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नेपाल बाढ़ में लापता डॉ. मिलिंद चितले के जीवित मिलने की उम्मीद क्षीण, मित्र ने याद किया हिमालय से नाता

मुंबई के चिकित्सक एवं पर्वतारोही मिलिंद चितले अपने जानने वालों के लिए महज एक मित्र नहीं बल्कि बहुत कुछ रहे हैं। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हर गुजरते दिन के साथ उन्हें खोज पाने की उनके परिवार और शुभचिंतकों की उम्मीदें धुंधली पड़ती जा रही हैं। 1988 के पहले ऐतिहासिक भारतीय नागरिक कंचनजंघा अभियान में आधिकारिक चिकित्सक के तौर पर उनकी भूमिका की यादें ताजा होने के बीच, उनके लंबे समय से मित्र और अभियान सहयोगी चारु जोशी ने सोमवार को हिमालय के साथ चितले के दशकों पुराने रिश्ते को याद किया।

जोशी ने संवाददाताओं से कहा कि आपदा के पांच दिन बाद बचावकर्मियों ने फिलहाल उन लोगों को प्राथमिकता दी है जिन्हें आसानी से बचाया जा सकता है, जबकि मिट्टी खोदकर तलाश का काम अभी शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत जटिल प्रक्रिया है।’’ जोशी के लिए यह अनिश्चितता की स्थिति इसलिए भी मुश्किल भरी है क्योंकि उनकी दोस्ती 40 साल से अधिक पहले पहाड़ों में ही हुई थी। उन्होंने भावुक आवाज में कहा, ‘‘वह सिर्फ दोस्त नहीं थे, उससे कहीं बढ़कर थे।’’ मुंबई के अंधेरी इलाके के चिकित्सक और ‘हिल्स एंड ट्रेल्स’ टूर कंपनी के संस्थापक चितले करीब तीन दशक से हिमालयी पर्वतारोहण और अभियानों से जुड़े थे।

वह और उनकी पत्नी 61 सदस्यीय कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा समूह का नेतृत्व कर रहे थे, जो 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ के बाद से लापता है। अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या सोमवार को बढ़कर 903 हो गई है। बड़ी संख्या में शव बरामद किए जा रहे हैं और करीब 4,250 लोग अब भी लापता हैं।

जोशी ने कहा कि अब चितले के जीवित मिलने की उम्मीद ‘‘बेहद क्षीण’’ हो गई है। चितले का पहाड़ों से जुड़ाव कई दशक पुराना था, लेकिन 1988 का कंचनजंघा अभियान उनके पर्वतारोहण जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा। ‘कांगचेनजंघा 88’ के नाम से चर्चित यह अभियान असैन्य पर्वतारोहियों का एक महत्वपूर्ण प्रयास था, जिसमें मुख्य रूप से महाराष्ट्र के पर्वतारोही शामिल थे।

इसका उद्देश्य उन अभियानों में उपलब्ध सैन्य ढांचे के बिना दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ाई करना था। जोशी ने बताया कि चितले इस अभियान के आधिकारिक चिकित्सक थे। हालांकि दल चोटी तक नहीं पहुंच सका, लेकिन उसने कंचनजंघा के कुछ बेहद चुनौतीपूर्ण हिस्सों को पार करते हुए 8,000 मीटर की ऊंचाई का कठिन पड़ाव पार किया था।

इसे भारत में नागरिक पर्वतारोहण आंदोलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया। चितले के साथ 1981-82 से जुड़े जोशी ने ऊंचे हिमालय में साथ बिताए वर्षों को याद करते हुए कहा कि उस अभियान ने चार दशक से अधिक समय तक चलने वाली उनकी दोस्ती को मजबूत किया। जोशी ने कहा, ‘‘1988 में माउंट कंचनजंघा पर पहला नागरिक अभियान आयोजित किया गया था और वह हमारे आधिकारिक चिकित्सक थे।

हम बहुत करीबी दोस्त थे।’’ चितले ने वर्षों तक चिकित्सा सेवा के साथ पहाड़ों के प्रति अपने जुनून को जारी रखा और हिमालय उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया। पिछले सप्ताह जब अचानक बाढ़ आई, तब चितले नेपाल में थे। जोशी, जो बाद में भारत लौट आए, स्थिति का जायजा लेने के लिए काठमांडू गए और भारतीय दूतावास के साथ समन्वय करने का प्रयास किया।

उन्होंने स्थानीय एजेंसी ‘रिचा ट्रेक्स’ से भी संपर्क कर चितले के बारे में जानकारी मांगी। जोशी ने कहा, ‘‘मैंने उससे साफ-साफ पूछा कि बचने की कितनी संभावना है। उसने कहा कि संभावना बहुत कम है, क्योंकि नेपाल-चीन सीमा पर आव्रजन केंद्र में हमेशा लंबी कतार लगी रहती है और बाढ़ उसी जगह आई थी।’’ उन्होंने बताया कि अनुमान है कि बाढ़ का पानी जब वहां से गुजरा तब आव्रजन केंद्र पर 600-700 लोग मौजूद थे, जिससे लोगों के जीवित बचने की संभावना बेहद कम हो गई।

जोशी के अनुसार, घटना वाले इलाके को नेपाल सेना, नेपाल पर्वतारोहण संघ और पुलिस ने घेराबंदी कर अपने नियंत्रण में ले लिया है। सेना ने त्रिशूली में एक नियंत्रण केंद्र भी स्थापित किया है। डॉ. चितले के नेतृत्व वाला समूह 23 अगस्त को मुंबई से काठमांडू के लिए रवाना हुआ था और 25 अगस्त की शाम को उनसे आखिरी बार संपर्क हुआ था।

इसके कुछ घंटे बाद 26 अगस्त की सुबह ऊंचाई वाले क्षेत्रों से आई बाढ़ के तेज बहाव ने महत्वपूर्ण आव्रजन ढांचे को तबाह कर दिया था। समूह को दो सितंबर को कैलाश परिक्रमा पूरी करने के बाद छह सितंबर को मुंबई लौटना था। डॉ. चितले ने अपने क्लीनिक के बाहर एक सूचना भी लगा रखी थी, जिसमें लिखा था कि क्लीनिक छह सितंबर तक बंद रहेगा।

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Jayalalithaa की रणनीति दोहराएंगे Joseph Vijay? PM महत्वाकांक्षा पर DMK-Congress बिफरे

प्रधानमंत्री पद के लिए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय को 9 प्रतिशत जनसमर्थन मिलने वाले सर्वे के नतीजों के बाद, कांग्रेस नेता और उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन ने कहा कि उनकी पार्टी के नेता राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। हालांकि, तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के नेताओं के.ए. सेंगोट्टैयन और सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने प्रधानमंत्री पद के लिए जोसेफ विजय को उम्मीदवार बनाने की संभावना से इनकार नहीं किया। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या TVK पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की 2014 के लोकसभा चुनाव वाली रणनीति अपना सकती है, जिसमें उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था और 37 लोकसभा सीटें जीती थीं।
 

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हालांकि वाइको की MDMK, थोल. थिरुमावलवन की VCK और IUML जैसे क्षेत्रीय सहयोगी शायद ही इस तरह के कैंपेन का विरोध करें और TVK गठबंधन में बने रहें, लेकिन कांग्रेस, जो राहुल गांधी को आगे बढ़ाना चाहती है, उसे इस गठबंधन में बने रहने में दिक्कत हो सकती है। TVK अब तक INDIA गठबंधन में शामिल नहीं हुआ है और लोकसभा चुनावों के लिए उसकी रणनीति का भी अभी तक पता नहीं चला है। इस बात पर विपक्षी पार्टी DMK और TVK की सहयोगी कांग्रेस ने कड़ी आलोचना की है।

DMK नेता RS भारती ने TVK की बातों का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि उनकी कल्पना की कोई सीमा नहीं है, वहीं कांग्रेस ने धमकी दी कि अगर विजय की पार्टी 2029 में राहुल गांधी का समर्थन नहीं करती है, तो वे विजय की कैबिनेट से हट जाएंगे। कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने विजय का नाम लिए बिना या सीधे तौर पर PM पसंद वाले सर्वे का ज़िक्र किए बिना कहा कि हर आंकड़ा सच नहीं बताता। हर सर्वे लोगों की आवाज़ नहीं होता।
 

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28 अगस्त को जारी हुए ताज़ा सर्वे में विजय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बाद तीसरे स्थान पर रहे। इस बात को और मज़बूत करते हुए, उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन ने रविवार को कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ही पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। जब TVK की कोशिशों के बारे में पूछा गया, तो DMK सचिव भारती ने कहा कि अगर पार्टी के सदस्य बोलेंगे, तो वे यह भी कह देंगे कि वह संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख बनने वाले हैं। कल्पना, बस कल्पना; उनकी कल्पना की कोई सीमा नहीं है। उन्हें जो सोचना है, सोचने दें।
 
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  Sports

1280 किलोमीटर साईकिल चलाकर सूर्यकुमार से मिलने पहुंचा फैन, SKY ने दिया खास गिफ्ट

क्रिकेट के प्रति फैंस की दीवानगी के किस्से तो आपने खूब सुने होंगे, लेकिन सूर्यकुमार यादव के इस फैन ने जो किया, वह वाकई खास है. उत्तर प्रदेश से एक फैन अपने पसंदीदा क्रिकेटर और भारत को अपनी कप्तानी में टी20 वर्ल्ड कप का खिताब दिलाने वाले सूर्यकुमार यादव से मिलने के लिए साइकिल से मुंबई पहुंच गया. उसने करीब 1,280 किलोमीटर का सफर तय किया और आखिरकार अपने पसंदीदा स्टार से मुलाकात का सपना पूरा कर लिया. सूर्या ने भी फैन को निराश नहीं किया और उसे खास गिफ्ट देकर इस मुलाकात को और यादगार बना दिया. Tue, 1 Sep 2026 00:07:53 +0530

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