नयी दिल्ली, एक सितंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक उथल-पुथल, युद्धों और आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों के बावजूद सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की 7.8 प्रतिशत वृद्धि दर हासिल करने को बेहद प्रभावशाली बताते हुए मंगलवार को इसका श्रेय देश की जनता को दिया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘इंस्टाग्राम’ पर जारी एक वीडियो संदेश में ‘‘झूठ की गूंज’’ फैलाने वालों (संभवतः राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर तंज) पर निशाना साधते हुए कहा कि जीडीपी की ताजा वृद्धि दर ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर फैलाए जा रहे ‘‘निराशावाद’’ के विमर्श को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर लोग स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर बल देना जारी रखेंगे तो आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर देश के युवाओं को विकसित भारत सौंपेंगे।
प्रधानमंत्री ने लोगों से यह भी आग्रह किया कि जब तक बेहद जरूरी न हो वे विदेश घूमने न जाएं, विदेशों में शादियों का आयोजन न करें और सोना भी न खरीदें। मोदी ने कहा, ‘‘देशवासियों, बहुत-बहुत बधाई। 7.8 प्रतिशत आर्थिक वद्धि दर।
देश खुशियों से भर गया है, लेकिन देशवासियों को मैं बधाई देता हूं उनकी संकल्प शक्ति के लिए, उनके पुरुषार्थ के लिए। (यह उपलब्धि) एक सामूहिक शक्ति का प्रतिबिंब है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया युद्ध में डूबी हुई है, चारों तरफ युद्ध की खबरें आ रही हैं, विश्व संकटों से घिरा हुआ है, आपूर्ति शृंखला पूरी तरह बाधित है और 2020 के कोविड काल से अब तक, कहीं पर भी स्थिरता नजर नहीं आ रही है। उसके बावजूद भारत तेज गति से प्रगति कर रहा है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘दूसरी तरफ भारत के भीतर भी निराशा की गर्त में डूबे लोग झूठ की गूंज और चारों तरफ निराशा फैलाने में लगे हैं।
इन सारी चीजों को पार करके भी, उन सभी बातों को धता बताकर देश ने 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वद्धि दर हासिल की है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमें इस गति को बनाए रखना है, बढ़ाना भी है और इसके लिए आत्मनिर्भर भारत बनना बहुत जरूरी है।’’
उन्होंने स्वदेशी के मंत्र और ‘वोकल फॉर लोकल’ का आह्वान करते हुए कहा, ‘‘जरूरत न हो तो विदेशों में घूमने-फिरने नहीं जाना चाहिए। विदेशों में शादी नहीं करना चाहिए। मेड इन इंडिया के मंत्र को जीना चाहिए और जरूरत न हो तो सोना भी नहीं खरीदना चाहिए।’’
मोदी ने कहा, ‘‘हम जितना ज्यादा स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर बल देंगे, मुझे पक्का विश्वास है कि जब आजादी के 100 साल पूरे होंगे तो हम हमारी युवा पीढ़ी को विकसित भारत सुपुर्द करेंगे।’’
उन्होंने लोगों से आह्वान करते हुए कहा, ‘‘हमारी युवा पीढ़ी के सपनों को हम अपने परिश्रम से साकार करके रहेंगे और इसलिए आइए, हम पुरुषार्थ में कमी न रखें।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी नीति सही है, हमारी नीयत साफ है और 140 करोड़ देशवासियों की शक्ति एकजुट होकर देश को आज नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रही है।’’
सरकार की तरफ से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही।
हालांकि, यह जनवरी-मार्च तिमाही के 8.6 प्रतिशत से कम है, लेकिन एक साल पहले की समान तिमाही के 6.9 प्रतिशत से अधिक है।
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अयोध्या में राम मंदिर का प्रबंधन करने वाले 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट और 'राम मंदिर निर्माण समिति' के बीच बढ़ती दूरियां चर्चा का विषय बन गई हैं। मंदिर को मिले दान में कथित हेराफेरी से शुरू हुए विवाद ने धीरे-धीरे मंदिर परिसर के प्रबंधन और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं; इस परिसर में हर महीने हजारों श्रद्धालु आते हैं। इस पूरे मामले के केंद्र में 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' के पूर्व महासचिव चंपत राय और 'राम मंदिर निर्माण समिति' के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र हैं। दान की चोरी के विवाद के बाद राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अयोध्या में 2 सितंबर को मंदिर ट्रस्ट की एक अहम बैठक होने वाली है, जिसके कारण यह पूरा मामला और भी चर्चा में आ गया है। इससे पहले हुई कुछ घटनाओं पर ध्यान देना ज़रूरी है: दान में चोरी के आरोपों पर मिश्रा की तीखी प्रतिक्रिया, राय के नाम से जारी नौ पन्नों का एक दस्तावेज़/पत्र जिसमें मिश्रा के बारे में टिप्पणियां थीं, मंदिर ट्रस्ट और मंदिर निर्माण समिति की लगातार बैठकों में एक-दूसरे के प्रतिनिधियों का शामिल न होना, और हाल ही में ट्रस्ट के पूर्व ऑडिटर महिपाल सिंह का एक कथित पत्र।
6 जुलाई को मंदिर ट्रस्ट की एक बैठक हुई थी, लेकिन मिश्रा, जो पहले की बैठकों में नियमित रूप से शामिल होते थे, उसमें मौजूद नहीं थे। दूसरी ओर, उसी महीने हुई मंदिर निर्माण समिति की बैठक और 19 से 21 अगस्त के बीच हुई एक और बैठक में मंदिर ट्रस्ट का कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं था। इससे पहले, राय और कुछ अन्य पदाधिकारी निर्माण समिति की बैठकों में अक्सर मंदिर ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व करते थे। मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पिछले छह महीनों में मिश्रा ने मंदिर की व्यवस्थाओं (जो ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं) से खुद को दूर करना शुरू कर दिया था और वे मंदिर परिसर के निर्माण पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे थे।
लेकिन जिसे पहले काम का बंटवारा माना जा रहा था, उसे अब कई लोग संस्थागत खींचतान के तौर पर देख रहे हैं। यही वजह है कि 2 सितंबर को होने वाली बैठक पर सबकी नज़रें टिकी हैं। इसी माहौल में राय के नाम से नौ पन्नों का एक दस्तावेज़ जारी किया गया है। यह दस्तावेज़ मिश्रा को मंदिर के निर्माण और प्रोजेक्ट के प्रबंधन, दोनों ही मामलों में एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति के तौर पर पेश करता है; इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर काम में तेज़ी लाने के लिए अहम फ़ैसले लेने का श्रेय भी उन्हें दिया गया है। दस्तावेज़ में 2020 में शुरू हुए निर्माण कार्य को कोविड महामारी जैसी मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद आगे बढ़ाने का श्रेय भी उन्हें दिया गया है। साथ ही, इसमें 70 एकड़ में फैले पूरे मंदिर परिसर को विकसित करने में मिश्रा की भूमिका का भी ज़िक्र है, जिसमें तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं, सहायक बुनियादी ढांचा और रामकथा संग्रहालय जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।
हालांकि, उसी दस्तावेज़ में यह भी दावा किया गया है कि मिश्रा ने मंदिर निर्माण समिति में अपनी पसंद के कुछ लोगों को शामिल किया था और कई अहम फ़ैसले सीधे उनके स्तर पर लिए गए थे। 21 अगस्त को अयोध्या सर्किट हाउस में मीडियाकर्मियों ने जब इस बारे में टिप्पणी करने को कहा, तो मिश्रा ने साफ़ तौर पर कहा कि उन्हें ऐसा कोई पत्र (दस्तावेज़) नहीं मिला है। उन्होंने कहा: "कौन सा पत्र? मैंने ऐसा कोई पत्र नहीं देखा है।" उन्होंने आगे कहा कि जब तक वह पत्र देख नहीं लेते, तब तक वह इसे मनगढ़ंत कहानी मानेंगे। इस बीच, 19 से 21 अगस्त तक हुई मंदिर निर्माण समिति की बैठक के बाद, मिश्रा ने निर्माण कार्य की प्रगति के बारे में जानकारी दी। उनके अनुसार, निर्माण के लिए तय किए गए लगभग 70 कामों में से करीब 60 काम पूरे हो चुके थे। पूरे हो चुके कामों को ट्रस्ट को सौंप दिया गया था, जो अब उनके रखरखाव की ज़िम्मेदारी संभालेगा।
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