उपेंद्र से किच्चा सुदीप और ऋषभ शेट्टी तक, कन्नड़ सिनेमा ने रॉकिंग स्टार यश की ‘टॉक्सिक' की जमकर तारीफ
उपेंद्र और किच्चा सुदीप से लेकर ऋषभ शेट्टी, रक्षित प्रेम, आशिका रंगनाथ, सान्वी सुदीप और विजय प्रकाश तक, कन्नड़ सिनेमा की कई बड़ी और दमदार आवाज़ें रॉकिंग स्टार यश और उनकी फिल्म ‘टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ की जमकर तारीफ कर रही हैं. फिल्म के भव्य स्केल, हटकर कहानी कहने के अंदाज़, यश की शानदार परफॉर्मेंस और यश व गीतू मोहनदास की क्रिएटिव विज़न ने इंडस्ट्री के इन दिग्गजों का ध्यान खींचा है.
इन रिएक्शन को क्या खास बनाता है?
इन रिएक्शन्स को खास बनाता है यश और गीतू मोहनदास का उस स्टीरियोटाइपिकल ‘लार्जर दैन लाइफ’ हीरो इमेज से बाहर निकलने का फैसला. ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ की ज़बरदस्त कामयाबी के बाद यश के पास वही आज़माया हुआ रास्ता चुनने का पूरा मौका था, लेकिन उन्होंने आसान और प्रेडिक्टेबल रास्ते के बजाय ‘टॉक्सिक’ के साथ एक डार्क, लेयर्ड और बिल्कुल अलग किरदार और सिनेमैटिक दुनिया को एक्सप्लोर करना चुना.
ऐसे वक्त में, जब ‘टॉक्सिक’ को लेकर असामान्य रूप से तेज़ नेगेटिविटी देखने को मिली है, जिसे कई ऑब्ज़र्वर्स पूरी तरह ऑर्गेनिक नहीं मान रहे थे, वहीं कन्नड़ सिनेमा से आ रही यह तारीफ एक स्ट्रॉन्ग काउंटरपॉइंट बनकर सामने आई है. इंडस्ट्री के बड़े नामों ने फिल्म को लेकर चल रही बहस से इतर उसके एम्बिशन, स्केल, परफॉर्मेंस और यश व गीतू मोहनदास की क्रिएटिव विज़न पर फोकस किया है.
'टॉक्सिक एक फेयरी टेल है…'
कन्नड़ सिनेमा के वेटरन स्टार उपेंद्र भी फिल्म और इसे बनाने में लगी मेहनत की तारीफ करने वालों में शामिल रहे. एक्स पर अपना रिएक्शन शेयर करते हुए उन्होंने लिखा: “टॉक्सिक एक फेयरी टेल है… लेकिन ग्रोन-अप्स के लिए?? ‘टॉक्सिक’ देखी. वाह! क्या फिल्म है! एक नई दुनिया और बिल्कुल नया एक्सपीरियंस! हर आर्टिस्ट और टेक्नीशियन की मेहनत, डेडिकेशन और पैशन वाकई काबिल-ए-तारीफ है! यश और पूरी टीम को सलाम!
'इसे करने की हिम्मत चाहिए'
किच्चा सुदीप ने यश के उस फैसले को हाईलाइट किया, जिसमें उन्होंने अपने पिछले कमर्शियल फॉर्मूले को दोहराने के बजाय कुछ बिल्कुल अलग करने का रास्ता चुना. एक्स पर अपने विचार शेयर करते हुए उन्होंने लिखा:
“बस इतना कहना चाहता हूं, @TheNameIsYash — आपने वाकई कुछ आउट ऑफ द बॉक्स करने की कोशिश की है, बजाय इसके कि अपनी पिछली कमर्शियल ब्लॉकबस्टर के बाद वही प्रेडिक्टेबल रास्ता अपनाते और एक रेगुलर, एक्सपेक्टेड और फॉर्मूला बेस्ड फॉलो-अप बनाते. ऐसा कुछ करने के लिए एक अलग माइंडसेट, कन्विक्शन और सबसे ज़रूरी चीज़, इसे करने की हिम्मत चाहिए. #टॉक्सिक एक अनयूज़ुअल और काबिल-ए-तारीफ कोशिश है. फिल्म के कई हिस्से वाकई इंट्रिगिंग हैं, जो शानदार डिबेट, डिस्कशन और लर्निंग का रास्ता खोलते हैं. कन्वेंशनल से हटकर एक्सपेरिमेंट करने की हिम्मत दिखाने के लिए आपको सलाम.”
दिल की गहराइयों से ज़िंदा करने की कोशिश करते हैं
‘कांतारा’ स्टार ऋषभ शेट्टी ने भी यश के कन्विक्शन की तारीफ की, खासकर उनके किरदार की विशालता और उसकी इमोशनल कॉम्प्लेक्सिटी को लेकर. सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा:
“एक आर्टिस्ट के तौर पर जब आप कोई किरदार निभाते हैं, तो उसे दिल की गहराइयों से ज़िंदा करने की कोशिश करते हैं. और यहां मैं उस कन्विक्शन से वाकई इम्प्रेस हुआ हूं, जिसके साथ एक ताकतवर इंसान के संघर्ष को दिखाया गया है. हो सकता है कि फिल्म का प्लॉट और उसके ड्राइविंग कैरेक्टर्स उस आम ट्रैक पर न चलते हों, जिस पर ज़्यादातर फिल्में चलती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह ट्रैक गलत है.
किसी कहानी को कहने में जो मेहनत लगती है और दिमाग में आए एक आइडिया से लेकर उसे स्क्रीन पर फिल्म बनाने तक का सफर, वह बहुत बड़ा होता है. यश सर, आपने जिस तरह खुद को एक ऐसे किरदार और दुनिया के हवाले किया है, जो एक लार्जर दैन लाइफ परफॉर्मेंस की मांग करता है, उसके लिए सलाम. मैं इसे हर एक सीन में साफ महसूस कर सकता था.
ऑडियंस को यह एक्सपीरियंस देना आसान नहीं है कि गिल्ट किस तरह बढ़ता जाता है और जिंदगी में टॉक्सिसिटी को और गहरा करता जाता है. सर, इस डेयरिंग एक्सपेरिमेंट को करने के लिए मैं आपके साथ खड़ा हूं. हमें आपसे उस प्यार के लिए भी प्यार है, जो आपको कन्नड़ सिनेमा को ग्लोबल स्टेज तक ले जाने के लिए है.”
रक्षित प्रेम ने यश पर जताया गर्व
रक्षित प्रेम ने भी यश और एक आर्टिस्ट के तौर पर उनके सफर पर गर्व जताते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा: “मेरा प्यार ‘टॉक्सिक’ के लिए है. @thenamesiyash, आप हमें प्राउड कराते हैं… बेहद प्राउड! और एक आर्टिस्ट के तौर पर आपने खुद को जिस तरह तराशा है, वह कमाल है. ‘टॉक्सिक’ देखिए, क्योंकि मुझे पता है कि आपको भी यही फील होगा. इस पूरी टीम को और ताकत मिले.”
एक्ट्रेस आशिका रंगनाथ ने फिल्म को एक खास इंट्रोस्पेक्टिव नज़रिए से देखा. उन्होंने इस बात पर गौर किया कि किस तरह गिल्ट, ट्रॉमा और रिग्रेट फिल्म के प्रोटैगोनिस्ट के सफर का अहम हिस्सा बन जाते हैं. उनके रिएक्शन में किरदार की इमोशनल डेप्थ और एक ताकतवर इंसान के भीतर चल रही लड़ाई को एक्सप्लोर करने की फिल्म की कोशिश साफ नज़र आई.
सान्वी सुदीप ने यश की परफॉर्मेंस की तारीफ की
सान्वी सुदीप ने खास तौर पर यश की परफॉर्मेंस को लेकर अपनी तारीफ जाहिर की. इंस्टाग्राम पर उन्होंने लिखा: “फिनॉमिनल शब्द भी ‘टॉक्सिक’ में उन्होंने जो किया है, उसे बयान करने के लिए काफी नहीं है. उन्होंने सिर्फ एक्ट नहीं किया, बल्कि हर फ्रेम में मैजिक भर दिया. ऐसी परफॉर्मेंस जो क्रेडिट्स खत्म होने के बाद भी आपके साथ रहती है. उन्होंने वाकई सबको दिखा दिया कि वह कितने इनक्रेडिबल आर्टिस्ट हैं.”
सिंगर विजय प्रकाश ने भी फिल्म की इमोशनल और सिनेमैटिक एम्बिशन की तारीफ करते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा:
“जब हमें सूरज की रोशनी पसंद नहीं आती, तो हम पर्दे लगा देते हैं. लेकिन पर्दे सिर्फ सूरज की रोशनी को हमारे घर में आने से रोक सकते हैं, सूरज फिर भी पूरी चमक के साथ चमकता रहता है. ‘टॉक्सिक’ प्योर सिनेमा है, एक ऐसी फिल्म जो शानदार परफॉर्मेंस और गहरी इंसानी भावनाओं से चलती है और जिसकी कहानी गैंग वॉर की पृष्ठभूमि में सामने आती है. न कुछ ज़्यादा, न कुछ कम. प्योर सिनेमा. यश और पूरी टीम को सलाम!”
क्रिएटिव चॉइसेज़ ने कन्नड़ सिनेमा को किया इम्प्रेस
इन सभी रिएक्शन्स से एक बात साफ उभरकर सामने आती है कि यश और गीतू मोहनदास की क्रिएटिव चॉइसेज़ ने कन्नड़ सिनेमा को इम्प्रेस किया है. ‘टॉक्सिक’ में यश उस कन्वेंशनल लार्जर दैन लाइफ हीरो इमेज से आगे निकलते दिखाई देते हैं, जिसके साथ उन्हें अक्सर जोड़ा जाता है, और ऐसे किरदार व दुनिया को अपनाते हैं जो एक आर्टिस्ट के तौर पर उनसे कुछ बिल्कुल अलग डिमांड करती है.
कन्नड़ सिनेमा से मिल रही इस तारीफ की गूंज कर्नाटक से बाहर फिल्म के ऑडियंस रिस्पॉन्स में भी दिखाई दे रही है. हिंदी बेल्ट में ‘टॉक्सिक’ ने सिर्फ चार दिनों में ₹112 करोड़ नेट का आंकड़ा पार कर लिया है, जो दिखाता है कि ऑडियंस ने भी यश के इस नए अवतार को खुलकर अपनाया है.
रॉकिंग स्टार यश, नयनतारा, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत और हुमा कुरैशी स्टारर ‘टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है. फिल्म को वेंकट के. नारायण ने केवीएन प्रोडक्शंस और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के बैनर तले प्रोड्यूस किया है. फिल्म दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है.
8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में आएगा बंपर उछाल, 3% की जगह कितना मिलेगा सालाना इंक्रीमेंट?
8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए आने वाला समय बहुत अहम साबित होने जा रहा है. आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा हुए करीब दस महीने का समय बीत चुका है. आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए अठारह महीने की समयसीमा दी गई थी. इसका सीधा मतलब यह है कि अब आयोग की रिपोर्ट आने और नई वेतन व्यवस्था लागू होने में सिर्फ आठ महीने का समय बाकी रह गया है. इस बीच कर्मचारियों की नजरें उन बदलावों पर टिकी हैं जो उनकी हर महीने आने वाली तनख्वाह को नया रूप दे सकते हैं. सरकारी सेवा में मिलने वाला सालाना इंक्रीमेंट इस बार चर्चा के केंद्र में बना हुआ है.
तीन प्रतिशत इंक्रीमेंट बना सबसे बड़ा विवाद
निजी क्षेत्र की कंपनियों में कर्मचारियों के काम और बाजार के हिसाब से हर साल वेतन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलती है. इसके उलट सरकारी दफ्तरों में काम करने वालों को हर साल अपनी बेसिक पे पर महज तीन प्रतिशत का मामूली सालाना इंक्रीमेंट ही मिलता है. छठे और सातवें वेतन आयोग के समय से ही यही तीन प्रतिशत का पैमाना चला आ रहा है. मौजूदा समय में बढ़ती महंगाई और जीवनशैली के खर्चों को देखते हुए कर्मचारी इस तीन प्रतिशत की दर को बहुत कम मान रहे हैं. यही वजह है कि अब आठवें वेतन आयोग के सामने सालाना इंक्रीमेंट की इस दर को बदलना सबसे बड़ा और जरूरी मुद्दा बन गया है.
प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने रखी बड़ी मांग
देश के प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने इस दिशा में आयोग को अपनी सिफारिशें भेजनी शुरू कर दी हैं. भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ यानी बीपीएमएस और कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन एनसीजेसीएम ने आयोग को दिए अपने ज्ञापन में यह बात मजबूती से रखी है. इन दोनों बड़े संगठनों का कहना है कि मौजूदा तीन प्रतिशत इंक्रीमेंट की दर बहुत पुरानी हो चुकी है और इसे बढ़ाकर छह प्रतिशत किया जाना चाहिए. इसी कड़ी में सर्वे ऑफ इंडिया के मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन ने भी इस दर को कम से कम पांच प्रतिशत करने का ठोस प्रस्ताव आयोग के सामने पेश किया है.
महंगाई भत्ते और इंक्रीमेंट का असली फर्क
अक्सर लोग महंगाई भत्ते यानी डीए और सालाना इंक्रीमेंट को एक जैसा मान लेते हैं, लेकिन कर्मचारी संगठनों ने इसका अंतर साफ किया है. बीपीएमएस का कहना है कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों को सिर्फ रोजमर्रा की बढ़ती कीमतों से बचाने के लिए दिया जाता है. डीए से किसी की असली आमदनी नहीं बढ़ती, बल्कि वह सिर्फ बाजार की महंगाई की भरपाई करता है. कर्मचारी के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और उसकी असली बचत को बढ़ाने का काम सिर्फ सालाना इंक्रीमेंट ही करता है. नया वेतन आयोग हर दस साल में एक बार आता है. ऐसे में अगर दस साल तक सिर्फ तीन प्रतिशत की दर से इंक्रीमेंट मिले, तो कर्मचारी की कमाई में कोई बड़ा सुधार नहीं हो पाता है.
3 और 6 प्रतिशत के इंक्रीमेंट का पूरा गणित
इस बदलाव से सैलरी पर क्या असर पड़ेगा, इसे साधारण गणित से आसानी से समझा जा सकता है. सातवें वेतन आयोग के तहत अगर कोई कर्मचारी अठारह हजार रुपये के शुरुआती न्यूनतम बेसिक पे पर काम शुरू करता है, तो तीन प्रतिशत इंक्रीमेंट के हिसाब से दस साल बाद उसकी बेसिक पे चौबीस हजार एक सौ नब्बे रुपये तक पहुंचती है. वहीं अगर इंक्रीमेंट की यह दर छह प्रतिशत कर दी जाए, तो दस साल बाद उसी कर्मचारी की बेसिक पे बत्तीस हजार दो सौ पैंतीस रुपये हो जाएगी. इसका मतलब यह है कि कर्मचारी को हर महीने सीधे आठ हजार पैंतालीस रुपये का सीधा फायदा मिलेगा. पूरे दस साल के समय को देखें तो छह प्रतिशत की दर से कर्मचारी को करीब चार लाख सड़सठ हजार रुपये से ज्यादा की रकम मिलेगी.
मिडिल लेवल कर्मचारियों की आय में बड़ा उछाल
यह अंतर मध्यम स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए और भी बड़ा साबित होगा. मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे छप्पन हजार एक सौ रुपये है. अगर उसे छह प्रतिशत की दर से सालाना इंक्रीमेंट मिलता है, तो दस साल के बाद उसके मासिक वेतन में पच्चीस हजार तिहत्तर रुपये का भारी अंतर आ जाएगा. दस सालों के पूरे सेवाकाल में यह बढ़ोतरी लगभग चौदह लाख साठ हजार रुपये की अतिरिक्त आय बनकर सामने आएगी. यह अतिरिक्त रकम किसी भी कर्मचारी के परिवार, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं के लिए बहुत बड़ा सहारा साबित हो सकती है.
आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजरें
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच अब इस बात को लेकर भारी उत्सुकता है कि आयोग इस प्रस्ताव को किस तरह लेता है. आयोग के पास अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए अब केवल आठ महीने का समय बचा हुआ है. रिपोर्ट पेश होने के बाद सरकार इस पर अंतिम मुहर लगाएगी. अगर कर्मचारी यूनियनों की यह मांग मान ली जाती है, तो लाखों कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. आने वाले आठ महीने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए काफी उम्मीदों भरे रहने वाले हैं.
यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Update: सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में क्या हर साल होगा 7% का तगड़ा इजाफा? देखें कैलकुलेशन
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation









