नेपाल बाढ़- अज्ञात शवों का दफन शुरू, सैकड़ों कब्रें तैयार:अबतक 804 मौतें; आरोप- 3 महीने पहले ग्लेशियरों की जानकारी मांगी थी, चीन ने नहीं दी
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद अज्ञात शवों का सामूहिक दफन शुरू कर दिया गया है। चितवन के देवघाट जंगल में प्रशासन ने सैकड़ों कब्रें खोदी हैं। यहां उन शवों को दफनाया जा रहा है, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है और जो ज्यादा समय बीतने के कारण खराब होने लगे हैं। पिछले दो दिनों में 196 शव दफनाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कई शव इतनी खराब हालत में मिले हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल है। इसलिए हर शव के साथ पहचान नंबर और जरूरी रिकॉर्ड रखा जा रहा है, ताकि आगे DNA जांच के जरिए उनकी पहचान की जा सके। इस बीच 3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं और उनके परिवार अपनों की तलाश में जुटे हैं। 26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर टूटने से नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी। इस आपदा में नेपाल में अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है। 3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। वहीं, इस त्रासदी से पहले चीन से ग्लेशियरों के खतरे की जानकारी साझा करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 27 मई को नेपाल और चीन के अधिकारियों की बैठक हुई थी। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने ग्लेशियरों में शुरुआती हलचल और जलस्तर की जानकारी पहले से देने की मांग की थी, लेकिन उन्हें चीन से उतनी जानकारी नहीं मिली, जितनी वे चाहते थे। नेपाल त्रासदी की 3 ताजा तस्वीरें… खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…
एथेनॉल ब्लेंडिंग पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई:याचिका में मांग- पंपों पर बताया जाए पेट्रोल में कितना एथेनॉल मिला रहे
सुप्रीम कोर्ट आज यानी सोमवार (31 अगस्त) को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें देश के सभी पेट्रोल पंपों के नोजल और पेट्रोल बिल पर एथेनॉल की सटीक मात्रा यानी प्रतिशत लिखे होने की मांग की गई है। PTI के मुताबिक न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। यह याचिका नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से दायर की गई है। पंप के नोजल और पेट्रोल बिल पर लिखनी होगी एथेनॉल की मात्रा याचिका में केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि पेट्रोल पंपों की हर डिस्पेंसिंग नोजल पर एथेनॉल ब्लेंडिंग का प्रतिशत स्पष्ट रूप से लिखा जाए। इसके साथ ही, जब भी कोई ग्राहक पेट्रोल खरीदे, तो उसको मिलने वाली रसीद पर भी यह अनिवार्य रूप से लिखा हो कि उस ईंधन में कितने प्रतिशत एथेनॉल मिला हुआ है। गाड़ियों के लिए ऑनलाइन कंपैटिबिलिटी डेटाबेस बनाने की मांग याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि सरकार एक आधिकारिक और सार्वजनिक ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करे। इस डेटाबेस में वाहन निर्माता, मॉडल, इंजन के प्रकार और निर्माण के वर्ष के हिसाब से सर्च करने की सुविधा हो। इससे आम नागरिक यह आसानी से जान सकेंगे कि उनकी गाड़ी E20 या अन्य एथेनॉल मिश्रण के अनुकूल है या नहीं। E20 पेट्रोल के असर की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी का सुझाव याचिका में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की भी मांग की गई है। इस कमेटी में: शामिल होने चाहिए। यह समिति सड़कों पर चल रहे वाहनों पर E20 ईंधन के वास्तविक प्रभाव की जांच करके सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करेगी। माइलेज, इंजन लाइफ और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का होगा आकलन याचिका में कहा गया है कि यह एक्सपर्ट कमेटी निम्नलिखित पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे:
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