आरबीआई का खुलासा: बैंकों में 75 प्रतिशत से अधिक व्यक्तिगत जमा 40 साल से ऊपर के लोगों की
इस साल जून तक देश के बैंकों में व्यक्तिगत जमाओं का तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का रहा जबकि 25 से 40 साल की उम्र वाले लोगों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से कुछ कम रही। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सोमवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। नीति-निर्माता पहले ही कह चुके हैं कि युवा वर्ग अपने उम्रदराज जमाकर्ताओं की तुलना में शेयर और म्यूचुअल फंड जैसे पूंजी बाजार साधनों को अधिक तरजीह दे रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि जून 2026 में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की कुल जमा सालाना आधार पर 11.6 प्रतिशत बढ़ी। निजी बैंकों की जमा 13.8 प्रतिशत और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की जमा 10.3 प्रतिशत बढ़ी। घरेलू क्षेत्र का कुल जमा में सबसे बड़ा योगदान रहा।
जून 2026 के अंत में कुल जमा में उसकी हिस्सेदारी 58.8 प्रतिशत थी और तिमाही के दौरान बढ़ी जमा में उसकी हिस्सेदारी 98.9 प्रतिशत रही। जमा राशि की वृद्धि में सावधि जमा की मुख्य भूमिका रही। जून में सावधि जमा 12.9 प्रतिशत बढ़ी, जबकि चालू जमा में 5.3 प्रतिशत और बचत जमा में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
एक करोड़ रुपये और उससे अधिक की सावधि जमाओं की कुल सावधि जमा में हिस्सेदारी 47.3 प्रतिशत रही। वहीं, पांच करोड़ रुपये और उससे अधिक की जमाओं की हिस्सेदारी 35.7 प्रतिशत थी। बैंक ऋण की वृद्धि भी जून में तेज होकर 16.5 प्रतिशत हो गई, जो एक साल पहले 9.9 प्रतिशत थी।
इसमें कॉरपोरेट क्षेत्र को दिए गए कर्ज की 21.1 प्रतिशत वृद्धि का प्रमुख योगदान रहा। महिला व्यक्तिगत कर्जदारों को दिया गया ऋण भी जून माह में 19.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जून 2025 में इसमें 12.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। आरबीआई के मुताबिक, नौ प्रतिशत से कम ब्याज दर वाले ऋणों की हिस्सेदारी जून 2026 में बढ़कर करीब दो-तिहाई हो गई, जो एक साल पहले 54.1 प्रतिशत थी।
बकाया ऋण पर भारित औसत उधारी दर (डब्ल्यूएएलआर) 0.45 प्रतिशत अंक घटकर 9.26 प्रतिशत रह गई।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी
भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। यह अमेरिका-ईरान युद्ध और उससे उपजी वैश्विक अनिश्चितता के कारण घरेलू आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे मौजूदा हालात में ‘असाधारण उपलब्धि’ बताया है।
सरकार की तरफ से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। हालांकि, यह जनवरी-मार्च तिमाही के 8.6 प्रतिशत से कम है, लेकिन एक साल पहले की समान तिमाही के 6.9 प्रतिशत से अधिक है। इसके साथ ही भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
वृद्धि दर तिमाही के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सात प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक रही, जो बढ़े हुए भू-राजनीतिक जोखिमों के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को दर्शाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने जीडीपी आंकड़े जारी होने के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की ‘उल्लेखनीय’ जीडीपी वृद्धि एक ‘असाधारण उपलब्धि’ है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच तेल कीमतों के झटकों और आपूर्ति शृंखला की समस्याओं के बावजूद भारतीयों की सामूहिक ताकत ने यह वृद्धि सुनिश्चित की।
मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाने वालों पर तंज कसते हुए कहा कि ‘निराशावादी फिर निराश हुए और भारत एक बार फिर आगे बढ़ा।’ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह आंकड़ा राजग सरकार द्वारा किए गए सुधारों और अर्थव्यवस्था के चुस्त प्रबंधन के परिणामों को दर्शाता है। उन्होंने अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि का श्रेय देश के लोगों और उनकी मेहनत को दिया। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीडीपी जून तिमाही में 81.36 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 75.46 लाख करोड़ रुपये थी।
वहीं, मौजूदा कीमतों पर जीडीपी 10.3 प्रतिशत बढ़कर 88.27 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 80 लाख करोड़ रुपये थी। जून तिमाही में आधार कीमतों पर सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 8.2 प्रतिशत बढ़कर 73.82 लाख करोड़ रुपये हो गया। विनिर्माण क्षेत्र का जीवीए 9.2 प्रतिशत बढ़ा जबकि कृषि, पशुधन, वानिकी और मत्स्य क्षेत्र में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
खनन एवं संबद्ध क्षेत्र में 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेश की स्थिति बताने वाला सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) पहली तिमाही में 11.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसमें 5.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार निकट अवधि में मजबूत है लेकिन वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि ब्याज दरों, ऊर्जा जिंसों की आपूर्ति और खाद्य कीमतों को लेकर जोखिम बने हुए हैं। नागेश्वरन ने कहा कि फिलहाल घरेलू आर्थिक गतिविधियों और निर्यात प्रदर्शन ने मिलकर मजबूत वृद्धि दर्ज कराने में मदद की है। हालांकि, वैश्विक घटनाक्रमों का आगे चलकर देश की आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद पहली तिमाही में वृद्धि उम्मीद से बेहतर रही। यह अर्थव्यवस्था के मजबूत घरेलू पहलुओं और अनिश्चित दौर से निकल पाने की क्षमता को दर्शाता है। केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि आने वाली तिमाहियों में वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है और भू-राजनीतिक तनाव तथा व्यापार नीति से जुड़ी अनिश्चितताएं आर्थिक परिदृश्य पर असर डाल सकती हैं।
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