एफएसएसएआई की कार्रवाई के बाद जोमैटो ने एनालॉग डेयरी उत्पादों से बनी डिश की बिक्री पर रोक लगाई
नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने सोमवार को कहा कि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड रेस्टोरेंट द्वारा एनालॉग डेयरी उत्पादों से बनी डिश बेचने के मामले में जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई है और ऐसे सभी खाद्य पदार्थों को प्लेटफॉर्म से हटा दिया है।
खाद्य नियामक एफएसएसएआई द्वारा कई रेस्टोरेंट के खिलाफ कार्रवाई के बाद, कंपनी ने उन डिश को तुरंत हटा दिया है जिन्हें पार्टनर्स ने एनालॉग डेयरी वाली डिश बताया है।
कंपनी ने कहा कि इस कदम का मकसद ग्राहकों के लिए पारदर्शिता और खाने की क्वालिटी को बेहतर बनाना है। साथ ही, कंपनी ने चेतावनी दी कि जो रेस्टोरेंट उसकी शर्तों को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकता है।
नई पॉलिसी के तहत, रेस्टोरेंट पार्टनर्स से कहा गया है कि वे प्राकृतिक डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल शुरू करें। जहां तुरंत ऐसा करना मुमकिन नहीं है, वहां उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे अपने मेन्यू से ऐसे आइटम हटा दें जिनमें एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल हुआ हो।
इसके अलावा, रेस्टोरेंट से यह भी कहा गया है कि वे आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दिए गए प्रोडक्ट लेबल और सामग्री की जानकारी की जांच करें, ताकि इस्तेमाल हो रही सामग्री की पुष्टि हो सके और यह पक्का किया जा सके कि जोमैटो पर लिस्ट किए गए प्रोडक्ट्स की जानकारी सही है।
जोमैटो के सीईओ आदित्य मंगला ने कहा, जोमैटो का मुख्य मकसद अधिक से अधिक लोगों तक बेहतर खाना पहुंचाना है। ग्राहकों की सेहत का ध्यान रखने के साथ, यह पक्का करना है कि हमारे रेस्टोरेंट पार्टनर जो खाना लिस्ट करते हैं और परोसते हैं, वह साफ-सुथरे और तय मानकों के मुताबिक हो।
उन्होंने आगे कहा, यह पॉलिसी कंपनी की उस प्रतिबद्धता को दिखाती है, जिसे हम उन पार्टनर्स के साथ मिलकर पूरा कर रहे हैं जिनकी सोच भी हमारे जैसी है।
यह फैसला खाद्य सुरक्षा और मिलावट को लेकर नियामक जांच बढ़ने के बीच लिया गया है।
इस महीने की शुरुआत में, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा के नियमों के उल्लंघन और नियमों का पालन न करने की बात सामने आने के बाद दो खाद्य संचालनकों के खिलाफ रेगुलेटरी कार्रवाई की थी।
रेगुलेटर ने नियमों का पालन न करने वाले घी उत्पादों और मिलावट की चिंताओं को देखते हुए लाइसेंस सस्पेंड कर दिए और रोक लगाने के आदेश जारी किए।
एक और कार्रवाई में, महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने लोगों की सेहत से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए नकली एनालॉग पनीर के प्रोडक्शन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिक्री पर एक साल के लिए रोक लगा दी।
यह कार्रवाई लैब में हुई जांच के नतीजों के बाद की गई, जिसमें राज्य में हाल ही में टेस्ट किए गए पनीर के 35 प्रतिशत से ज्यादा सैंपल वेजिटेबल-फैट की मिलावट के कारण क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए थे।
राज्य के रेगुलेटर के मुताबिक, होटलों, रेस्टोरेंट, कैटरर्स और क्लाउड किचन्स को डेयरी उत्पादों के विकल्प का इस्तेमाल करने, उन्हें बनाने, परोसने या स्टोर करने से रोक दिया गया।
जोमैटो ने कहा कि उसकी पॉलिसी लागू रेगुलेटरी जरूरतों के मुताबिक है और यह ग्राहकों के लिए ज्यादा हेल्दी खाने के विकल्पों और ज्यादा पारदर्शिता पर उसके बड़े फोकस का हिस्सा है।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पश्चिम बंगाल: डेंगू के मामलों को लेकर पांच संवेदनशील जिलों की पहचान, स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी चिंता
कोलकाता, 31 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू को लेकर सबसे अधिक संवेदनशील पांच जिलों की पहचान की गई है। अधिकारियों ने सोमवार को जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के पांच जिलों की पहचान डेंगू के सबसे ज्यादा जोखिम वाले जिलों के तौर पर की है।
लगातार मौसम के बदलने और बारिश की वजह से राज्य के स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। कुछ जिलों में डेंगू के मामले और उससे होने वाली मौतों के मामले बढ़े हैं। पिछले महीने और मौजूदा मॉनसून के दौरान डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या को देखते हुए, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने पांच जिलों की पहचान डेंगू के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील इलाकों के तौर पर की है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से राजधानी कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद की संवेदनशील इलाकों के तौर पर पहचान की गई है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा, डेंगू के अलावा, इन जिलों से प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम के मामले भी सामने आए हैं। यह मलेरिया का सबसे खतरनाक रूप है जो किडनी पर बुरा असर डाल सकता है।
इस बीच, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सभी अस्पतालों के अधिकारियों और डॉक्टरों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे डेंगू से प्रभावित लोगों की संख्या को सही-सही बताएं, न कि उसे छिपाएं या कम करके दिखाएं। पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान ऐसी शिकायतें आम थीं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, सभी संबंधित लोगों को बीमारी का सही नाम बताने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। डेंगू या मलेरिया के मामलों को अज्ञात बुखार बताने की कोई जरूरत नहीं है। पिछली राज्य सरकार हमेशा प्रभावित लोगों या मरने वालों की संख्या कम करके बताती थी, और अस्पतालों के अधिकारियों व डॉक्टरों को डेंगू के मामलों को अज्ञात बुखार के तौर पर रिपोर्ट करने के लिए मजबूर किया जाता था। लेकिन हम उनसे कुछ भी न छिपाने के लिए कह रहे हैं। छिपाने के लिए क्या है? अगर डेंगू है, तो निश्चित रूप से उसका इलाज किया जाएगा। डॉक्टरों के डेंगू लिखने से डरने की कोई वजह नहीं है। अगर डेंगू है, तो वे डेंगू लिखेंगे। अगर नहीं है, तो वे नहीं लिखेंगे।
--आईएएनएस
एसडी/पीएम
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