मथुरा में जन्माष्टमी पर 3 से 5 सितंबर तक रहेगा रूट डायवर्जन, वाहनों की एंट्री पर रोक
मथुरा (उप्र), एक सितंबर जन्माष्टमी समारोह और श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने तीन से पांच सितंबर तक मथुरा में कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रतिबंध लागू किए हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इस संबंध में जारी एक बयान के अनुसार, तीन सितंबर सुबह आठ बजे से पांच सितंबर सुबह नौ बजे तक श्रीकृष्ण जन्मस्थान की ओर जाने वाले मार्गों पर वाणिज्यिक और भारी वाहनों, सिटी बसों, चार पहिया वाहनों, ई-रिक्शा और दोपहिया वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।
शहर में द्वारकाधीश मंदिर की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर भी यातायात नियंत्रित किया जाएगा। बयान के अनुसार, प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़भाड़ से बचने के लिए विभिन्न स्थानों पर पार्किंग की विस्तृत व्यवस्था की है। मथुरा-वृंदावन के बीच यातायात प्रबंधन के तहत छटीकरा-वृंदावन मार्ग पर निर्धारित बहुस्तरीय पार्किंग से आगे किसी भी वाहन को जाने की अनुमति नहीं होगी।
प्रशासन ने कहा कि एंबुलेंस और अग्निशमन वाहनों सहित आपातकालीन सेवाओं को यातायात प्रतिबंधों से मुक्त रखा गया है। बयान में कहा गया है कि जन्माष्टमी के मद्देनजर पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने जिला पुलिस प्रमुखों को सतर्क रहने और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने तथा अफवाह फैलाने या सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया है।
पुलिस को सोशल मीडिया मंचों पर भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री पर नजर रखने और ऐसी सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। जुलूसों और धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने तथा सभी समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
समुद्र में सुरक्षा कवच हुआ मजबूत, 'INS निपुण' कैसे भारत की रक्षा करेगा?
इंडियन नेवी को दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल INS निपुण मिल गया है। इसे मुंबई में नेवी डॉक्यार्ड में हुई एक सेरेमनी में नेवी में शामिल किया गया यह निस्तार क्लास का दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) है हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) विशाखापत्तनम ने 'निपुण' को देश में ही डिजाइन और तैयार किया है। यह खास तौर पर गोताखोरी और पानी के नीचे किए जाने वाले विभिन्न अभियानों में मददगार है। इस जहाज में आधुनिक डाइविंग सिस्टम और पानी के नीचे काम करने की क्षमता है। इससे समुद्र में कठिन हालात में काम कर रहे गोताखोरों को लंबे समय तक सहायता दी जा सकेगी। यह जहाज पनडुब्बी को बचाने यानी सबमरीन रेस्क्यू ऑपरेशन में नेवी की क्षमता को भी बढ़ाएगा।
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रक्षा मंत्रालय के अनुसार, INS निपुण एक खास तरह का प्लेटफ़ॉर्म है जिसे पानी के अंदर मुश्किल ऑपरेशन करने के लिए बनाया गया है। इस जहाज़ को विशाखापत्तनम में HSL ने स्वदेशी तकनीक से डिज़ाइन और तैयार किया है। इसे शामिल करना रक्षा क्षेत्र में जहाज़ बनाने के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और कदम है और यह तकनीकी रूप से एडवांस्ड नेवल प्लेटफ़ॉर्म को डिज़ाइन और बनाने की भारत की बढ़ती क्षमता को दिखाता है। इस जहाज़ को मुख्य रूप से गहरे समुद्र में डाइविंग और पानी के नीचे के ऑपरेशन (जैसे सैचुरेशन, एयर और हेलिओक्स डाइविंग) में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें जांच और ज़रूरी कार्रवाई के लिए दूर से ऑपरेट होने वाले अंडरवाटर सिस्टम लगे हैं। साथ ही, इसका खास डाइविंग कॉम्प्लेक्स, डायनामिक पोज़िशनिंग क्षमताएं, लाइफ़-सपोर्ट सिस्टम और मेडिकल सुविधाएं मुश्किल समुद्री हालात में भी लगातार ऑपरेशन करने में मदद करती हैं। INS निपुण पनडुब्बी बचाव ऑपरेशन में भी मदद कर सकता है, जिससे पानी के नीचे की आपातकालीन स्थितियों से निपटने की नेवी की क्षमता काफी बढ़ जाती है। अपने साथी जहाज़ INS निस्तार के साथ मिलकर, यह जहाज़ डाइविंग, पानी के नीचे कार्रवाई, बचाव कार्य (सैलवेज) और पनडुब्बी बचाव के क्षेत्रों में नेवी की क्षमताओं को और बढ़ाएगा।
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बेहतरीन तालमेल
एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि INS निपुण को शामिल करना भारतीय नौसेना, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड और घरेलू औद्योगिक नेटवर्क के बीच बेहतरीन तालमेल को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एक ही बार में समुद्र में परीक्षण के दौरान सभी डाइविंग सिस्टम की क्षमता साबित करना देश के तकनीकी आत्मविश्वास और इंजीनियरिंग कौशल का सबूत है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि समुद्री इलाके में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्लोबल समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरों के बीच, युद्ध के लिए तैयार रहना नौसेना की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वेस्टर्न नेवल कमांड के तहत वेस्ट कोस्ट पर तैनात INS निपुण, मल्टी-डोमेन ऑपरेशन को जारी रखने के लिए ज़रूरी खास अंडरवाटर क्षमताओं में एक अहम बढ़ोतरी होगी।
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