सोमवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की। यह आलोचना वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ के 7.8 प्रतिशत रहने की घोषणा के बाद की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस आर्थिक विस्तार से युवाओं के लिए रोज़गार और अवसर पैदा हो रहे हैं। प्रधानमंत्री के 'X' (ट्विटर) पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ा ने कहा कि 7.8% की एक तिमाही की ग्रोथ कोई 'आर्थिक बहार' नहीं है। उन्होंने आर्थिक प्रगति के सरकारी दावे को चुनौती दी और बेरोज़गारी, परीक्षा के पेपर लीक होने और बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था जैसी लगातार बनी हुई समस्याओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश अभी पूरी तरह से खिला नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि GDP की ग्रोथ का मतलब हमेशा नौकरियों, वेतन या मौकों में सुधार नहीं होता। खेड़ा ने कहा कि GDP राष्ट्रीय उत्पादन को मापती है – न कि नौकरियों, वेतन या मौकों को। अगर यह इनमें से किसी चीज़ को मापती, तो भारत के युवाओं का भविष्य इतना निराशाजनक नहीं दिखता।" खेड़ा ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि भले ही प्रधानमंत्री सुर्खियों में बने रहने में माहिर हों, लेकिन भारत के युवाओं के लिए मुख्य सवाल यही है: "नौकरियां कहां हैं?
इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन में रुकावट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों के बावजूद 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ को एक बड़ी उपलब्धि बताया था। मोदी ने इस ग्रोथ का श्रेय हमारे लोगों की सामूहिक ताकत को दिया और मुश्किल हालात के बावजूद भारत की मज़बूती पर ज़ोर दिया। उन्होंने यह भी कहा, "निराशावादी लोग गलत साबित हुए और भारत ने फिर से तरक्की की... एक बार फिर!"
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