Responsive Scrollable Menu

सिर पर चोटी रखना क्यों माना जाता है धार्मिक दृष्टि से खास? जानें शिखा का महत्व और वैज्ञानिक कारण

shikha rakhne ka mahatva: हिंदू धर्म में सिर के पिछले हिस्से में बालों का एक छोटा गुच्छा रखने की परंपरा को "शिखा" या "चोटी" कहा जाता है। यह परंपरा अत्यंत प्राचीन काल से चली आ रही है, और इसे धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि शिखा रखना न सिर्फ आध्यात्मिक अनुशासन का प्रतीक है, बल्कि इसे मस्तिष्क की शक्ति और एकाग्रता से भी जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि पुजारियों, पंडितों और ब्राह्मण समुदाय में आज भी शिखा रखने की परंपरा प्रचलित है।

शिखा से जुड़ी धार्मिक मान्यता
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सिर के जिस स्थान पर शिखा रखी जाती है, उसे मानव शरीर का सबसे संवेदनशील और ऊर्जा से भरपूर बिंदु माना जाता है। मान्यता है कि इसी स्थान पर सहस्रार चक्र स्थित होता है, जिसे आध्यात्मिक ज्ञान और चेतना का केंद्र माना जाता है। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि शिखा रखने से व्यक्ति के भीतर धार्मिक अनुशासन और आत्म-नियंत्रण की भावना मजबूत होती है।

इसके अलावा यह भी मान्यता है कि शिखा को व्यक्ति के धार्मिक कर्तव्यों और परंपराओं के पालन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाता है।

उपनयन संस्कार के साथ जुड़ी है यह परंपरा
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, परंपरागत रूप से उपनयन संस्कार के दौरान बालक का मुंडन कराकर सिर पर शिखा रखने की रस्म निभाई जाती थी। मान्यता है कि इसके बाद बालक को वेद अध्ययन और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने का अधिकार प्राप्त होता था। यह परंपरा जनेऊ धारण करने की रस्म के साथ भी जुड़ी हुई मानी जाती है।

शिखा रखने के वैज्ञानिक कारण भी हैं खास
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ शिखा रखने की इस परंपरा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझाया जाता है। कहा जाता है कि सिर के जिस स्थान पर शिखा रखी जाती है, वहां मस्तिष्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्थित होता है, जो स्मरण शक्ति और एकाग्रता को नियंत्रित करता है। मान्यता है कि इस स्थान पर बालों का गुच्छा बांधे रखने से मस्तिष्क की नसों पर हल्का दबाव बना रहता है, जिससे एकाग्रता और मानसिक स्थिरता बेहतर होती है।

शिखा रखने से जुड़े नियम
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, शिखा को हमेशा साफ-सुथरा और सुव्यवस्थित रखना चाहिए। मान्यता है कि पूजा-पाठ या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के दौरान शिखा को बांधकर रखना विशेष रूप से आवश्यक माना जाता है, क्योंकि इसे खुला रखना अशुभ और अनुशासनहीनता का प्रतीक माना जाता है।

आज भी कुछ समुदायों में निभाई जाती है यह परंपरा
समय के साथ भले ही आधुनिक जीवनशैली में शिखा रखने की परंपरा कम होती जा रही हो, लेकिन आज भी पुजारियों, पंडितों और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े कई लोग इस परंपरा को श्रद्धापूर्वक निभाते हैं। मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर आज भी शिखा धारण किए हुए पुजारी आसानी से देखे जा सकते हैं।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।

Continue reading on the app

Dhurandhar X Review: पावरफुल डायलॉग, हाई-वोल्टेज एक्शन और संजय दत्त की बेजोड़ स्क्रींन प्रेज़ेंस, फैंस बोले - 'Blockbuster'

Dhurandhar X Review: पावरफुल डायलॉग, हाई-वोल्टेज एक्शन और संजय दत्त की बेजोड़ स्क्रींन प्रेज़ेंस, फैंस बोले - 'Blockbuster'

Continue reading on the app

  Sports

पहली पारी में 9, दूसरी पारी में 5 शिकार, 14 विकेट के बाद भी टीम से ड्रॉप, समय से पहले जादूगर का करियर क्यों हुआ खत्म?

best bowing record: कानपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 14 विकेट लेने वाले जसुभाई पटेल का नाम इतिहास के पन्नों से कभी ओझल नहीं होगा. यह भारतीय क्रिकेट इतिहास के उन चुनिंदा 'शांत चमत्कारों' में से एक है, जिसने खेल की दिशा और दशा को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया Fri, 4 Sep 2026 17:09:44 +0530

  Videos
See all

Krishna Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए ऐसे तैयार की जाती है ये खास माला |Mathura News #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-04T12:11:29+00:00

Swatantra Bhardwaj detained: हिरासत में स्वतंत्र भारद्वाज | CJP | Nishu Azad | Delhi Police | N18V #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-04T12:10:40+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers