर डेब्यू किया और बाद में टेलीविजन पर भी नजर आईं. हालांकि, उन्हें बॉलीवुड में वो सफलता नहीं मिल पाई, जिसकी उम्मीद आमतौर पर मिस वर्ल्ड का ताज जीतने वाली किसी खूबसूरती से की जाती है. धीरे-धीरे उन्होंने ग्लैमर इंडस्ट्री से दूरी बना ली और अपनी निजी जिंदगी तथा दूसरे कामों पर ध्यान देने लगीं. आज डायना पहले की तरह फिल्मों और बॉलीवुड पार्टियों में नजर नहीं आतीं. वो शादीशुदा हैं और तीन बच्चों की मां हैं. साथ ही वो अलग-अलग सामाजिक और प्रोफेशनल एक्टिविटीज से भी जुड़ी रही हैं.

युक्ता मुखी

साल 1999 में युक्ता मुखी ने मिस वर्ल्ड का ताज जीतकर भारत को प्राउड किया था. वो ये खिताब जीतने वाली भारत की चौथी महिला बनी थीं. मिस वर्ल्ड बनने के बाद युक्ता ने फिल्मों में करियर बनाने की कोशिश की. उन्होंने तमिल फिल्म से एक्टिंग की शुरुआत की और इसके बाद हिंदी फिल्म ‘प्यासा’ में नजर आईं. लेकिन उनकी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर खास सफलता नहीं मिली. ‘प्यासा’ के बाद भी उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिले, लेकिन उनका फिल्मी करियर ज्यादा आगे नहीं बढ़ सका.

युक्ता ने हिंदी के अलावा रीजनल फिल्म्स में भी काम किया, लेकिन वो इंडस्ट्री में लंबे समय तक अपनी जगह नहीं बना पाईं. उनकी आखिरी चर्चित फिल्मी मौजूदगी लंबे अंतराल के बाद ‘गुड न्यूज़’ में बताई जाती है. इसके बाद वो लाइमलाइट से काफी दूर हो गईं. उनकी निजी जिंदगी भी काफी चर्चा में रही. 2008 में उन्होंने बिजनेसमैन प्रिंस तुली से शादी की थी. बाद में दोनों के रिश्ते में विवाद हुआ और 2013 में युक्ता ने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा के आरोपों को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद दोनों अलग हो गए. हालांकि, एक्टिंग से दूर होने के बाद युक्ता पूरी तरह इनएक्टिव नहीं हुईं. वो सामाजिक और चैरिटी से जुड़े कामों में भी सक्रिय रही हैं. खुद युक्ता ने बाद में मिस वर्ल्ड के ताज को सामाजिक मुद्दों पर काम करने के लिए एक प्लेटफॉर्म बताया था.

रीता फारिया

भारत की पहली मिस वर्ल्ड रीता फारिया थीं. उन्होंने 1966 में ये खिताब जीतकर इतिहास रचा था. वो मिस वर्ल्ड का ताज जीतने वाली पहली भारतीय और पहली एशियाई महिला बनी थीं. रीता फारिया ने मिस वर्ल्ड बनने के बाद सीधे बॉलीवुड का रुख करने के बजाय अपनी मेडिकल पढ़ाई को प्राथमिकता दी. यही वजह है कि उनका सफर ऐश्वर्या या प्रियंका जैसा फिल्मी नहीं रहा. वो डॉक्टर बनीं और बाद में अपनी निजी जिंदगी में व्यस्त हो गईं. यही कारण है कि आज की युवा पीढ़ी उन्हें फिल्मों की एक्ट्रेस के तौर पर नहीं, बल्कि भारत की पहली मिस वर्ल्ड के रूप में ज्यादा जानती है.

ये भी पढ़ें: Explainer: जैस्मीन मसीह से ईशा रिखी तक, नहीं टिकी बादशाह की एक भी शादी, जानिए क्या है उनकी शादीशुदा जिंदगी से जुड़ा विवाद?

Continue reading on the app

  Sports

Vaibhav Sooryavanshi: ऐसे ही करते रहे तो कभी टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे वैभव सूर्यवंशी, जानिए क्यों?

Central Zone vs East Zone, Duleep Trophy 2026: सेंट्रल जोन के खिलाफ पहली पारी में शतक चूकने के बाद दूसरी पारी में वैभव सूर्यवंशी अर्धशतक चूक गए. Tue, 01 Sep 2026 15:57:38 +0530

  Videos
See all

मोदी ने कहा, 'युद्ध खत्म करें पुतिन' [Modi said, "Putin, end the war"] #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-01T10:42:25+00:00

Milk Price Hike Live | 9 रुपये मेहेंगा हुआ दूध | Breaking News | Maharashtra Milk Price | Hindi News #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-01T10:43:45+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers