Bahula Chauth Vrat Katha 2026: बहुला चौथ पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, गणपति बप्पा हर संकट करेंगे दूर!
Bahula Chauth Vrat Katha 2026: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चौथ का व्रत रखा जाता है। इसे बहुला चतुर्थी, भादवा चौथ और कुछ क्षेत्रों में भादुड़ी चौथ भी कहा जाता है। यह व्रत खासतौर पर महिलाएं संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए रखती हैं। इस दिन भगवान गणेश के साथ भगवान श्रीकृष्ण और बहुला गौमाता की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बहुला चौथ पर व्रत कथा सुनने और श्रद्धापूर्वक पूजा करने का विशेष महत्व है। साल 2026 में बहुला चौथ का व्रत 31 अगस्त, सोमवार को रखा जा रहा है।
बहुला चौथ की मुख्य व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। उनकी लीलाओं में सहयोग करने के लिए कई देवी-देवताओं ने भी अलग-अलग रूपों में पृथ्वी पर जन्म लिया। इसी क्रम में स्वर्ग की कामधेनु ने नंद बाबा की गौशाला में बहुला नाम की गाय के रूप में जन्म लिया था।
कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण बहुला से बहुत स्नेह करते थे। एक दिन उन्होंने उसकी सत्यनिष्ठा और वचन के प्रति समर्पण की परीक्षा लेने का विचार किया।
जब बहुला जंगल में चर रही थी, तभी श्रीकृष्ण ने सिंह का रूप धारण कर उसका रास्ता रोक लिया। सामने सिंह को देखकर बहुला भयभीत हुई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं छोड़ी।
बहुला ने सिंह से कहा कि उसका छोटा बछड़ा घर पर भूखा है। वह पहले उसे दूध पिलाकर वापस लौट आएगी। उसने सिंह को भरोसा दिलाया कि वह अपना वचन जरूर निभाएगी।
बछड़े को दूध पिलाकर वापस लौटी बहुला
सिंह को पहले बहुला की बात पर विश्वास नहीं हुआ। लेकिन बहुला ने सत्य और धर्म की शपथ लेकर लौटने का वादा किया। इसके बाद सिंह ने उसे जाने दिया। बहुला अपने घर पहुंची और अपने बछड़े को दूध पिलाया। इसके बाद वह अपने वचन के मुताबिक दोबारा जंगल में सिंह के पास पहुंच गई।
बहुला की सच्चाई, धर्म के प्रति आस्था और वचन निभाने की भावना देखकर श्रीकृष्ण प्रसन्न हो गए। इसके बाद उन्होंने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया और बहुला को आशीर्वाद दिया।
धार्मिक मान्यता है कि तभी से भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर बहुला गौमाता की पूजा की परंपरा चली आ रही है। इसी वजह से इस दिन को बहुला चौथ कहा जाता है।
भादवा चौथ की दूसरी प्रचलित कथा
भादवा चौथ से जुड़ी एक अन्य कथा साहूकार परिवार की बहू की अटूट श्रद्धा से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार साहूकार की बहू ने महिलाओं को चौथ माता का व्रत करते और कथा सुनते देखा। इसके बाद उसने भी श्रद्धापूर्वक चौथ माता और विनायक जी का व्रत रखना शुरू कर दिया।
समय के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी। उसका पति धन कमाने के लिए परदेश चला गया। पति के दूर रहने के बावजूद महिला ने पूजा और व्रत का क्रम नहीं छोड़ा।
कथा के अनुसार करीब 12 साल बाद उसका पति धन कमाकर वापस लौट रहा था। रास्ते में उसका सामना नागराज से हुआ और उसके जीवन पर संकट आ गया। मान्यता है कि पत्नी की वर्षों की श्रद्धा और व्रत के फल से चौथ माता और विनायक जी की कृपा हुई और वह संकट से सुरक्षित निकल गया।
इसके बाद वह सकुशल अपने घर पहुंचा। इसी मान्यता के कारण भादवा चौथ को संकटों से रक्षा और गणेश जी की कृपा से जोड़कर देखा जाता है।
बहुला चौथ पर क्यों की जाती है गणेश जी की पूजा?
बहुला चौथ पर भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु गणपति बप्पा से परिवार की सुख-समृद्धि और संतान के मंगल की कामना करते हैं। कई स्थानों पर बहुला गाय और उसके बछड़े की पूजा भी की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा से व्रत रखने, पूजा करने और कथा सुनने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और जीवन के विघ्न दूर होने का आशीर्वाद मिलता है।
नोट: ऊपर दी गई कथा और इससे जुड़ी मान्यताएं धार्मिक एवं पौराणिक परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में बहुला चौथ की कथा और पूजा की परंपरा में थोड़ा अंतर मिल सकता है।
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