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Explainer: मोदी-Putin-Xi एक मंच पर, अमेरिका की बढ़ी बेचैनी? SCO Summit में इंडिया का बड़ा दांव!

SCO Summit 2026: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO का शिखर सम्मेलन इस बार सिर्फ एक डिप्लोमैटिक फोटो-ऑप नहीं है. इस बार ये बैठक दुनिया की बदलती सियासी बिसात का आईना है. दरअसल, एक तरफ अमेरिका के भारी-भरकम टैरिफ का दबाव है तो दूसरी तरफ रूस और चीन से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश. ऐसे में विदेश नीतियों के जानकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा को कई मायनों में एक साथ कई मोर्चों को साधने की कवायद मान रहे हैं.

इस बार का SCO समिट खास क्यों है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल संगठन अपनी स्थापना के 25 साल पूरे कर रहा है. यही वजह है कि समिट की थीम 25 साल का SCO: 'साझा तौर पर स्थायी शांति, विकास और समृद्धि की ओर' रखी गई है'. बता दें भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान और मध्य एशिया के कई देशों समेत यह संगठन अब दुनिया की करीब 40 फीसदी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे इस इस तरह के मंच पर भारत की मौजूदगी और सक्रियता का असर क्षेत्रीय राजनीति के साथ विश्व पटल पर भी गूंज रहा है.

मोदी-पुतिन की मुलाकात में क्या तय हुआ?

एक रिपोर्ट के मुताबिक समिट के बीच प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई. विदेशी अखबारों के मुताबिक दोनों नेताओं की बातचीत में व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, रक्षा सहयोग और आपसी भुगतान व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल रहे. बताया जा रहा है कि पुतिन ने बैठक में भारत-रूस व्यापार में हुई बढ़ोतरी का जिक्र किया और दोनों देशों के बीच बढ़ते पर्यटन को भी सकारात्मक संकेत बताया. दूसरी ओर मोदी ने यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख फिर दोहराया और जंग का बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही है.

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चीन के साथ रिश्तों में यह गर्माहट अचानक कहां से आई?

जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों में भारत-चीन संबंधों में उल्लेखनीय नरमी देखी गई है. बता दें देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की बीजिंग यात्रा के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वें दौर की बातचीत हुई जिसमें दोनों पक्षों ने आठ सूत्रीय सहमति बनाई. इसे पूर्वी लद्दाख सीमा पर तनाव घटाने और रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. वहीं, चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने भी भी हाल ही में कहा था कि कजान और तियानजिन में हुई मोदी-शी की पिछली दो मुलाकातों ने दोनों देशों के रिश्तों को स्थिरता की राह पर लौटाने में बड़ी भूमिका निभाई है. 


अमेरिका के टैरिफ का इस पूरी तस्वीर से क्या कनेक्शन है?

इस समिट की टाइमिंग को समझने के लिए अमेरिका के साथ चल रहे व्यापारिक तनाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लगाकर दबाव बनाने की कोशिश की है और ऐसे माहौल में भारत का रूस-चीन के साथ मंच साझा करना अमेरिका के लिए असहज करने वाला संकेत माना जा रहा है. पिछले साल तियानजिन में हुए ऐसे ही एक समिट के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर मोदी-पुतिन-शी की तस्वीर साझा करते हुए टिप्पणी की थी कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है.

भारत को आखिर व्यावहारिक तौर पर क्या मिल सकता है?

रूस के साथ बातचीत का सीधा फायदा ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति में स्थिरता के रूप में दिख सकता है जो भारत की महंगाई और किसानों दोनों के लिए अहम है. चीन के मोर्चे पर सीमा पर बनी सहमति अगर आगे बढ़ती है तो इससे सैन्य तनाव घटाने के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के रास्ते फिर खुलने की उम्मीद बनती है जो कोविड और गलवान झड़प के बाद से लगभग ठप जैसे पड़े थे.

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क्या इससे भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर पड़ेगा?

अमेरिका की तरफ से भी इस पर नजर बनी हुई है. पिछले साल जब ऐसी ही तस्वीरें सामने आई थीं तो अमेरिकी दूतावास ने तुरंत बयान देकर भारत-अमेरिका संबंधों को 21वीं सदी के लिए निर्णायक बताया था. जानकारों की राय है कि भारत की कोशिश अमेरिका को नाराज करने की नहीं, बल्कि यह दिखाने की है कि टैरिफ जैसे दबाव की सूरत में भारत के पास और भी विकल्प मौजूद हैं. 

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न जूते, न कोई ट्रेनिंग: बेटियों की फीस जुटाने के लिए नंगे पांव दौड़ी 47 साल की मां, बीड मैराथन में रचा इतिहास

Ramabai Ranveer Marathon: ऐसा कहा जाता है कि एक मां जब अपने बच्चों के भविष्य के लिए ठान लेती है, तो दुनिया की कोई भी रुकावट उसका रास्ता नहीं रोक सकती. न पैरों के छाले, न समाज की बंदिशें और न ही मुफलिसी का अंधेरा. महाराष्ट्र के बीड जिले के अंबाजोगाई से सामने आई यह दास्तान सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता जीतने की नहीं है, बल्कि एक लाचार मां के अदम्य साहस, ममता और कभी न हार मानने वाले जज्बे की जीती-जागती मिसाल है. 47 साल की रमाबाई रणवीर ने अपनी बेटियों की किताबों और फीस के लिए सड़क पर ऐसी दौड़ लगाई कि देखने वाले दंग रह गए.

फुटपाथ से फिनिशिंग लाइन तक का सफर

अंबाजोगाई में आयोजित 'अमृत दौड़' मैराथन का नजारा आम दिनों जैसा नहीं था. ट्रैक पर आधुनिक ट्रैकसूट, ब्रांडेड रनिंग शूज और कानों में ईयरफोन लगाए युवा एथलीट वॉर्म-अप कर रहे थे. उसी भीड़ के बीच एक कोने में खड़ी थीं 47 साल की रमाबाई. तन पर सूती साड़ी, चेहरे पर जिंदगी की तपिश से उपजी झुर्रियां और पैरों में मामूली सी चप्पल. जब सीटी बजी और दौड़ शुरू हुई, तो कई लोगों की नजरें रमाबाई पर टिक गईं. किसी ने सोचा यह महिला चंद कदम चलकर रुक जाएगी, तो किसी ने इसे महज एक औपचारिकता समझा. लेकिन रमाबाई वहां सिर्फ दौड़ने नहीं, अपनी बेटियों की तकदीर बदलने के इरादे से उतरी थीं. छत्रपति शिवाजी महाराज चौक से भाग्यनगर चौक के बीच बिछी तारकोल की सड़क पर जब कदमों की थाप तेज हुई, तो रमाबाई की रफ्तार ने सभी को चौंका दिया.

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जब चप्पल बनी रुकावट, तो नंगे पैर ही नाप दी सड़क

दौड़ शुरू हुए कुछ ही मिनट बीते थे कि रमाबाई के पैरों की चप्पलें फिसलने लगीं. सड़क की ढलान और तेज गति के तालमेल में चप्पल बाधा बन रही थी. किसी पेशेवर धावक के लिए यह रेस छोड़ने का कारण हो सकता था, लेकिन रमाबाई के लिए रुकने का मतलब था बेटियों की पढ़ाई के तीन हजार रुपये गंवा देना. उन्होंने बिना एक पल गंवाए दौड़ते-दौड़ते अपनी चप्पलें उतारीं, उन्हें दोनों हाथों में थामा और नंगे पांव ही सड़क नापना शुरू कर दिया. सड़क पर चुभते कंकड़, सुबह की ठंडी हवा और एक हाथ से साड़ी का पल्लू संभालते हुए रमाबाई ने अपनी गति को और तेज कर दिया. उनके पैरों से खून की परवाह किए बिना वह एक-एक करके युवा प्रतियोगियों को पीछे छोड़ती चली गईं. जब वह सबसे पहले फिनिशिंग लाइन पार कर गईं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं और हाथ तालियां बजाने के लिए उठ चुके थे.

पति के जाने के बाद कंधों पर आया दुखों का पहाड़

रमाबाई मूल रूप से महाराष्ट्र के हिंगोली जिले की रहने वाली है. कुछ साल पहले पति के असामयिक निधन ने उनकी पूरी दुनिया उजाड़ दी थी. घर में न कोई जमा पूंजी थी और न ही कोई मजबूत सहारा. सामने खड़ी थीं दो मासूम बेटियां और उनकी परवरिश का कठिन सवाल. आसपास के लोगों ने सलाह दी कि बेटियों की जल्द शादी कर दी जाए, लेकिन रमाबाई ने तय किया कि वह गरीबी की विरासत अपनी संतानों को नहीं सौंपेंगी. उन्होंने अपनी बेटियों को पढ़ाने और उन्हें पैरों पर खड़ा करने का संकल्प लिया. इसके लिए वह हिंगोली छोड़कर अंबाजोगाई आ गईं, जहां उन्होंने एक कोचिंग अकादमी की मेस और कुछ घरों में रसोइया (कुक) के रूप में काम करना शुरू किया.

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चूल्हे की आग से निकलकर मैराथन के ट्रैक तक

रमाबाई का दिन सुबह 4 बजे शुरू होता है. दिनभर चूल्हे के सामने पसीना बहाना, सैकड़ों रोटियां बेलना और बर्तन मांजना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया. उसी कमाई से वह अपनी बेटियों के कमरे का किराया, अनाज और पढ़ाई का खर्च निकालती हैं. उनकी एक बेटी बैंकिंग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है, जबकि दूसरी बेटी पूजा पुलिस भर्ती परीक्षा के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही है. पूजा की लगन और मां के त्याग को देखकर अकादमी के संचालक ने भी फीस में कुछ रियायत दी, लेकिन किताबों, फॉर्म भरने और शारीरिक प्रशिक्षण के खर्च अक्सर रमाबाई की रातों की नींद उड़ा देते थे.

3000 रुपये का वो इनाम, जो बना उम्मीद का सहारा

जब स्थानीय संस्था द्वारा आयोजित अमृत महोत्सव मैराथन और उसके 3,000 रुपये के प्रथम पुरस्कार की घोषणा हुई, तो रमाबाई के मन में सिर्फ एक बात कौंधी—इस पैसे से बेटियों के लिए जरूरी किताबें और फॉर्म की फीस भरी जा सकती है. किसी प्रोफेशनल धावक की तरह डाइट या ट्रेनिंग के बिना, केवल एक मां के संकल्प के दम पर उन्होंने रेस में उतरने का फैसला किया. 3,000 रुपये की यह इनामी राशि भले ही बड़े लोगों के लिए बहुत छोटी हो, लेकिन एक रसोइया मां के लिए यह महीनों की बचत और बेटियों के सपनों की गारंटी थी.

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साधनों की कमी पर भारी पड़ा हौसलों का कद

रमाबाई रणवीर की यह जीत बताती है कि मुकाम हासिल करने के लिए महंगे जूतों और आधुनिक सुविधाओं से ज्यादा मजबूत इरादों की जरूरत होती है. उन्होंने नंगे पैर दौड़कर न केवल 3,000 रुपये का नकद इनाम जीता, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश दिया कि जब इरादे नेक और हौसले बुलंद हों, तो हर बाधा छोटी पड़ जाती है. आज अंबाजोगाई से लेकर पूरे महाराष्ट्र में रमाबाई की यह दौड़ चर्चा और सम्मान का केंद्र बनी हुई है. एक मां जिसने अपनी बेटियों के पंखों को उड़ान देने के लिए कांटों भरी राह पर नंगे पैर दौड़ना चुना, उसने साबित कर दिया कि ममता से बड़ी कोई ताकत इस दुनिया में नहीं है.

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  Sports

संजू सैमसन की वापसी, Hardik Pandya बाहर! Afghanistan T20I के लिए Team India का ऐलान

भारत ने नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में अफगानिस्तान के ख़िलाफ़ होने वाली तीन मैचों की T20I सीरीज़ के लिए 15 खिलाड़ियों की टीम का ऐलान कर दिया है। ज़िम्बाब्वे दौरे से बाहर किए गए विकेटकीपर-बल्लेबाज़ संजू सैमसन की वापसी हुई है, जबकि हार्दिक पांड्या एक बार फिर टीम से बाहर हैं। खबरों के मुताबिक, उन्हें एक और चोट लगी है, जिसकी वजह से वह इस सीरीज में नहीं खेल पाएंगे।
 

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दूसरी ओर, जसप्रीत बुमराह, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर और हर्षित राणा को टीम में शामिल किया गया है, लेकिन उनका खेलना उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगा। टीम मैनेजमेंट शायद इन खिलाड़ियों को लेकर कोई रिस्क न लेना चाहे, क्योंकि एशियन गेम्स जल्द ही होने वाले हैं और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ विदेशी धरती पर सीरीज़ भी होनी है। स्टार स्पिनर वरुण चक्रवर्ती की भी टीम में वापसी हुई है। उन्हें आयरलैंड, इंग्लैंड और ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ सीरीज़ के लिए आराम दिया गया था। उम्मीद है कि चेन्नई में जन्मे इस क्रिकेटर को तुरंत प्लेइंग XI में शामिल किया जाएगा, क्योंकि रवि बिश्नोई को टीम में चुने जाने के बावजूद, ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ विकेट लेने के मामले में वे कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाए हैं।

संजू की वापसी से बैटिंग में कॉम्पिटिशन बढ़ गया है। अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी के ओपनिंग करने की उम्मीद है, और ईशान किशन तीसरे नंबर पर खेलेंगे, लेकिन इन सभी खिलाड़ियों को सावधान रहना होगा क्योंकि किसी भी तरह की नाकामी पर तुरंत सवाल उठेंगे, खासकर तब जब सैमसन बाहर बैठे हों।

श्रेयस अय्यर चौथे नंबर पर खेलेंगे, जबकि तिलक वर्मा पांचवें नंबर पर बैटिंग करेंगे। हाल ही में बनाए गए उप-कप्तान आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए थे, जिससे उनके भविष्य को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं; इसलिए, अफ़गानिस्तान सीरीज के दौरान उन पर सबकी नज़र रहेगी। अगर वह फ्लॉप होते हैं, तो उन्हें सैमसन से कॉम्पिटिशन मिल सकता है, क्योंकि टीम मैनेजमेंट ने पिछले साल ही उन्हें मिडिल ऑर्डर में आज़माया था। नीतीश कुमार रेड्डी भी एक और विकल्प हैं। शिवम दुबे और अक्षर पटेल के छठे और सातवें नंबर पर खेलने की उम्मीद है। पिच को देखते हुए वॉशिंगटन के बारे में फैसला लिया जाएगा।
 

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अफगानिस्तान के खिलाफ भारत की टीम - श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी*, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर*, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह*, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा*
 
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Tue, 01 Sep 2026 18:05:00 +0530

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