Explainer: गंगा-यमुना उफनीं, चित्रकूट डूबा, बनारस में बढ़ा पानी..., UP में क्यों मंडरा रहा बाढ़ का खतरा? जानें अगले 48 घंटे का IMD अलर्ट
Uttar Pradesh Flood: उत्तर प्रदेश में अगस्त के आखिरी दिनों में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है. मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी यूपी के कई हिस्सों में तेज बारिश के साथ नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. बता दें प्रयागराज में गंगा और यमुना में पानी बढ़ा है, जिससे प्रशासन अलर्ट पर है. वहीं, वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर तेजी से ऊपर गया है. चित्रकूट और आसपास के इलाकों में तो बारिश और नदी के उफान से आम जनजीवन प्रभावित है.
मौसम विभाग के मुताबिक बारिश का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में 31 अगस्त की शाम और 1 सितंबर को कहीं-कहीं तेज बारिश की चेतावनी है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 48 घंटे यूपी के कई इलाकों के लिए महत्वपूर्ण हैं. बारिश के बाद कई जगह जलभराव हो गया है.
#WATCH | Prayagraj, Uttar Pradesh: The flood situation intensifies as the water levels of the Ganga and Yamuna rivers continue to rise rapidly due to persistent rainfall in the region. pic.twitter.com/CQytQlUvGo
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) August 31, 2026
यूपी में अचानक क्यों बिगड़ गया मौसम?
IMD के मुताबिक उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में और उत्तरी ओडिशा के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. यह सिस्टम अभी आगे भी बना रहेगा. इसके साथ ही उत्तरी उत्तर प्रदेश से इस सिस्टम के चक्रवाती सर्कुलेशन के चलते वायुमंडलीय स्तरों पर एक ट्रफ बनी हुई है. यही हालिया मौसम का कारण है. इससे मौसम प्रणाली में नमी है और इसके प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं. यही वजह है कि पूर्वी यूपी में नदियां उफान पर हैं.
क्या सिर्फ बारिश से बाढ़ का खतरा बढ़ा है?
नहीं, ऐसा नहीं है नदियों में बाढ़ का खतरा केवल बारिश से ही नहीं है. बारिश के अलावा ऊपरी क्षेत्रों से आने वाला पानी, नदियों का बढ़ता प्रवाह और पहले से ऊंचा जलस्तर भी हालत गंभीर बना रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने से संगम क्षेत्र और निचले इलाकों में पानी पहुंचा है. बड़े हनुमान मंदिर परिसर में भी गंगा का पानी प्रवेश कर चुका है और प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है.
प्रयागराज में क्या स्थिति है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. इसके अलावा संगम क्षेत्र और घाटों के आसपास पानी बढ़ने से तटीय इलाकों पर दबाव बढ़ा है. IMD के 31 अगस्त के बुलेटिन के मुताबिक प्रयागराज के कोरांव में पिछले 24 घंटे में 13 सेंटीमीटर बारिश हुई है.
#WATCH | Prayagraj, Uttar Pradesh: Floodwaters have risen onto the Jhunsi-Jaunpur road. Several villages are at risk of being cut off. pic.twitter.com/m0enZTzGIK
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) August 30, 2026
वाराणसी में कितनी तेजी से बढ़ा गंगा का पानी?
वाराणसी में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ाई है. मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक करीब 30 घंटे में गंगा का जलस्तर 1.26 मीटर से ज्यादा बढ़ा है और यह चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गया है. बता दें इसका असर घाटों और नदी किनारे रहने वाले लोगों पर पड़ेगा. वाराणसी में इससे पहले भी बढ़ते जलस्तर के कारण नाव संचालन पर रोक लगाई जा चुकी है.
चित्रकूट में क्यों बढ़ी परेशानी?
जानकारी के मुताबिक चित्रकूट में भी भारी बारिश और मंदाकिनी नदी के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ जैसे हालात पैदा किए हैं. ताजा रिपोर्टों के मुताबिक निचले इलाकों में पानी भरने से राहत और बचाव अभियान चलाना पड़ा है तथा बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.
VIDEO | Prayagraj, Uttar Pradesh: Water levels rise sharply in Yamuna after days of torrential rain. Waters breach banks, inundate ghats and enter riverside localities.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 31, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/d8jp61yd2p) pic.twitter.com/DK0D8TUAa7
अगले 48 घंटे में क्या होगा?
IMD के मुताबिक 31 अगस्त और 1 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश की संभावना जताई जा रही है. दोनों दिनों में आंधी-तूफान और बिजली गिरने की आशंका भी बनी हुई है. 2 से 6 सितंबर तक पूर्वी यूपी में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है.
क्या यूपी के दूसरे हिस्सों में भी बारिश होगी?
मौसम विभाग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 31 अगस्त से 6 सितंबर के दौरान बारिश की संभावना जताई है. प्रयागराज, वाराणसी, चित्रकूट, गाजीपुर और आसपास के नदी किनारे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए नदी के जलस्तर और स्थानीय प्रशासन के अलर्ट पर नजर रखने की सलाह दी गई है.
#WATCH | Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath conducted an aerial survey of the flood-affected areas in Ballia pic.twitter.com/nft9Bi74aA
— ANI (@ANI) August 29, 2026
FAQ
सवाल: यूपी में बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ रहा है?
जवाब: लगातार बारिश, नदियों के बढ़ते जलस्तर और बंगाल की खाड़ी से जुड़ी मौसम प्रणाली के कारण पूर्वी यूपी में बाढ़ का खतरा बढ़ा है.
सवाल: अगले 48 घंटे यूपी के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
जवाब: IMD ने 31 अगस्त और 1 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है.
सवाल: क्या 1 सितंबर के बाद बारिश खत्म हो जाएगी?
जवाब: नहीं, IMD के मुताबिक 2 से 6 सितंबर तक भी पूर्वी यूपी में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है.
सवाल: प्रयागराज में कौन सी नदियां उफान पर हैं?
जवाब: गंगा और यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है और संगम तथा निचले इलाकों में इसका असर दिखाई दे रहा है.
सवाल: वाराणसी में गंगा की स्थिति क्या है?
जवाब: ताजा रिपोर्ट के अनुसार करीब 30 घंटे में गंगा का जलस्तर 1.26 मीटर से ज्यादा बढ़ा और यह चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गया.
सवाल: क्या सिर्फ बारिश ही नदियों का जलस्तर बढ़ाती है?
जवाब: नहीं. स्थानीय बारिश के अलावा ऊपरी क्षेत्रों से आने वाला पानी, नदी का प्रवाह और पहले से मौजूद जलस्तर भी बाढ़ के खतरे को प्रभावित करते हैं.
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सरकार के एनएम-आईसीपीएस मिशन से साइबर-फिजिकल सिस्टम नवाचार को मिली रफ्तार, 2.46 लाख से अधिक पेशेवरों को मिला प्रशिक्षण
नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार का राष्ट्रीय अंतरविषयी साइबर-फिजिकल सिस्टम मिशन (एनएम-आईसीपीएस) देश में उभरती प्रौद्योगिकियों के विकास, नवाचार और कौशल निर्माण का प्रमुख आधार बनकर उभरा है। एक आधिकारिक फैक्टशीट में सोमवार को कहा गया कि इस मिशन ने अब तक 1,146 प्रौद्योगिकियों के विकास को सक्षम बनाया है और कृषि, स्वास्थ्य सेवा, खनन, साइबर सुरक्षा, उन्नत संचार तथा पोजिशनिंग जैसे क्षेत्रों में 1,329 प्रौद्योगिकी उत्पादों के विकास में योगदान दिया है।
फैक्टशीट के अनुसार, इस मिशन के तहत कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें अब तक 2.46 लाख से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। एनएम-आईसीपीएस, टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (टीआईएच) और ट्रांसलेशनल रिसर्च पार्क (टीटीआरपी) के माध्यम से प्रौद्योगिकी, प्रतिभा और उद्यमिता को एकीकृत करते हुए एक व्यापक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है। इसके साथ ही मिशन ने बौद्धिक संपदा के निर्माण और लाइसेंसिंग को भी बढ़ावा दिया है।
फैक्टशीट में कहा गया है कि मानव संसाधन विकास और कौशल उन्नयन के क्षेत्र में चाणक्य फेलोशिप कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जो साइबर-फिजिकल सिस्टम से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों के समाधान के लिए परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इस योजना के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल शोधार्थियों को अब तक 5,824 फेलोशिप प्रदान की जा चुकी हैं।
मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य अनुसंधान-आधारित नवाचारों को व्यावसायिक स्तर तक पहुंचाना भी है। इसी दिशा में एनएम-आईसीपीएस ने अब तक 1,136 स्टार्टअप और स्पिन-ऑफ कंपनियों को प्रोत्साहित और इनक्यूबेट किया है। इन पहलों के माध्यम से 24,000 से अधिक रोजगार सृजन हुए हैं।
सरकार ने मिशन के तहत देशभर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब स्थापित किए हैं। सेक्शन-8 कंपनियों के रूप में स्थापित ये हब नई तकनीकों के विकास, शोध को उत्पादों में बदलने और तकनीक-आधारित स्टार्टअप को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं।
फैक्टशीट के अनुसार, ये टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब चार प्रमुख क्षेत्रों पर काम करते हैं, जिनमें प्रौद्योगिकी विकास, मानव संसाधन एवं कौशल विकास, नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप संवर्धन, तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं।
एनएम-आईसीपीएस देश में साइबर-फिजिकल सिस्टम-आधारित अनुसंधान, नवाचार और अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा उपलब्ध कराता है।
यह मिशन शिक्षा जगत, उद्योग, सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को एक साझा मंच पर लाता है, ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान को राष्ट्रीय आवश्यकताओं, औद्योगिक क्षमताओं और उभरते बाजार अवसरों से जोड़ा जा सके।
बयान में कहा गया है कि यह मिशन अनुसंधान एवं विकास से लेकर उत्पाद निर्माण और स्टार्टअप स्थापना तक पूरे नवाचार चक्र को कवर करता है। सरकार का मानना है कि इससे भारत को साइबर-फिजिकल सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्वचालन और अन्य उभरती तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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