Explainer: जैस्मीन मसीह से ईशा रिखी तक, नहीं टिकी बादशाह की एक भी शादी, जानिए क्या है उनकी शादीशुदा जिंदगी से जुड़ा विवाद?
Badshah Married Life: बॉलीवुड के मशहूर रैपर और सिंगर बादशाह इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं. 31 अगस्त 2026 को बादशाह और पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी ने सोशल मीडिया पर एक साथ बयान जारी कर अपने अलग होने की पुष्टि कर दी. दोनों ने कहा कि उन्होंने आपसी सहमति और सम्मान के साथ अपने-अपने रास्ते अलग करने का फैसला किया है. साथ ही उन्होंने लोगों से अपनी निजता का सम्मान करने और रिश्ते को लेकर किसी तरह की अटकलें नहीं लगाने की अपील की.
ईशा रिखी से बादशाह की शादी को अभी करीब पांच महीने ही हुए थे. ऐसे में उनके अचानक अलग होने की खबर ने फैंस को हैरान कर दिया है. हालांकि, ये बादशाह की निजी जिंदगी में पहला अलगाव नहीं है. इससे पहले उनकी शादी जैस्मीन मसीह से हुई थी, जो 2020 में तलाक के साथ खत्म हुई. दोनों की एक बेटी भी है. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर बादशाह की शादीशुदा जिंदगी में ऐसा क्या हुआ कि उनकी दोनों शादियां ज्यादा लंबे समय तक नहीं टिक सकीं? क्या दोनों रिश्तों के पीछे कोई समान वजह थी या दोनों के मामले पूरी तरह अलग थे? आइए समझते हैं पूरी कहानी.
जैस्मीन मसीह से हुई थी पहली शादी
बादशाह ने अपनी पहली शादी जैस्मीन मसीह से की थी. दोनों की शादी और निजी जिंदगी को लेकर वो हमेशा काफी प्राइवेट रहे. इस रिश्ते से उनकी एक बेटी है, जिसका जन्म 2017 में हुआ था. लेकिन समय के साथ दोनों के रिश्ते में दूरी आने लगी. आखिरकार दोनों ने अलग होने का फैसला किया और 2020 में उनका तलाक हो गया. बादशाह ने बाद में अपनी पहली शादी के टूटने को लेकर खुलकर बात भी की थी. 2024 में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि उनके और जैस्मीन के बीच कल्चरल डिफरेंसेस भी रिश्ते में मुश्किलों की एक वजह बना था. उन्होंने ये भी कहा था कि दोनों ने अपनी बेटी की भलाई को ध्यान में रखते हुए अलग होने का फैसला किया था. यानी पहली शादी के मामले में बादशाह की ओर से सामने आया मैन कारण रिश्ते का अस्वस्थ हो जाना और आपसी-सांस्कृतिक अंतर था.
बेटी की वजह से रिश्ता खत्म करने का लिया था फैसला
बादशाह और जैस्मीन की एक बेटी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक बेटी के जन्म के बाद भी दोनों की शादीशुदा जिंदगी ज्यादा समय तक नहीं चल सकी. बादशाह ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि दोनों के बीच चीजें इस हद तक खराब हो गई थीं कि साथ रहना बच्चे के लिए स्वस्थ माहौल नहीं था. इसलिए उन्होंने अलग होने का फैसला किया. बादशाह ने ये भी बताया था कि उनकी बेटी लंदन में रहती है और वो उससे मिलते रहते हैं, हालांकि उतनी बार नहीं मिल पाते जितना वो चाहते हैं.
फिर जिंदगी में हुई ईशा रिखी की एंट्री
पहली शादी खत्म होने के बाद कुछ सालों तक बादशाह की निजी जिंदगी काफी हद तक मीडिया से दूर रही. इसके बाद पंजाबी एक्ट्रेस और मॉडल ईशा रिखी के साथ उनके रिश्ते की खबरें सामने आने लगीं. दोनों ने अपने रिश्ते को लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं किया. मीडिया रिपोर्ट्स में उनके कई सालों तक डेटिंग करने की बातें सामने आईं. इसके बाद 2026 में उनकी शादी की खबर ने खूब सुर्खियां बटोरीं.
मार्च 2026 में ईशा की मां पूनम रिखी की सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दोनों की शादी की तस्वीरें सामने आईं. शादी बेहद निजी तरीके से हुई थी और इसमें परिवार तथा करीबी लोगों के शामिल होने की बात सामने आई. बाद में ईशा ने भी सोशल मीडिया पर बादशाह के साथ अपनी शादी की पुष्टि की थी. पहली शादी के बाद बादशाह की जिंदगी में आई इस नई शुरुआत को देखकर फैंस को लगा था कि शायद अब उनकी निजी जिंदगी में सबकुछ ठीक चल रहा है. लेकिन ये रिश्ता भी कुछ ही महीनों में टूटने की खबर के साथ खत्म हो गया.
शादी के कुछ महीनों बाद क्यों आई दरार?
ईशा रिखी और बादशाह की शादी के कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया पर उनके रिश्ते में परेशानी की खबरें सामने आने लगी थीं. जुलाई 2026 में ईशा ने बादशाह के साथ बिताए पलों का एक वीडियो और तस्वीरों का मोंटाज सोशल मीडिया पर शेयर किया था. इसके साथ उन्होंने लिखा था, “हर तूफान एक सबक है, हर प्रार्थना एक उम्मीद है.” इस पोस्ट के बाद फैंस ने अंदाजा लगाना शुरू कर दिया कि शायद दोनों के रिश्ते में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. इसके बाद ईशा की एक और भावुक सोशल मीडिया पोस्ट ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी. ईशा ने लिखा था कि कुछ लड़ाइयां ऐसे निशान छोड़ जाती हैं जो दिखाई नहीं देते. उन्होंने ये भी कहा कि वो लंबे समय तक डर की वजह से चुप रहीं और उन्हें अपने पति की ताकत, इम्पैक्ट और संसाधनों से दबाव महसूस होता था. हालांकि, इस पोस्ट में उन्होंने बादशाह का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया था. इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अटकलें लगने लगीं.
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Explainer: मोदी-Putin-Xi एक मंच पर, अमेरिका की बढ़ी बेचैनी? SCO Summit में इंडिया का बड़ा दांव!
SCO Summit 2026: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO का शिखर सम्मेलन इस बार सिर्फ एक डिप्लोमैटिक फोटो-ऑप नहीं है. इस बार ये बैठक दुनिया की बदलती सियासी बिसात का आईना है. दरअसल, एक तरफ अमेरिका के भारी-भरकम टैरिफ का दबाव है तो दूसरी तरफ रूस और चीन से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश. ऐसे में विदेश नीतियों के जानकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा को कई मायनों में एक साथ कई मोर्चों को साधने की कवायद मान रहे हैं.
इस बार का SCO समिट खास क्यों है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल संगठन अपनी स्थापना के 25 साल पूरे कर रहा है. यही वजह है कि समिट की थीम 25 साल का SCO: 'साझा तौर पर स्थायी शांति, विकास और समृद्धि की ओर' रखी गई है'. बता दें भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान और मध्य एशिया के कई देशों समेत यह संगठन अब दुनिया की करीब 40 फीसदी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे इस इस तरह के मंच पर भारत की मौजूदगी और सक्रियता का असर क्षेत्रीय राजनीति के साथ विश्व पटल पर भी गूंज रहा है.
PM Shri @narendramodi ji joins fellow world leaders at the 26th SCO Summit in Bishkek, Kyrgyzstan.
— Satya Kumar Yadav (@satyakumar_y) September 1, 2026
As the Shanghai Cooperation Organisation marks 25 years of its journey, India continues to play an important role as a full member, engaging with the region and shaping… pic.twitter.com/O5bCswgzEt
मोदी-पुतिन की मुलाकात में क्या तय हुआ?
एक रिपोर्ट के मुताबिक समिट के बीच प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई. विदेशी अखबारों के मुताबिक दोनों नेताओं की बातचीत में व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, रक्षा सहयोग और आपसी भुगतान व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल रहे. बताया जा रहा है कि पुतिन ने बैठक में भारत-रूस व्यापार में हुई बढ़ोतरी का जिक्र किया और दोनों देशों के बीच बढ़ते पर्यटन को भी सकारात्मक संकेत बताया. दूसरी ओर मोदी ने यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख फिर दोहराया और जंग का बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही है.
चीन के साथ रिश्तों में यह गर्माहट अचानक कहां से आई?
जानकारी के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों में भारत-चीन संबंधों में उल्लेखनीय नरमी देखी गई है. बता दें देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की बीजिंग यात्रा के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वें दौर की बातचीत हुई जिसमें दोनों पक्षों ने आठ सूत्रीय सहमति बनाई. इसे पूर्वी लद्दाख सीमा पर तनाव घटाने और रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. वहीं, चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने भी भी हाल ही में कहा था कि कजान और तियानजिन में हुई मोदी-शी की पिछली दो मुलाकातों ने दोनों देशों के रिश्तों को स्थिरता की राह पर लौटाने में बड़ी भूमिका निभाई है.
???? | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26वें SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया और विश्व नेताओं के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाई।@PMOIndia | @narendramodi | @MEAIndia | @IndiaInKyrgyz | @EOIBeijing |@IndEmbMoscow | @India_in_Iran | @MFA_Kyrgyzstan | @IndianDiplomacy | #PMModi |… pic.twitter.com/NfQmEAHFOJ
— यूनीवार्ता (@univartaindia1) September 1, 2026
अमेरिका के टैरिफ का इस पूरी तस्वीर से क्या कनेक्शन है?
इस समिट की टाइमिंग को समझने के लिए अमेरिका के साथ चल रहे व्यापारिक तनाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लगाकर दबाव बनाने की कोशिश की है और ऐसे माहौल में भारत का रूस-चीन के साथ मंच साझा करना अमेरिका के लिए असहज करने वाला संकेत माना जा रहा है. पिछले साल तियानजिन में हुए ऐसे ही एक समिट के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर मोदी-पुतिन-शी की तस्वीर साझा करते हुए टिप्पणी की थी कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है.
भारत को आखिर व्यावहारिक तौर पर क्या मिल सकता है?
रूस के साथ बातचीत का सीधा फायदा ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति में स्थिरता के रूप में दिख सकता है जो भारत की महंगाई और किसानों दोनों के लिए अहम है. चीन के मोर्चे पर सीमा पर बनी सहमति अगर आगे बढ़ती है तो इससे सैन्य तनाव घटाने के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के रास्ते फिर खुलने की उम्मीद बनती है जो कोविड और गलवान झड़प के बाद से लगभग ठप जैसे पड़े थे.
क्या इससे भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर पड़ेगा?
अमेरिका की तरफ से भी इस पर नजर बनी हुई है. पिछले साल जब ऐसी ही तस्वीरें सामने आई थीं तो अमेरिकी दूतावास ने तुरंत बयान देकर भारत-अमेरिका संबंधों को 21वीं सदी के लिए निर्णायक बताया था. जानकारों की राय है कि भारत की कोशिश अमेरिका को नाराज करने की नहीं, बल्कि यह दिखाने की है कि टैरिफ जैसे दबाव की सूरत में भारत के पास और भी विकल्प मौजूद हैं.
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