टाइट जूते से हाई हील तक, पैरों में क्या पहनते हैं इसका शरीर पर पड़ता है असर
नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। हम अक्सर कपड़े, हेयरस्टाइल और अपनी फिटनेस पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन पैरों में क्या पहन रहे हैं, इस पर उतना गौर नहीं करते। जूते या चप्पल खरीदते समय कई लोगों के लिए डिजाइन, रंग और कीमत सबसे जरूरी होती है। लेकिन साइंस की मानें तो फुटवियर सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध पैरों की चाल, दबाव और शरीर के निचले हिस्से की मूवमेंट से भी है। गलत साइज या गलत डिजाइन का फुटवियर लंबे समय तक पहनने पर पैरों में दर्द और दूसरी परेशानियों का कारण बन सकता है।
अगर जूता पैर से छोटा है या बहुत टाइट है तो पैर की उंगलियों को सही जगह नहीं मिलती। इससे उंगलियों पर लगातार दबाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर पैरों में दर्द, छाले, कॉर्न और त्वचा पर मोटी परत जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
कई लोग जूता खरीदते समय सिर्फ यह देखते हैं कि पैर उसमें आ रहा है या नहीं। लेकिन जूते की चौड़ाई भी उतनी ही जरूरी है। अगर आगे से जूता बहुत संकरा है तो पैर की उंगलियां आपस में दब सकती हैं। इससे चलने में परेशानी और पैरों में दर्द हो सकता है। इसलिए ऐसा जूता बेहतर माना जाता है जिसमें उंगलियों को थोड़ा फैलने की जगह मिले।
अगर आप लगातार हाई हील पहनते हैं तो यह सिर्फ पैरों तक सीमित असर नहीं डालती। रिसर्च में हाई हील्स को पैर की बनावट में बदलाव, मस्कुलोस्केलेटल दर्द और चोट के बढ़े हुए खतरे से जोड़ा गया है। एक अन्य मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि ऊंची हील पहनने पर चलते समय घुटने पर पड़ने वाले कुछ लोड और मोमेंट बढ़ जाते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कभी-कभार हील पहनना हर किसी के लिए नुकसानदायक है। रोजाना लंबे समय तक हाई हील पहनना पैरों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।
हमारे पैर जमीन पर शरीर का वजन संभालते हैं। जूते का आकार और डिजाइन बदलने पर चलने का तरीका भी थोड़ा बदल सकता है। अगर जूता सही फिट नहीं है तो पैर को सामान्य तरीके से रखने में दिक्कत हो सकती है। इसी वजह से लंबे समय तक गलत फुटवियर पहनने पर दर्द या असहजता महसूस हो सकती है।
साइंस के मुताबिक, जूता ऐसा होना चाहिए जिसमें पैर आराम से रहे। उंगलियों पर ज्यादा दबाव न पड़े, एड़ी बार-बार जूते से बाहर न निकले और चलते समय पैर को परेशानी न हो। अगर जूता पहनने के कुछ देर बाद ही पैर में दर्द, जलन या दबाव महसूस होने लगे तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
--आईएएनएस
पीके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
राम मंदिर के पहले CEO के चयन की प्रक्रिया तेज, 3 सदस्यीय कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट
Ram Temple CEO: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है. चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय विशेष सर्च कमेटी ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है. अब सर्च कमेटी की सिफारिशों के आधार पर ट्रस्ट बोर्ड आगे की नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम रूप देगा.
तीन सदस्यीय सर्च कमेटी
इस उच्चस्तरीय सर्च कमेटी में देश के तीन प्रमुख विशेषज्ञों को शामिल किया गया था, जिनमें सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी, पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हवारे और पूर्व न्यायाधीश प्रमोद कोहली शामिल हैं. इस कमेटी ने उम्मीदवारों की योग्यताओं और प्रशासनिक अनुभवों का गहन मूल्यांकन करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार की हैं.
ये भी पढ़ें: रिटायरमेंट के बाद मैदान पर लौटेंगे बेन स्टोक्स, इस बड़ी फ्रेंचाइजी लीग में खेलते आएंगे नजर, मिलेंगे इतने करोड़
वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में सौंपी गई रिपोर्ट
सर्च कमेटी द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के दौरान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे. इस दौरान ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज, महंत दिनेन्द्र दास, कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन तथा अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी विशेष रूप से मौजूद रहे.
प्रशासनिक समन्वय और बेहतर संचालन का लक्ष्य
राम मंदिर में प्रतिदिन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा और दैनिक प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने के लिए CEO का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पहले सीईओ की नियुक्ति से मंदिर के प्रशासनिक कार्यों, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी.
#WATCH | Ayodhya, Uttar Pradesh | The three-member search committee, comprising Retired Lieutenant General Vishnu Kant Chaturvedi, former Scientist Suresh Haware and former Justice Pramod Kohli, appointed to select the first Chief Executive Officer (CEO) for the Ram Temple today… pic.twitter.com/Lopz0SHq5J
— ANI (@ANI) September 1, 2026
ये भी पढे़ं: नए सीमा शुल्क और बैंकिंग सुधारों के दम पर देश 'विकसित भारत 2047' का लक्ष्य हासिल करेगा: वित्त मंत्री
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation








