नेपालगंज रोड-बहराइच रेल खंड का लोकार्पण, नेपाल बाढ़ त्रासदी के कारण सादगी से हुआ कार्यक्रम
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई नेताओं और अधिकारियों के साथ मिलकर सोमवार को आमान परिवर्तन के बाद नेपालगंज रोड-बहराइच रेल खंड का लोकार्पण किया। पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही आई त्रासदी की वजह से सादे समारोह में उद्घाटन किया गया। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘नेपालगंज रोड-वाराणसी सिटी खंड पर बिना किसी सजावट और बिना किसी औपचारिक हरी झंडी दिखाए एक ट्रेन का उद्घाटन किया गया।
मुख्यमंत्री नेपालगंज रोड स्टेशन पर मौजूद थे, जबकि रेल मंत्री रेल भवन से ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए।’’ उन्होंने कहा कि आम तौर पर ट्रेन को फूलों से सजाया जाता है और उद्घाटन स्थल पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और कई अन्य तरह के जश्न मनाए जाते हैं। अधिकारी ने कहा, ‘‘हालांकि इस खंड पर आमान परिवर्तन बिहार और नेपाल के लोगों के लिए बहुत अहम है, लेकिन रेल मंत्रालय ने इसका जश्न न मनाने का फैसला किया है, क्योंकि नेपाल में हाल ही में आई अचानक बाढ़ से भारी तबाही हुई है और कई लोगों की जान गई है।’’ कार्यक्रम की शुरुआत बाढ़ पीड़ितों के लिए दो मिनट का मौन रखकर की गई। रेलमंत्री ने दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से लोगों को संबोधित करते हुए बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि भारत सरकार नेपाल में प्रभावित लोगों को राहत और सहायता पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि जिला, राज्य और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ-साथ भारत-नेपाल सीमावर्ती इलाकों के रेलवे अधिकारी भी मदद और सहयोग दे रहे हैं। वैष्णव ने कहा, ‘‘रेलवे लगातार उन बचाए गए लोगों की मदद कर रही है जो नेपाल सीमा के पास स्टेशनों पर पहुंच रहे हैं, ताकि वे अपनी मंजिल तक पहुंच सकें।’’ इस रेलखंड का निर्माण ब्रिटिश काल में मीटर-गेज के तौर पर किया गया था। इसे बड़ी लाइन में तब्दील करने की मांग लंबे समय से हो रही थी, ताकि इसे बड़े रेल नेटवर्क से जोड़ा जा सके और आस-पास के इलाकों के लोगों की सुविधा के लिए मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई जा सकें।
वैष्णव ने कहा कि इस खंड पर चार रेलगाड़ियां चलाई जाएंगी, जिनसे लाखों लोगों को फायदा होगा। अधिकारियों ने बताया कि इस खंड के उद्घाटन से पहले बहराइच तक का विद्युतीकृत बड़ी लाइन थी।
बूटा सिंह अपमान मामला: एनसीएससी ने आरोपियों की गिरफ्तारी और 5 दिन में रिपोर्ट मांगी
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने पिछले साल पंजाब के तरनतारन जिले में चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री दिवंगत बूटा सिंह के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी मामले में आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के लिए अधिकारियों को कदम उठाने की सोमवार को सिफारिश की। आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाणा की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की वस्तु स्थिति रिपोर्ट पांच दिन के भीतर मांगी गई। आयोग ने जांच को शीघ्र पूरा करने और बिना किसी अनावश्यक देरी के सक्षम अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने की भी सिफारिश की।
आयोग के अनुसार, यह सुनवाई कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग द्वारा तरनतारन में चुनाव प्रचार के दौरान बूटा सिंह के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी किए जाने से संबंधित थी। वडिंग के खिलाफ पिछले साल नवंबर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (धर्म, नस्ल आदि के आधार पर वैमनस्य को बढ़ावा देना) के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह प्राथमिकी बूटा सिंह के बेटे सरबजोत सिंह सिद्धू की शिकायत पर कपूरथला जिले के साइबर अपराध थाने में दर्ज की गई थी।
सुनवाई के दौरान, पंजाब पुलिस के अधिकारी डीएसपी हरप्रीत सिंह और डीएसपी गुलजार सिंह (ईओ और साइबर अपराध) प्रतिवादी अधिकारियों की ओर से पेश हुए, जबकि याचिकाकर्ता सरबजोत सिंह भी मौजूद थे। आयोग ने कहा कि पक्षकारों को सुनने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर गौर करने के बाद उसने पिछली सुनवाई में की गई स्पष्ट सिफारिशों के बावजूद जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) सौंपने में हुई देरी को लेकर गंभीर चिंता जताई। आयोग ने पांच मई को हुई पिछली सुनवाई में नियमों के अनुसार तय समय सीमा में जांच पूरी करने की सिफारिश की थी।
आयोग ने सरबजोत सिंह की उस शिकायत का भी संज्ञान लिया था, जिसमें उन्होंने कथित आरोपियों से धमकी भरे फोन आने की बात कही थी। इसके बाद आयोग ने उन्हें और उनके आश्रितों को एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 15ए के तहत जरूरी सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। आयोग ने 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन सोमवार की सुनवाई में पाया कि उसके पिछले निर्देशों पर आवश्यक रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है।
आयोग ने कहा, मामले में लगातार हो रही देरी पर गंभीर रुख अपनाते हुए आयोग ने आज सिफारिश की कि संबंधित अधिकारी मामले में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कानून के अनुसार तुरंत आवश्यक कदम उठाएं और पांच दिनों के भीतर इस कार्रवाई की वस्तु स्थिति रिपोर्ट आयोग को सौंपें। आयोग ने यह भी सिफारिश की कि सक्षम प्राधिकारी जांच और गिरफ्तारी में हुई देरी के लिए जिम्मेदारी तय करे। आयोग ने कहा, ‘‘यदि संबंधित जांच अधिकारियों की ओर से जानबूझकर कर्तव्य की उपेक्षा पाई जाती है, तो कानून के अनुसार विभागीय कार्रवाई की जाए, जिसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 4 के तहत कार्रवाई पर विचार भी शामिल है।
आयोग ने अपनी सिफारिशों पर 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने याचिकाकर्ता की सुरक्षा के मुद्दे को भी विशेष गंभीरता से लिया और सरबजोत सिंह को कथित रूप से लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए अधिनियम की धारा 15ए के तहत दिल्ली और पंजाब दोनों जगह उन्हें तथा उनके आश्रितों को तत्काल और पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की सिफारिश की। आयोग ने दोहराया कि पीड़ितों, शिकायतकर्ताओं, गवाहों और उनके आश्रितों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण वैधानिक संरक्षण है और संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि याचिकाकर्ता बिना किसी डर, दबाव या धमकी के मामले को आगे बढ़ा सकें।
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