बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप बढ़ा, छह अन्य बच्चों की मौत, मृतकों की संख्या 973 के करीब पहुंची
ढाका, 31 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। सोमवार को इस बीमारी से छह अन्य बच्चों की मौत हो गई, जिसके बाद इस वर्ष खसरे से हुई पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 973 पहुंच गई है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अनुसार, सोमवार सुबह तक के पिछले 24 घंटों में मौतें दर्ज की गईं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हाल में हुई सभी छह मौतों को संदिग्ध खसरा संक्रमण से जुड़ा माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार, खसरे से पुष्ट मौतों की संख्या 99 बनी हुई है, जबकि संदिग्ध मौतों का आंकड़ा बढ़कर 874 हो गया है।
डीजीएचएस ने बताया कि पिछले 24 घंटों के दौरान खसरे के 1,162 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही संदिग्ध मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,57,991 हो गई है। इसी अवधि में 94 नए पुष्ट मामले भी दर्ज किए गए, जिससे खसरे के कुल पुष्ट मामलों की संख्या 19,312 तक पहुंच गई है।
देश में लगातार बढ़ते मामलों के बीच एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने हाल ही में 2026 के खसरा प्रकोप को बांग्लादेश के हाल के वर्षों के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया है। समूह ने कहा कि खसरा एक ऐसी बीमारी है, जिसे टीकाकरण के जरिए रोका जा सकता है।
कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) ने अपनी रिपोर्ट प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश 2026 मीजल्स आउटब्रेक में कहा कि यह प्रकोप आम लोगों को अचानक लग सकता है, लेकिन महामारी विज्ञान के दृष्टिकोण से यह अप्रत्याशित नहीं था।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 के दौरान मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय टीकों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई बाधाओं ने संकट को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा नियमित टीकाकरण छूट जाना, पूरक टीकाकरण कार्यक्रमों का रद्द होना, टीकों की खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाले समूहों की समय पर पहचान न हो पाना भी प्रमुख कारण रहे।
जीसीडीजी ने कहा कि बांग्लादेश लंबे समय से यूनिसेफ की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रणाली के जरिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुमोदित टीके खरीदता था। हालांकि, अंतरिम सरकार ने इस व्यवस्था को बदलकर खुली निविदा प्रणाली लागू कर दी।
रिपोर्ट में यूनिसेफ के हवाले से दावा किया गया है कि एजेंसी ने 2024 से 2026 के बीच संभावित वैक्सीन कमी को लेकर अंतरिम सरकार को पांच से छह औपचारिक पत्र भेजे थे और लगभग 10 बैठकों में भी चेतावनी दी थी।
बांग्लादेशी समाचार पत्र समकाल में प्रकाशित विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 में खसरा टीकाकरण कवरेज घटकर 56.2 प्रतिशत रह गई, जो 2017 से 2025 के बीच का सबसे निचला स्तर था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2024-25 के दौरान बांग्लादेश में मीजल्स-रूबेला (एमआर) वैक्सीन की देशव्यापी कमी और नियमित टीकाकरण में गिरावट को बच्चों की प्रतिरक्षा कमजोर होने तथा 2026 के प्रकोप के मुख्य कारणों के रूप में चिह्नित किया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति पर काबू पाने के लिए व्यापक टीकाकरण अभियान, वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता और जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी की आवश्यकता है।
--आईएएनएस
एएमटी/एबीएम
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दुकान पर टिक्की खाने पहुंचे सीएम धामी ने सुनी पिता की पीड़ा, 8 साल के बीमार देव के पूरे इलाज का उठाएंगे खर्च
Uttarakhand News: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर अपनी संवेदनशीलता और जनसरोकार का परिचय दिया है. खटीमा के लोहियाहेड क्षेत्र में आम जनता से सीधा संवाद और एक छोटे व्यापारी की पीड़ा को समझना एक मासूम बच्चे के जीवन में नई किरण लेकर आया है. स्थानीय दुकानदार रवि शर्मा के आठ वर्षीय बेटे देव के स्वास्थ्य में सुधार और सही उपचार के लिए मुख्यमंत्री ने पूरी मदद का भरोसा दिया है. सरकार बच्चे के इलाज में होने वाले सभी खर्चों को खुद वहन करेगी.
दरअसल, बीते दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लोहियाहेड में भ्रमण पर थे. इसी दौरान वे स्थानीय दुकानदार रवि शर्मा की दुकान पर पहुंचे और वहां उन्होंने टिक्की का स्वाद लिया. इस सामान्य मुलाकात के बीच पिता रवि शर्मा ने बेहद भावुक होकर अपने आठ वर्षीय पुत्र देव की गंभीर बीमारी का जिक्र मुख्यमंत्री से किया. उन्होंने बताया कि उनका बेटा जन्म से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है. उसके हाथ और पैर सही तरीके से काम नहीं कर पाते हैं. परिवार ने बच्चे के ठीक होने के लिए कई जगह प्रयास किए और देहरादून स्थित इंद्रेश अस्पताल में भी लंबा उपचार कराया, लेकिन आर्थिक और चिकित्सीय सीमाओं के कारण पूरी राहत नहीं मिल सकी.
सीएम के निर्देश पर तुरंत हरकत में आया प्रशासन
पिता का दर्द और बच्चे की हालत सुनकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उसी समय बच्चे की चिकित्सा व्यवस्था का पूरा भरोसा दिया. मुख्यमंत्री ने उच्चाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चे की जांच से लेकर उपचार तक का हर जरूरी प्रबंध प्राथमिकता के आधार पर किया जाए. मुख्यमंत्री का आदेश मिलते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम तत्काल हरकत में आ गई. सोमवार देर शाम आला अधिकारियों का काफिला सीधे लोहियाहेड में रवि शर्मा के घर पहुंचा.
रवि शर्मा के आवास पर पहुंचने वाली टीम में जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी, उपजिलाधिकारी तुषार सैनी और मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसके गोस्वामी शामिल रहे. इसके साथ ही वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एचएस ऐरी और अन्य चिकित्सकों की टीम भी मौजूद रही. डॉक्टरों ने मौके पर ही आठ वर्षीय देव का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया और उसकी पुरानी मेडिकल फाइल देखकर अब तक के इलाज की पूरी जानकारी ली.
MRI जांच और बेहतर उपचार की तैयारी
डॉक्टरों ने बच्चे की शारीरिक स्थिति और पुरानी मेडिकल रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया. ऑर्थो विशेषज्ञ और मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि बीमारी की सही स्थिति समझने और आगे की सटीक चिकित्सा पद्धति तय करने के लिए सबसे पहले बच्चे की एमआरआई जांच कराना आवश्यक है. इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में आगे का पूरा उपचार प्लान तैयार किया जाएगा.
जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि बच्चे की एमआरआई जांच बिना किसी देरी के तत्काल कराई जाए. इसके साथ ही जिलाधिकारी ने परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि बच्चे और उसके माता-पिता को जिला चिकित्सालय तक सुरक्षित ले जाने और लाने के लिए प्रशासन अपनी ओर से सरकारी वाहन और सहायक कर्मचारी उपलब्ध कराएगा. प्रशासन का पूरा प्रयास है कि बच्चे को बिना किसी परेशानी के आधुनिक और बेहतर इलाज मिल सके.
परिवार ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी और जो भी चिकित्सीय संसाधन जरूरी होंगे, वे समय पर उपलब्ध कराए जाएंगे. सरकार की इस त्वरित और मानवीय पहल से पीड़ित परिवार की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं. परिवार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस संवेदनशील कदम के लिए उनका दिल से आभार व्यक्त किया है. स्थानीय नागरिकों ने भी मुख्यमंत्री की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की है.
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