गुर्दे की सेहत के लिए वरदान हैं ये योगाभ्यास, जानें करने का सही तरीका
नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। स्वास्थ्य का वास्तविक अर्थ केवल बीमारियों का इलाज करना नहीं बल्कि शरीर को स्वाभाविक रूप से स्वस्थ और मजबूत बनाए रखना है। गुर्दे हमारे शरीर का प्राकृतिक फिल्टरिंग सिस्टम है, जो शरीर की सफाई में काम करता है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि आंतरिक अंगों की मालिश और पुनर्प्राप्ति की एक सूक्ष्म तकनीक है। सही योगाभ्यासों, प्राणायाम और सजगता के माध्यम से हम न केवल अपने गुर्दों को स्वस्थ रख सकते हैं बल्कि भविष्य में होने वाले गंभीर जोखिमों से भी इनका बचाव कर सकते हैं।
मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान ने कुछ ऐसे आसनों के बारे में बताया, जो गुर्दे पर प्रभाव डालते हैं और उसकी कार्यप्रणाली को मजबूत बनाते हैं। इनमें उत्तानपदासन, सेतुबंधासन, धनुरासन, भुजंगासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, वक्रासन, कटिचक्रासन, त्रिकोणासन जैसे कई योगाभ्सास शामिल हैं।
उत्तानपदासन : यह आसन सीधे तौर पर गुर्दे की किसी बीमारी को ठीक नहीं करता लेकिन यह शरीर की आंतरिक प्रणालियों को मजबूत कर गुर्दे की कार्यक्षमता में सुधार लाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन को करने के दौरान जब साधक पैरों को ऊपर उठाते हैं, तो निचले हिस्से से रक्त का प्रवाह पेट और पीठ के निचले हिस्से (जहां गुर्दे स्थित होते हैं) की ओर बढ़ता है। बेहतर ब्लड सर्कुलेशन से गुर्दे को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है और वह खून को बेहतर ढंग से फिल्टर कर पाता है।
सेतुबंधासन: इस योगासन को करने से पेट के भीतरी अंगों के साथ-साथ गुर्दे को भी उत्तेजित (स्टिम्युलेट) करता है। इस अभ्यास से पेल्विक क्षेत्र और किडनी के आसपास रक्त का संचार सुचारू होता है, जिससे अंगों को पोषण मिलता है। साथ ही, यह हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका अदा करता है।
धनुरासन: धनुरासन के अभ्यास के दौरान पेट और कमर के हिस्से में खिंचाव होता है, जिससे गुर्दे सहित अंदरूनी अंगों में रक्त का संचार बेहतर होता है। यह आसन अंगों को उत्तेजित करके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और मूत्र विकारों को दूर करने में मददगार माना जाता है।
वक्रासन: अग्न्याशय को उत्तेजित करता है जिससे इंसुलिन का स्राव बेहतर होता है। वक्रासन में शरीर को मोड़ने से पेट के निचले हिस्से और कमर की मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे किडनी क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर होता है।
भुजंगासन : नियमित तौर पर इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली बनती है। पेट के अंगों पर दबाव डालकर पाचन क्रिया में सुधार करता है। आसन करने से पेट में खिंचाव होता है, जिससे किडनी जैसे आंतरिक अंगों की हल्की मालिश होती है, जिससे उनका कामकाज सुधरता है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन: यह पेट के अंगों की अच्छी मालिश करता है और रक्त संचार बढ़ाता है।
कटिचक्रासन: कटिचक्रासन के दौरान होने वाले ट्विस्टिंग (घुमाव) मूवमेंट से पेट और कमर के अंदरूनी अंगों जैसे किडनी और लीवर की हल्की मालिश होती है। इस आसन से रीढ़ और पेट के हिस्से में रक्त का संचार बढ़ता है, जिससे गुर्दे को बेहतर ऑक्सीजन और पोषण मिलने में मदद मिलती है।
त्रिकोणासन: इस आसन को करने के दौरान शरीर के एक तरफ का हिस्सा सिकुड़ता है और दूसरी तरफ खिंचाव होता है, जिससे किडनी और लिवर जैसे अंगों तक रक्त का संचार बेहतर होता है।
यह आसन करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। हालांकि, यह सीधे तौर पर किसी गंभीर किडनी रोग का इलाज नहीं है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली के तहत इसे करने से पेट के अंगों की कार्यप्रणाली सक्रिय रहती है।
--आईएएनएस
एनएस/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
दूध ₹100 पार, CNG-PNG के बढ़े दाम, टैक्सी की सवारी महंगी... 1 सितंबर को मुंबईकरों को लगे महंगाई के 3 झटके
Mumbai News: 1 सितंबर का दिन मुंबईवालों के लिए बहुत भारी पड़ा. एक ही दिन में मुंबईवासियों को 3 झटके लगे हैं. तलेबे का दूध 100 रूपये पार हो गया. वहीं सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में वृद्धि हुई. इसके अलावा ऑटो और काली-पीली टैक्सी का किराया भी बढ़ गया.
त्योहारी सीजन से पहले मुंबई में दूध के दाम बढ़ने से आम लोगों का बजट बिगड़ सकता है. मुंबई में महंगाई का ट्रिपल झटका लगा है. 1 सितंबर 2026 से तबेले के दूध की कीमत में 9 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है. यानी अब मुंबईकरों को एक लीटर दूध के लिए 102 रुपये चुकाने होंगे, जबकि पहले इसकी कीमत 93 रुपये थी.
CNG-PNG के दाम बढ़े
मुंबई और आसपास के इलाकों में CNG की कीमत 2 रुपये प्रति किलो बढ़ाई गई है. अब एक किलो CNG के लिए 88 रुपये चुकाने होंगे. वहीं घरेलू PNG के दाम में 1 रुपये प्रति SCM की बढ़ोतरी की गई है.
महानगर गैस लिमिटेड (MGL) के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. इसके अलावा CNG की मांग को पूरा करने के लिए महंगे स्पॉट RLNG का इस्तेमाल भी बढ़ा है. कंपनी का कहना है कि बढ़ी हुई कीमत से बढ़ती लागत का केवल एक हिस्सा ही पूरा हो पाएगा.
यह भी पढ़ें: LPG Price Hike: सितंबर के पहले दिन ही लगा महंगाई का झटका, एलपीजी के बढ़े इतने दाम, जानें अपने शहर का हाल
ऑटो-टैक्सी का सफर भी हुआ महंगा
CNG के दाम बढ़ने के साथ ही मुंबई महानगर क्षेत्र में ऑटो रिक्शा और काली-पीली टैक्सी का न्यूनतम किराया भी बढ़ गया है. यानी अब मुंबईकरों को आने-जाने के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे.
किराए में यह बदलाव 1 सितंबर से लागू हो गया है. CNG की बढ़ी कीमतों का असर सीधे तौर पर ऑटो और टैक्सी चालकों की परिचालन लागत पर पड़ता है. ऐसे में किराया बढ़ने से यात्रियों की रोजाना की यात्रा का खर्च बढ़ना तय है.
क्यों बढ़ी दूध की कीमतें, 6 महीने तक रहेंगी लागू
दूध की कीमत बढ़ने के पीछे पशुपालकों ने बढ़ती उत्पादन लागत को बड़ी वजह बताया है. उनका कहना है कि पशुओं के चारे और दूसरे जरूरी सामान महंगे होने से दूध उत्पादन का खर्च लगातार बढ़ रहा है.
पशुपालकों के मुताबिक, अनाज, तूर चुनी और चना चुनी जैसे पशु आहार के दाम करीब 25 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. इसके अलावा खली और पशुओं के लिए जरूरी अन्य सामान की कीमतों में भी इजाफा हुआ है. इसके अलावा दूध की नई कीमतें 1 सितंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेंगी ऐसे में अगले छह महीनों तक मुंबई के लोगों को महंगे दूध का सामना करना पड़ेगा.
यह भी पढ़ें: Explainer: इथेनॉल, जमाखोरी, फसल खराब... आखिर चीनी पर क्यों फूटा महंगाई बम? ये हैं असली कारण
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation






