Supreme Court ने Goa नाइटक्लब अग्निकांड के तीनों आरोपी मालिकों को 2 हफ्ते में सरेंडर करने का दिया निर्देश
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें गोवा नाइटक्लब अग्निकांड के मामले में तीन आरोपियों को दी गयी जमानत रद्द कर दी गयी थी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने उच्च न्यायालय के 18 अगस्त के आदेश को बरकरार रखा और सौरव लूथरा, गौरव लूथरा तथा अजय गुप्ता की ओर से दायर कई याचिकाओं को खारिज कर दिया। ये तीनों उत्तरी गोवा के अरपोरा इलाके में स्थित ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब के मालिक हैं, जहां पिछले साल छह दिसंबर को लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत हो गयी थी और 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
शीर्ष न्यायालय ने तीनों को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया और निचली अदालत को भी आरोप तय करने की प्रक्रिया में तेजी लाकर मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का निर्देश दिया। लूथरा बंधुओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक एम. सिंघवी और सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि यह मामला जानबूझकर किए गए अपराध का नहीं बल्कि कथित लापरवाही का मामला है। दवे ने कहा कि लूथरा बंधुओं की ओर से ऐसा कोई कृत्य नहीं किया गया, जिसके कारण लोगों की मौत हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘भादंसं की धारा 304 के भाग-2 को इस मामले में बिल्कुल भी लागू नहीं किया जा सकता। मेरी ओर से ऐसा कोई कृत्य नहीं है, जिसके कारण मौत हुई हो। अगर अभियोजन पक्ष इस मामले में आरोप साबित करना चाहता है, तो ज्यादा से ज्यादा इसे भादंसं की धारा 304ए के तहत मामला माना जा सकता है, जो लापरवाही के कारण किसी व्यक्ति की मौत होने से संबंधित है।’’ न्यायमूर्ति दत्ता ने सिंघवी से पूछा कि रेस्तरां में कितने लोगों की जान गई थी।
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वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि मृतकों की संख्या 25 थी, लेकिन उच्च न्यायालय के चुनौती दिए गए फैसले में दो बुनियादी गलतियां हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि मामले में कई अन्य सह-आरोपियों को जमानत दी जा चुकी है। गुप्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि कारोबार में गुप्ता की केवल 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है और घटना से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
गोवा सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू और स्थायी अधिवक्ता सुरजेंदु शंकर दास ने तीनों की याचिकाओं का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने तीनों को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। याचिकाएं खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि आज से दो सप्ताह का समय दिया जाता है जिसके भीतर तीनों को आत्मसमर्पण करना होगा।
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आग की घटना के तुरंत बाद लूथरा बंधु थाईलैंड के फुकेत चले गए थे। इसके बाद उनके खिलाफ इंटरपोल का ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। दोनों को 11 दिसंबर को भारतीय मिशन के हस्तक्षेप के बाद थाईलैंड के अधिकारियों ने फुकेत में हिरासत में ले लिया था।
इस मामले में भारतीय मिशन लगातार थाईलैंड सरकार के संपर्क में था। इसके बाद दोनों को भारत लाए जाने पर 16 दिसंबर, 2025 को दिल्ली की एक अदालत ने गोवा पुलिस को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दे दी थी। बंबई उच्च न्यायालय ने 18 अगस्त को तीनों की जमानत रद्द कर दी थी।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि निचली अदालत ने जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री पर उचित तरीके से विचार नहीं किया और यह मानकर गलती की कि आरोपियों का अपराध हत्या या डकैती जैसे जघन्य अपराध जितना गंभीर नहीं था। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से संकेत मिलता है कि रेस्तरां जरूरी लाइसेंस के बिना चलाया जा रहा था और उसका ढांचा भी अनधिकृत था। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों और उनके साझेदारों को कथित तौर पर इस बात की जानकारी थी कि पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के बिना परिसर के अंदर आग के साथ करतब दिखाना जोखिम भरा था।
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लूथरा बंधु और अजय गुप्ता ‘एम/एस बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी अरपोरा एलएलपी’ में साझेदार थे, जो इस नाइटक्लब का संचालन करती थी। निचली अदालत ने इस साल अप्रैल में तीनों को जमानत दे दी थी। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में तीनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर सत्र अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।
गोवा सरकार ने आरोपियों को जमानत देने वाले सत्र अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
Nandigram Bypoll में जीत का नया रिकॉर्ड बनाएं, विकास योजनाओं के मंच से बोले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम में अपनी सरकार के कामों का जिक्र करते हुए लोगों से अपील की कि वे आने वाले उपचुनाव में उनकी पिछली जीत के अंतर को और बढ़ाने में मदद करें। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय हुई बरसों की अनदेखी को दूर कर रही है। नंदीग्राम में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारी ने बार-बार उस इलाके के साथ अपने राजनीतिक जुड़ाव का जिक्र किया और जमीन अधिग्रहण-विरोधी आंदोलन को याद किया, जिसने इस इलाके को पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया था।
इस कार्यक्रम के दौरान सड़कें, पुल और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी कई ग्रामीण विकास एवं अवसंरचना परियोजनाएं शुरू की गईं। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से अपील की कि वे विधानसभा सीट से मिले उनके पिछले चुनावी जनादेश के 82,000 मतों के अंतर को पार करने का प्रयास करें। इस तरह उन्होंने विकास कार्यक्रम को और मजबूत राजनीतिक समर्थन हासिल करने की अपील में बदल दिया।
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अधिकारी ने कहा, “नंदीग्राम प्राथमिकता में है। आपने मुझे चुना था और मैं लगभग साढ़े तीन महीने से मुख्यमंत्री के तौर पर सेवा कर रहा हूं। इस कम समय में हमने जो काम किया है, वह बस शुरुआत है।” उन्होंने कहा, “पिछली बार आपने मुझे 82,000 मतों से जिताया था।
क्या आपको याद है? इस बार उस रिकॉर्ड को तोड़ना है।” उन्होंने बार-बार भीड़ से वादा करने को कहा कि वे नया रिकॉर्ड बनाने में उनकी मदद करेंगे। अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत हासिल की थी हालांकि बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट खाली कर दी थी।
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निर्वाचन आयोग ने अभी तक उपचुनाव की तारीख की घोषणा नहीं की है। नंदीग्राम अधिकारी की राजनीतिक पहचान का मुख्य केंद्र रहा है। उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया और 2026 के चुनावों में भी अपनी सीट बरकरार रखी।
साथ ही दक्षिण कोलकाता में बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में भी उन्हें हराया। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के साथ, खासकर नंदीग्राम के विकास और लंबित परियोजनाओं को लेकर, एक बड़ा राजनीतिक अंतर भी दिखाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली मुख्यमंत्री ने नंदीग्राम सीट हारने के बाद वहां की रेलवे परियोजना को रोक दिया था।
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उनका कहना था कि इस परियोजना के लिए सिर्फ छह एकड़ जमीन की जरूरत थी और उनकी सरकार ने पहले ही लगभग साढ़े तीन एकड़ जमीन रेलवे को सौंप दी है। उन्होंने प्रस्तावित रेल संपर्क का जिक्र करते हुए कहा, “हम बाकी जमीन भी देंगे। अगले साल मार्च तक, मैं नंदीग्राम रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ूंगा।” अधिकारी ने इस मौके का इस्तेमाल नंदीग्राम आंदोलन और उससे जुड़ी हिंसा के इतिहास को याद करने के लिए भी किया।
जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हुए आंदोलन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस इलाके का इतिहास ब्रिटिश शासन और उसके बाद हुए राजनीतिक दमन, दोनों का विरोध करने का रहा है। ज़मीन अधिग्रहण के लिये 2007 का नंदीग्राम आंदोलन एक प्रस्तावित केमिकल हब के खिलाफ किसानों का जबरदस्त विरोध था जिसमें पुलिस की गोलीबारी से 14 लोगों की मौत हुई और आखिरकार राज्य की वाम मोर्चा सरकार गिर गई।
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