Kitchen Storage Tips: अनाज के डिब्बे में नहीं पड़ेंगे कीड़े! बारिश के मौसम में अपनाएं ये 8 आसान स्टोरेज टिप्स
Kitchen Storage Tips: मॉनसून सीजन के दौरान घर में स्टोर किए अनाज और मसालों में छोटे कीड़े लगना आम परेशानी है। गर्मी और नमी के मौसम में अगर डिब्बे ठीक से बंद न हों या अनाज में थोड़ी भी नमी रह जाए, तो समस्या बढ़ सकती है। अगर आप भी बार-बार अनाज में कीड़े लगने से परेशान हैं, तो स्टोरेज के इन 8 आसान तरीकों को आजमा सकते हैं।
1. अनाज को कुछ देर धूप दिखाएं
अनाज को स्टोर करने से पहले अच्छी तरह जांच लें। जरूरत हो तो इसे साफ कपड़े या ट्रे में फैलाकर कुछ घंटों के लिए धूप में रखें। इसके बाद पूरी तरह ठंडा होने पर ही डिब्बे में भरें।
2. एयरटाइट डिब्बे में रखें
अनाज और मसालों को खुले डिब्बे या पतली पैकिंग में रखने के बजाय अच्छी तरह बंद होने वाले एयरटाइट कंटेनर में रखें। डिब्बे का ढक्कन ठीक से बंद होना जरूरी है, ताकि हवा और नमी अंदर न जा सके।
3. नीम के पत्तों का इस्तेमाल
अनाज को स्टोर करते समय सूखे नीम के पत्ते रखने का घरेलू तरीका लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें साफ और पूरी तरह सूखने के बाद अनाज के डिब्बे में रखा जा सकता है।
4. तेजपत्ता भी रख सकते हैं
चावल, दाल या दूसरे सूखे अनाज के कंटेनर में कुछ सूखे तेजपत्ते रखने का तरीका भी कई घरों में अपनाया जाता है। तेजपत्ते की खुशबू कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है, हालांकि इसे कीड़ों से बचाव की पक्की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
5. लहसुन की कलियां रखें
कुछ लोग अनाज के डिब्बे में सूखी लहसुन की कलियां रख सकते हैं। लहसुन की तेज गंध को कीड़ों को दूर रखने में मददगार माना जाता है। ध्यान रखें कि लहसुन में नमी न हो और वह पूरी तरह सूखा हो, वरना अनाज खराब हो सकता है।
6. मसालों के लिए लौंग का करें इस्तेमाल
मसालों के डिब्बे में कुछ लौंग रखने से उसकी तेज खुशबू बनी रहती है। इसे भी अनाज और मसालों को स्टोर करने के घरेलू तरीकों में शामिल किया जाता है।
7. नमी से बचाकर रखें
अनाज में कीड़े लगने की एक बड़ी वजह नमी भी हो सकती है। इसलिए डिब्बों को सिंक, गैस या ऐसी जगह से दूर रखें जहां पानी या भाप पहुंचती हो। अनाज निकालने के लिए हमेशा सूखे चम्मच का इस्तेमाल करें और गीले हाथों से इसे छूने से बचें।
8. छोटे कंटेनर इस्तेमाल करें
अगर घर में बहुत ज्यादा अनाज है तो पूरा सामान एक ही बड़े डिब्बे में रखने के बजाय छोटे-छोटे कंटेनर में बांटकर रख सकते हैं। इससे किसी एक डिब्बे में समस्या होने पर बाकी अनाज को बचाना आसान रहता है।
स्टोरेज से पहले इन बातों का रखें ध्यान
- अनाज को डिब्बे में भरने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच करें।
- अगर किसी पैकेट में पहले से कीड़े दिखाई दे रहे हैं, तो उसे बाकी सामान के साथ न मिलाएं।
- पुराने कंटेनर को खाली करके साफ करें और पूरी तरह सुखाने के बाद ही दोबारा इस्तेमाल करें।
सबसे जरूरी बात यह है कि अनाज को सूखा, साफ और अच्छी तरह बंद डिब्बे में रखें। सिर्फ नीम, लौंग या तेजपत्ता रखने के भरोसे न रहें, खासकर अगर अनाज में पहले से कीड़े दिखाई दे रहे हों।
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मुलेठी खाने के बड़े फायदे: गले की खराश से लेकर पाचन तक, इस छोटी-सी जड़ी-बूटी में हैं कमाल के गुण
Mulethi Health Benefits: गले में खराश, खांसी या आवाज बैठने पर आपने अक्सर मुलेठी का नाम सुना होगा। स्वाद में हल्की मीठी और आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल की जाने वाली मुलेठी सिर्फ गले को आराम देने के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि इसमें मौजूद प्राकृतिक यौगिक शरीर के लिए कई तरह से उपयोगी माने जाते हैं। इसे चाय, काढ़े या छोटी मात्रा में सीधे चबाकर भी लिया जाता है। हालांकि, इसका सेवन सही मात्रा और सावधानी के साथ करना जरूरी है।
मुलेठी की जड़ में मौजूद यौगिक इसके खास स्वाद और कई जैविक प्रभावों के लिए जिम्मेदार होते हैं। कुछ शोधों में मुलेठी के एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों का भी अध्ययन किया गया है। ऐसे में रोजमर्रा की डाइट में इसे शामिल करने से पहले इसके फायदे के साथ यह जानना भी जरूरी है कि किन लोगों को इससे दूरी रखनी चाहिए।
मुलेठी सेवन के बड़े फायदे
गले की खराश में मिल सकती है राहत
मुलेठी का सबसे लोकप्रिय इस्तेमाल गले से जुड़ी परेशानियों में किया जाता है। इसकी जड़ को चबाने या मुलेठी की हल्की चाय पीने से गले में आराम महसूस हो सकता है। इसमें मौजूद कुछ यौगिक सूजन और जलन को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, लगातार रहने वाली खराश, तेज दर्द या संक्रमण की स्थिति में केवल मुलेठी पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
खांसी में उपयोगी हो सकती है
मुलेठी पारंपरिक रूप से खांसी और श्वसन संबंधी परेशानी में इस्तेमाल होती रही है। इसका स्वाद मीठा होने के साथ यह गले को शांत करने में मदद कर सकती है। विशेष रूप से सूखी खांसी में मुलेठी का सेवन कुछ लोगों को आराम दे सकता है। लेकिन लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी का कारण जानना जरूरी है और चिकित्सकीय उपचार को मुलेठी से बदलना नहीं चाहिए।
पाचन के लिए फायदेमंद
मुलेठी का इस्तेमाल पाचन तंत्र से जुड़ी कुछ समस्याओं में भी किया जाता है। यह पेट की जलन और अपच जैसे लक्षणों में राहत देने में मदद कर सकती है। कुछ अध्ययनों में मुलेठी के पेट की अंदरूनी परत पर संभावित सुरक्षात्मक प्रभावों का अध्ययन किया गया है। फिर भी एसिडिटी या पेट दर्द बार-बार हो रहा है तो इसके पीछे किसी अन्य समस्या की जांच जरूरी है।
सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव में मदद
मुलेठी में ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गतिविधियों का अध्ययन किया गया है। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से जुड़े तंत्र पर प्रभाव डाल सकते हैं। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या सभी तरह की सूजन का समाधान नहीं माना जाना चाहिए।
मुंह और दांतों की देखभाल में इस्तेमाल
मुलेठी में मौजूद कुछ यौगिकों के संभावित एंटीमाइक्रोबियल प्रभावों पर भी शोध हुआ है। इसी वजह से पारंपरिक तौर पर इसे मुंह की स्वच्छता और दांतों की देखभाल से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, मुलेठी चबाना ब्रश और फ्लोराइड टूथपेस्ट का विकल्प नहीं है।
ज्यादा मुलेठी खाना पड़ सकता है भारी
मुलेठी का अधिक या लंबे समय तक सेवन नुकसानदायक हो सकता है। इसमें मौजूद ग्लाइसायरिज़िन शरीर में पोटैशियम कम और ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है। ज्यादा सेवन से सूजन, कमजोरी और दिल की धड़कन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। हाई ब्लड प्रेशर, किडनी या हृदय की बीमारी वाले लोगों तथा गर्भवती महिलाओं को मुलेठी लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। कुछ दवाओं के साथ भी इसका असर पड़ सकता है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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