दुकान पर टिक्की खाने पहुंचे सीएम धामी ने सुनी पिता की पीड़ा, 8 साल के बीमार देव के पूरे इलाज का उठाएंगे खर्च
Uttarakhand News: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर अपनी संवेदनशीलता और जनसरोकार का परिचय दिया है. खटीमा के लोहियाहेड क्षेत्र में आम जनता से सीधा संवाद और एक छोटे व्यापारी की पीड़ा को समझना एक मासूम बच्चे के जीवन में नई किरण लेकर आया है. स्थानीय दुकानदार रवि शर्मा के आठ वर्षीय बेटे देव के स्वास्थ्य में सुधार और सही उपचार के लिए मुख्यमंत्री ने पूरी मदद का भरोसा दिया है. सरकार बच्चे के इलाज में होने वाले सभी खर्चों को खुद वहन करेगी.
दरअसल, बीते दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लोहियाहेड में भ्रमण पर थे. इसी दौरान वे स्थानीय दुकानदार रवि शर्मा की दुकान पर पहुंचे और वहां उन्होंने टिक्की का स्वाद लिया. इस सामान्य मुलाकात के बीच पिता रवि शर्मा ने बेहद भावुक होकर अपने आठ वर्षीय पुत्र देव की गंभीर बीमारी का जिक्र मुख्यमंत्री से किया. उन्होंने बताया कि उनका बेटा जन्म से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा है. उसके हाथ और पैर सही तरीके से काम नहीं कर पाते हैं. परिवार ने बच्चे के ठीक होने के लिए कई जगह प्रयास किए और देहरादून स्थित इंद्रेश अस्पताल में भी लंबा उपचार कराया, लेकिन आर्थिक और चिकित्सीय सीमाओं के कारण पूरी राहत नहीं मिल सकी.
सीएम के निर्देश पर तुरंत हरकत में आया प्रशासन
पिता का दर्द और बच्चे की हालत सुनकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उसी समय बच्चे की चिकित्सा व्यवस्था का पूरा भरोसा दिया. मुख्यमंत्री ने उच्चाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चे की जांच से लेकर उपचार तक का हर जरूरी प्रबंध प्राथमिकता के आधार पर किया जाए. मुख्यमंत्री का आदेश मिलते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम तत्काल हरकत में आ गई. सोमवार देर शाम आला अधिकारियों का काफिला सीधे लोहियाहेड में रवि शर्मा के घर पहुंचा.
रवि शर्मा के आवास पर पहुंचने वाली टीम में जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी, उपजिलाधिकारी तुषार सैनी और मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसके गोस्वामी शामिल रहे. इसके साथ ही वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एचएस ऐरी और अन्य चिकित्सकों की टीम भी मौजूद रही. डॉक्टरों ने मौके पर ही आठ वर्षीय देव का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया और उसकी पुरानी मेडिकल फाइल देखकर अब तक के इलाज की पूरी जानकारी ली.
MRI जांच और बेहतर उपचार की तैयारी
डॉक्टरों ने बच्चे की शारीरिक स्थिति और पुरानी मेडिकल रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन किया. ऑर्थो विशेषज्ञ और मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि बीमारी की सही स्थिति समझने और आगे की सटीक चिकित्सा पद्धति तय करने के लिए सबसे पहले बच्चे की एमआरआई जांच कराना आवश्यक है. इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में आगे का पूरा उपचार प्लान तैयार किया जाएगा.
जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि बच्चे की एमआरआई जांच बिना किसी देरी के तत्काल कराई जाए. इसके साथ ही जिलाधिकारी ने परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि बच्चे और उसके माता-पिता को जिला चिकित्सालय तक सुरक्षित ले जाने और लाने के लिए प्रशासन अपनी ओर से सरकारी वाहन और सहायक कर्मचारी उपलब्ध कराएगा. प्रशासन का पूरा प्रयास है कि बच्चे को बिना किसी परेशानी के आधुनिक और बेहतर इलाज मिल सके.
परिवार ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी और जो भी चिकित्सीय संसाधन जरूरी होंगे, वे समय पर उपलब्ध कराए जाएंगे. सरकार की इस त्वरित और मानवीय पहल से पीड़ित परिवार की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं. परिवार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस संवेदनशील कदम के लिए उनका दिल से आभार व्यक्त किया है. स्थानीय नागरिकों ने भी मुख्यमंत्री की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की है.
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दिल्ली: जेपी नड्डा ने नजफगढ़ में ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र के कामकाज की समीक्षा की
नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को पश्चिमी दिल्ली के नजफगढ़ स्थित ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (आरएचटीसी) में मरीजों की देखभाल और सुविधाओं में हुई प्रगति का जायजा लेने के लिए एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
जेपी नड्डा ने सेंटर में मरीजों की देखभाल, इंफ्रास्ट्रक्चर, मैनपावर, एकेडमिक गतिविधियों और डिजिटल हेल्थ सिस्टम को मजबूत करने के लिए शुरू की गई पहलों के लागू होने की समीक्षा की।
13 अप्रैल को हुई पिछली बैठक के बाद से हुई प्रगति की समीक्षा करते हुए नड्डा ने सभी एजेंसियों और संस्थानों को निर्देश दिया कि वे चल रहे कामों को समय पर पूरा करें और योजनाबद्ध उपायों को तालमेल के साथ लागू करें।
उन्होंने नतीजों की बारीकी से निगरानी, मैनपावर और उपकरणों की समय पर उपलब्धता और मरीजों की अच्छी देखभाल और मेडिकल ट्रेनिंग पर लगातार ध्यान देने पर जोर दिया।
नड्डा ने कहा कि आरएचटीसी नजफगढ़ ने अपने क्लिनिकल मैनपावर और सेवाओं को मजबूत करने में काफी प्रगति की है।
उन्होंने आरएचटीसी नजफगढ़ को मरीजों की देखभाल, मेडिकल शिक्षा, नर्सिंग और संबंधित हेल्थ ट्रेनिंग और समुदाय-केंद्रित हेल्थकेयर के लिए एक व्यापक केंद्र के रूप में और विकसित करने के लिए तालमेल और समयबद्ध कार्रवाई के महत्व को दोहराया।
सेंटर की ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह से चालू हैं, साथ ही एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन सेंटर, एंटी-स्नेक वेनम सेंटर और अन्य सहायक सुविधाएं जैसे जन औषधि केंद्र, सीएसएसडी, प्रयोगशाला और एम्बुलेंस सेवाएं भी उपलब्ध हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि माइनर ऑपरेशन थिएटर भी काम कर रहा है।
बयान में कहा गया है कि नजफगढ़ के आरएचटीसी को मेडिको-लीगल मामलों के लिए मेडलीपआर और आयुष्मान भारत के तहत पीएम-जय से भी जोड़ा गया है, जिससे पात्र लाभार्थियों के लिए सेवाओं तक पहुंच आसान हो गई है।
आरएचटीसी अपने यूपीएचसी (शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) के लिए एनक्यूएएस सर्टिफिकेशन और मॉडल पीएचसी के विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इसमें कहा गया है कि औसतन हर महीने, आरएचटीसी में लगभग 47,000 ओपीडी कंसल्टेशन और 9,000 इमरजेंसी मामले दर्ज किए गए; इसके अलावा अगस्त में 221 माइनर प्रोसीजर किए गए।
बयान में कहा गया है कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत नियमित ओपीडी और पीएचसी मुलाकातों में टीबी के लक्षणों की जांच को शामिल किया गया है।
आरएचटीसी क्लिनिकल मैनपावर, ट्रेनिंग, डिजिटल सिस्टम, खरीद और रिसर्च को मजबूत करने के लिए सफदरजंग अस्पताल, एबीवीआईएमएस, आरएमएल अस्पताल और एनआईएमआर सहित केंद्र सरकार के अन्य संस्थानों के साथ सहयोग कर रहा है। सेंटर वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ओएनओएस) पहल में भी शामिल हो गया है।
बयान में कहा गया है कि बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव और स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक लोवनीश जी कृष्णा शामिल हुए।
--आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी
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