मुलेठी खाने के बड़े फायदे: गले की खराश से लेकर पाचन तक, इस छोटी-सी जड़ी-बूटी में हैं कमाल के गुण
Mulethi Health Benefits: गले में खराश, खांसी या आवाज बैठने पर आपने अक्सर मुलेठी का नाम सुना होगा। स्वाद में हल्की मीठी और आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल की जाने वाली मुलेठी सिर्फ गले को आराम देने के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि इसमें मौजूद प्राकृतिक यौगिक शरीर के लिए कई तरह से उपयोगी माने जाते हैं। इसे चाय, काढ़े या छोटी मात्रा में सीधे चबाकर भी लिया जाता है। हालांकि, इसका सेवन सही मात्रा और सावधानी के साथ करना जरूरी है।
मुलेठी की जड़ में मौजूद यौगिक इसके खास स्वाद और कई जैविक प्रभावों के लिए जिम्मेदार होते हैं। कुछ शोधों में मुलेठी के एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों का भी अध्ययन किया गया है। ऐसे में रोजमर्रा की डाइट में इसे शामिल करने से पहले इसके फायदे के साथ यह जानना भी जरूरी है कि किन लोगों को इससे दूरी रखनी चाहिए।
मुलेठी सेवन के बड़े फायदे
गले की खराश में मिल सकती है राहत
मुलेठी का सबसे लोकप्रिय इस्तेमाल गले से जुड़ी परेशानियों में किया जाता है। इसकी जड़ को चबाने या मुलेठी की हल्की चाय पीने से गले में आराम महसूस हो सकता है। इसमें मौजूद कुछ यौगिक सूजन और जलन को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, लगातार रहने वाली खराश, तेज दर्द या संक्रमण की स्थिति में केवल मुलेठी पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
खांसी में उपयोगी हो सकती है
मुलेठी पारंपरिक रूप से खांसी और श्वसन संबंधी परेशानी में इस्तेमाल होती रही है। इसका स्वाद मीठा होने के साथ यह गले को शांत करने में मदद कर सकती है। विशेष रूप से सूखी खांसी में मुलेठी का सेवन कुछ लोगों को आराम दे सकता है। लेकिन लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी का कारण जानना जरूरी है और चिकित्सकीय उपचार को मुलेठी से बदलना नहीं चाहिए।
पाचन के लिए फायदेमंद
मुलेठी का इस्तेमाल पाचन तंत्र से जुड़ी कुछ समस्याओं में भी किया जाता है। यह पेट की जलन और अपच जैसे लक्षणों में राहत देने में मदद कर सकती है। कुछ अध्ययनों में मुलेठी के पेट की अंदरूनी परत पर संभावित सुरक्षात्मक प्रभावों का अध्ययन किया गया है। फिर भी एसिडिटी या पेट दर्द बार-बार हो रहा है तो इसके पीछे किसी अन्य समस्या की जांच जरूरी है।
सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में मदद
मुलेठी में ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गतिविधियों का अध्ययन किया गया है। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से जुड़े तंत्र पर प्रभाव डाल सकते हैं। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या सभी तरह की सूजन का समाधान नहीं माना जाना चाहिए।
मुंह और दांतों की देखभाल में इस्तेमाल
मुलेठी में मौजूद कुछ यौगिकों के संभावित एंटीमाइक्रोबियल प्रभावों पर भी शोध हुआ है। इसी वजह से पारंपरिक तौर पर इसे मुंह की स्वच्छता और दांतों की देखभाल से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, मुलेठी चबाना ब्रश और फ्लोराइड टूथपेस्ट का विकल्प नहीं है।
ज्यादा मुलेठी खाना पड़ सकता है भारी
मुलेठी का अधिक या लंबे समय तक सेवन नुकसानदायक हो सकता है। इसमें मौजूद ग्लाइसायरिज़िन शरीर में पोटैशियम कम और ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है। ज्यादा सेवन से सूजन, कमजोरी और दिल की धड़कन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। हाई ब्लड प्रेशर, किडनी या हृदय की बीमारी वाले लोगों तथा गर्भवती महिलाओं को मुलेठी लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। कुछ दवाओं के साथ भी इसका असर पड़ सकता है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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