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पूर्वोत्तर राज्यों के साथ सीमा विवाद में असम के 200 से अधिक लोगों ने गंवाई जान

त्रिदीप लहकर गुवाहाटी, 31 अगस्त करीब चार दशकों में सीमा विवाद को लेकर पड़ोसी राज्यों के निवासियों के साथ हुई झड़पों में असम के 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम का असम के साथ सीमा विवाद है।

इन राज्यों को 1960 और 1970 के दशक में असम से अलग करके बनाया गया था। राज्य के सीमा सुरक्षा एवं विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सीमा निर्धारण को लेकर लंबे समय से विवादों के कारण असम की अंतरराज्यीय सीमाओं पर नियमित अंतराल पर झड़पें होती रही हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवादित क्षेत्रों में केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई आर्थिक गतिविधियां, जिनसे दोनों पक्षों के लोगों को लाभ मिले, लोगों की तीखी भावनाओं को शांत करने और संभावित झड़पों को रोकने में मदद कर सकती हैं।

असम पुलिस के सीमा संगठन के दस्तावेजों का हवाला देते हुए अधिकारी ने बताया कि वर्ष 1989 से अब तक मेघालय, नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश से लगी अंतरराज्यीय सीमाओं पर हुई झड़पों में असम के कुल 202 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने पहचान जाहिर नहीं करने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘असम के वेस्ट कार्बी आंगलोंग, कार्बी आंगलोंग, गोलाघाट, कछार, जोरहाट, बिस्वनाथ, धेमाजी और कामरूप जिलों में लोगों की मौत हुई है।’’ असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीमा विवाद को लेकर हुई झड़पों में सबसे अधिक 142 लोगों की मौत गोलाघाट में हुई। इसके बाद कछार में 34 और बिस्वनाथ में 15 लोगों की जान गई।

सीमा पर हालिया झड़पों में 10 अगस्त को धेमाजी जिले में अंतरराज्यीय सीमा के पास भूमि अतिक्रमण को लेकर अरुणाचल प्रदेश के कथित उपद्रवियों की ओर से की गई गोलीबारी में असम के कम से कम 12 लोग घायल हो गए। असम सरकार ने 29 जुलाई को राज्य विधानसभा को बताया कि उसकी करीब 83,000 हेक्टेयर जमीन पर वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मेघालय और मिजोरम का कब्जा है। असम के पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक पल्लब भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि ज्यादातर विवाद संबंधित राज्यों के लोगों को विश्वास में लिए बिना सीमाओं के गलत तरीके से निर्धारण किए जाने के कारण पैदा हुए।

उन्होंने कहा, ‘‘तेलंगाना को 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग करके बनाया गया, लेकिन दोनों राज्यों के बीच इस तरह का कोई सीमा विवाद नहीं है। इसकी वजह यह है कि लोगों को सीमा के बारे में जानकारी दी गई थी और वे इससे सहमत थे। पूर्वोत्तर में राज्यों के गठन के समय इस तरह की पहल नहीं की गई थी।’’ ऐसी जानलेवा झड़पों से बचने के लिए आगे का रास्ता पूछे जाने पर भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘आर्थिक विकास हमेशा मदद करता है।

ऐसे विवादित क्षेत्रों में दोनों पक्षों के स्थानीय लोगों की भागीदारी के साथ केंद्र सरकार के नेतृत्व में आर्थिक गतिविधियां शुरू की जानी चाहिए।

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West Bengal Government का बड़ा फैसला, अब हफ्ते में दो बार लगेगा Janata Darbar, शिकायतों का होगा Instant Solution

पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी दफ्तरों में हफ़्ते में दो बार 'जनता दरबार' लगाकर लोगों की शिकायतों के समाधान के सिस्टम को और मज़बूत करने का फ़ैसला किया है। इस नए सिस्टम के तहत, ज़मीनी स्तर के अधिकारियों को हर मंगलवार और गुरुवार को नागरिकों से आमने-सामने मिलकर उनकी शिकायतें सुननी होंगी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने लोगों की शिकायतों को सीधे सुनने के लिए 'आपणार सरकार आपणार पाशे' (आपकी सरकार, आपके साथ) पहल शुरू की थी। इस प्रोग्राम के तहत, वह हर हफ़्ते खुद 'जनता दरबार' लगाते हैं, नागरिकों से बातचीत करते हैं और उनकी समस्याओं व शिकायतों को सुनते हैं। शिकायतों को दर्ज करने और उन पर हुई कार्रवाई को ट्रैक करने के लिए एक ऑनलाइन सिस्टम भी शुरू किया गया है। नबन्ना प्रशासन ने अब इस पहल को और मज़बूत करने और राज्य भर के लोगों के लिए सरकारी अधिकारियों तक सीधे पहुँचना आसान बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं।

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हर मंगलवार और गुरुवार को लगेगा जनता दरबार

नई व्यवस्था के तहत, हर मंगलवार और गुरुवार को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक संबंधित अधिकारियों के दफ्तरों में 'जनता दरबार' लगेंगे। इस व्यवस्था को जल्द से जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारियों, नगर आयुक्तों, अनुमंडल अधिकारियों, प्रखंड विकास अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और अन्य फील्ड-लेवल अधिकारियों से कहा गया है कि वे तय समय पर मौजूद रहें। इस दौरान कोई बैठक या सरकारी कार्यक्रम तय नहीं किया जाएगा ताकि अधिकारी आम लोगों के लिए उपलब्ध रह सकें।

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अधिकारियों की जानकारी दफ्तरों के बाहर लगाई जाएगी

यह पक्का करने के लिए कि नागरिक आसानी से संबंधित अधिकारियों तक पहुँच सकें, 'जनता दरबार' के दिन और समय, अधिकारियों के मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जैसी जानकारी सरकारी दफ्तरों के बाहर और आधिकारिक वेबसाइटों पर साफ-साफ दिखाई जाएगी। नागरिकों की शिकायतें सुनने के बाद, अधिकारियों को हर शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी 'आपणार सरकार आपणार पाशे' पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग करेगा ताकि यह पक्का किया जा सके कि शिकायतों पर कार्रवाई हो और शिकायत निवारण व्यवस्था जवाबदेह बनी रहे।

डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न कर पाने वाले लोगों के लिए सीधी पहुँच

इस बेहतर सिस्टम से उन लोगों को खास तौर पर फायदा होने की उम्मीद है जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या डिजिटल ऐप का इस्तेमाल करने में सहज नहीं हैं। शिकायत दर्ज करने के लिए सिर्फ़ डिजिटल सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय, ऐसे नागरिकों के पास अब सरकारी दफ्तरों में जाकर अधिकारियों से आमने-सामने मिलकर अपनी समस्याएँ बताने का विकल्प होगा। इस कदम का मकसद प्रशासन को ज़मीनी स्तर पर लोगों के करीब लाना और यह पक्का करना है कि नागरिकों के पास सरकारी सेवाओं और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मुद्दों को उठाने का सीधा ज़रिया हो।

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