महिला स्वयं सहायता समूहों को ₹5 लाख तक ब्याज फ्री लोन, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही उत्तराखंड की मातृशक्ति
Uttarakhand News: उत्तराखंड में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार काम कर रही है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके सपनों को नई उड़ान देने के लिए सरकार कई स्तरों पर प्रयास कर रही है. इसी क्रम में महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है. सरकार का मानना है कि इस पहल से महिलाएं स्वरोजगार और छोटे उद्योगों के साथ-साथ अन्य आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाकर अपने परिवार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगी.
मुख्यमंत्री धामी के अनुसार, महिलाओं को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना केवल उन्हें रोजगार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध परिवार की आर्थिक स्थिति और समाज के समग्र विकास से भी है. जब महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होती हैं तो परिवार की आय बढ़ती है और बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेहतर भविष्य के लिए भी नए अवसर पैदा होते हैं. यही वजह है कि सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है.
यह भी पढ़ें: राष्ट्रपति भवन पहुंचे देहरादून के जनजातीय छात्र, राष्ट्रपति से मुलाकात कर हुए अभिभूत
स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा
ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए कारोबार शुरू करने या मौजूदा काम को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है. महिलाएं इस राशि का इस्तेमाल अपनी जरूरत और रुचि के अनुसार अलग-अलग आर्थिक गतिविधियों में कर सकती हैं. इससे छोटे स्तर पर शुरू होने वाले काम को आगे बढ़ाने, उत्पादन बढ़ाने और बाजार तक पहुंच बनाने में सहायता मिल सकती है.
उत्तराखंड में बड़ी संख्या में महिलाएं स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक हुनर से जुड़ी गतिविधियों में काम करती हैं. स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ऐसी महिलाओं को एक साथ आकर काम करने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर मिलता है. आर्थिक सहायता मिलने से इन समूहों को अपने काम को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मिलेगी मजबूती
महिला स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों का असर केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है. जब गांव की महिलाएं स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार से जुड़ती हैं तो रोजगार के अवसर उनके घर और गांव के आसपास ही पैदा होते हैं. इससे महिलाओं को काम के लिए दूसरे शहरों की ओर जाने की जरूरत कम हो सकती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है.
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में महिलाओं की भूमिका पहले से ही बेहद महत्वपूर्ण रही है. खेती, पशुपालन, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों से लेकर परिवार की जिम्मेदारियों तक महिलाएं अहम योगदान देती हैं. ऐसे में उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने वाली योजनाएं राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.
यह भी पढ़ें: Uttarakhand: साढ़े 6 लाख से अधिक महिलाएं उठाएंगी निशुल्क रोडवेज बस यात्रा का लाभ
आत्मनिर्भर मातृशक्ति पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “सशक्त और आत्मनिर्भर मातृशक्ति ही विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव है.” सरकार की सोच है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर प्रदेश के विकास को और गति दी जा सकती है. ब्याज मुक्त ऋण जैसी पहल महिलाओं को आर्थिक फैसले लेने और अपने लिए नए अवसर तैयार करने में मदद कर सकती है.
महिला स्वयं सहायता समूहों के मजबूत होने से प्रदेश में छोटे और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इसके साथ ही महिलाओं के भीतर उद्यमिता की भावना को प्रोत्साहन मिलेगा और वे अपनी मेहनत तथा हुनर को आय के साधन में बदल सकेंगी.
विकास की राह में महिलाओं की बड़ी भूमिका
उत्तराखंड के विकास में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. महिला स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता देकर सरकार उन्हें केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति में भागीदार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
₹5 लाख तक के ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा से महिलाओं को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिल सकता है. इससे स्वरोजगार, लघु उद्योग और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की संभावना है. सरकार का संदेश स्पष्ट है कि उत्तराखंड के विकास की यात्रा में प्रदेश की मातृशक्ति को आगे की कतार में खड़ा किया जाएगा.
एफएसएसएआई की कार्रवाई के बाद जोमैटो ने एनालॉग डेयरी उत्पादों से बनी डिश की बिक्री पर रोक लगाई
नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने सोमवार को कहा कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड रेस्टोरेंट द्वारा एनालॉग डेयरी उत्पादों से बनी डिश बेचने के मामले में जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई है और ऐसे सभी खाद्य पदार्थों को प्लेटफॉर्म से हटा दिया है।
खाद्य नियामक एफएसएसएआई द्वारा कई रेस्टोरेंट के खिलाफ कार्रवाई के बाद, कंपनी ने उन डिश को तुरंत हटा दिया है जिन्हें पार्टनर्स ने एनालॉग डेयरी वाली डिश बताया है।
कंपनी ने कहा कि इस कदम का मकसद ग्राहकों के लिए पारदर्शिता और खाने की क्वालिटी को बेहतर बनाना है। साथ ही, कंपनी ने चेतावनी दी कि जो रेस्टोरेंट उसकी शर्तों को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकता है।
नई पॉलिसी के तहत, रेस्टोरेंट पार्टनर्स से कहा गया है कि वे प्राकृतिक डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल शुरू करें। जहां तुरंत ऐसा करना मुमकिन नहीं है, वहां उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे अपने मेन्यू से ऐसे आइटम हटा दें जिनमें एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल हुआ हो।
इसके अलावा, रेस्टोरेंट से यह भी कहा गया है कि वे आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दिए गए प्रोडक्ट लेबल और सामग्री की जानकारी की जांच करें, ताकि इस्तेमाल हो रही सामग्री की पुष्टि हो सके और यह पक्का किया जा सके कि जोमैटो पर लिस्ट किए गए प्रोडक्ट्स की जानकारी सही है।
जोमैटो के सीईओ आदित्य मंगला ने कहा, जोमैटो का मुख्य मकसद अधिक से अधिक लोगों तक बेहतर खाना पहुंचाना है। ग्राहकों की सेहत का ध्यान रखने के साथ, यह पक्का करना है कि हमारे रेस्टोरेंट पार्टनर जो खाना लिस्ट करते हैं और परोसते हैं, वह साफ-सुथरे और तय मानकों के मुताबिक हो।
उन्होंने आगे कहा, यह पॉलिसी कंपनी की उस प्रतिबद्धता को दिखाती है, जिसे हम उन पार्टनर्स के साथ मिलकर पूरा कर रहे हैं जिनकी सोच भी हमारे जैसी है।
यह फैसला खाद्य सुरक्षा और मिलावट को लेकर नियामक जांच बढ़ने के बीच लिया गया है।
इस महीने की शुरुआत में, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा के नियमों के उल्लंघन और नियमों का पालन न करने की बात सामने आने के बाद दो खाद्य संचालनकों के खिलाफ रेगुलेटरी कार्रवाई की थी।
रेगुलेटर ने नियमों का पालन न करने वाले घी उत्पादों और मिलावट की चिंताओं को देखते हुए लाइसेंस सस्पेंड कर दिए और रोक लगाने के आदेश जारी किए।
एक और कार्रवाई में, महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने लोगों की सेहत से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए नकली एनालॉग पनीर के प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिक्री पर एक साल के लिए रोक लगा दी।
यह कार्रवाई लैब में हुई जांच के नतीजों के बाद की गई, जिसमें राज्य में हाल ही में टेस्ट किए गए पनीर के 35 प्रतिशत से ज्यादा सैंपल वेजिटेबल-फैट की मिलावट के कारण क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए थे।
राज्य के रेगुलेटर के मुताबिक, होटलों, रेस्टोरेंट, कैटरर्स और क्लाउड किचन्स को डेयरी उत्पादों के विकल्प का इस्तेमाल करने, उन्हें बनाने, परोसने या स्टोर करने से रोक दिया गया।
जोमैटो ने कहा कि उसकी पॉलिसी लागू रेगुलेटरी जरूरतों के मुताबिक है और यह ग्राहकों के लिए ज्यादा हेल्दी खाने के विकल्पों और ज्यादा पारदर्शिता पर उसके बड़े फोकस का हिस्सा है।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation










.jpg)
