नेपाल में अचानक आई बाढ़ में फंसे केरल के 31 पर्यटक सुरक्षित लौटे, सात अब भी लापता
तिरुवनंतपुरम /कोच्चि 30 अगस्त नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण वहां फंसे केरलम के 31 पर्यटकों का एक समूह रविवार को सुरक्षित अपने राज्य में लौट आया है, जबकि राज्य के सात लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं। राज्य निवासी पर्यटकों ने लौटने पर बताया कि बुद्ध मंदिर में 20 मिनट के ठहराव ने उनकी जान बचा ली। समूह के सदस्यों ने चमत्कारिक तरीके से बच निकलने के पल को याद करते हुए बताया कि बुद्ध मंदिर में कुछ देर के ठहराव ने उनकी जान बचा ली।
उन्होंने बताया कि हादसे के बाद की भयावह रात उन्होंने सुरक्षित जगह की तलाश में पैदल चलते हुए बिताई। इस दौरान उनके पास पर्याप्त भोजन नहीं था और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का भी कोई अवसर नहीं था। बाढ़ के खौफनाक मंजर को बयान करते हुए इन पर्यटकों ने कहा कि उन्होंने 600 फुट नीचे की इमारतों को कुछ ही सेकेंड में बाढ़ की लहरों में बहते देखा।
यात्रियों ने बताया कि जब नेपाल में अचानक बाढ़ आई, तब वे काठमांडू से पोखरा जा रहे थे। समूह के एक सदस्य ने कहा, “हमारे समूह की महिलाओं के कहने पर बुद्ध मंदिर में करीब 20-25 मिनट रुकना हमारे लिए त्रासदी से बचने में मददगार साबित हुआ।” इसके पहले केरलम सरकार की एजेंसी ‘नॉन-रेजिडेंट केरलाइट्स अफेयर्स रूट्स’ (नॉर्का रूट्स) ने रविवार को यह जानकारी दी थी कि उसके सहायता केंद्र से संपर्क करने वाले 52 लोगों में से 45 के सुरक्षित होने की पुष्टि हो गई है, जबकि बाकी सात लोगों का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं। ‘नॉर्का रूट्स’ विदेश में रहने वाले केरलमवासियों के लिए विदेशी मामलों और कल्याणकारी सेवाओं का कामकाज देखती है।
एजेंसी ने रविवार को एक बयान में कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 23 लोगों का एक समूह (जिसमें 19 केरलमवासी शामिल थे) रविवार को देर रात करीब 12.30 बजे काठमांडू पहुंचा और घर लौटने की तैयारी कर रहा है। एजेंसी ने बताया कि यह समूह कैलाश यात्रा के दौरान धारचुला स्थित आधार शिविर में रुकने के दौरान बाढ़ में फंस गया था और बाद में उन्हें कोठारी के रास्ते एक अन्य शिविर में ले जाया गया। नॉर्का रूट्स ने बताया कि नेपाल से लौटने वालों में डॉ. रेखा नायर के नेतृत्व वाली चिकित्सकों की छह सदस्यीय टीम भी शामिल है।
कैलाश यात्रा पूरी करने वाली यह टीम भारत की ओर आ रही है और आज शाम तक इसके काठमांडू पहुंचने की उम्मीद है। नॉर्का रूट्स ने बताया कि इस 23 सदस्यीय समूह के अन्य सदस्य ब्रिटिश नागरिक हैं, जिनके परिवार की जड़ें केरलम से जुड़ी हुई हैं। काठमांडू घूमने गए एक अन्य 44 सदस्यीय समूह की भी भारत वापसी हो गई है और वह फिलहाल गोरखपुर में है।
एजेंसी ने बताया कि यह समूह गोरखपुर से बस के जरिए बेंगलुरु के लिए रवाना हुआ और उसके रविवार रात करीब 8:30 बजे वहां पहुंचने की उम्मीद है। बेंगलुरु से ये लोग बस से कोझिकोड जाएंगे और उनके सोमवार की सुबह वहां पहुंचने की संभावना है। एजेंसी ने एक बयान में कहा कि सात लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है जिनमें चार ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, एक ब्रिटिश नागरिक और एक अमेरिकी नागरिक शामिल हैं।
इन लोगों का विवरण विदेश मंत्रालय को सौंप दिया गया है।
असम पुलिस ने 2021 से जब्त किए 3,253 करोड़ के ड्रग्स, 26,500 से ज्यादा गिरफ्तार: सीएम हिमंत
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को कहा कि 2021 से पूरे राज्य में अबतक 26,500 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 3,253 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किये गए। शर्मा ने कहा कि भारी मात्रा में मादक पदार्थ म्यांमा से आते हैं और मिजोरम एवं मणिपुर के अलग-अलग रास्तों से होते हुए असम में दाखिल होते हैं, ताकि उन्हें भारत के बाकी हिस्सों में आगे वितरित किया जा सके। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘वर्ष 2021 से, हमारे मिशन ‘मादक पदार्थ के खिलाफ असम’ पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करते हुए, हमारी पुलिस और सहयोगी एजेंसियों ने मादक पदार्थों के व्यापार के खिलाफ लगातार और रोजाना लड़ाई लड़ी है।
आंकड़े अपनी कहानी खुद बयां करते हैं, (क्योंकि) इस अभियान के शुरू होने के बाद से 3,253 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं और 26,500 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि गिरफ्तारियों की संख्या 2021 में 4,175 से बढ़कर 2025 में 4,901 हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कोई एक बार चलाया गया अभियान नहीं, बल्कि मादक पदार्थों के खिलाफ “लगातार और संस्थागत लड़ाई” है। असम में भाजपा के लगातार दूसरी बार सत्ता में आने के बाद, 2021 में शर्मा को पहली बार मुख्यमंत्री बनाया गया था।
मादक पदार्थों की तस्करी के रास्ते और उनके स्रोत के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “असम की भौगोलिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है- यह म्यांमा से आने वाले मादक पदार्थों के लिए एक आवाजाही का रास्ता है, जो मिजोरम और मणिपुर से होते हुए देश के भीतरी इलाकों तक पहुंचता है।” उन्होंने कहा कि सरगना अक्सर देश की सीमाओं के बाहर से काम करते हैं और इसीलिए यह लड़ाई अकेले असम की नहीं हो सकती। शर्मा ने कहा, “यहीं पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व और केंद्र के मजबूत समर्थन ने असल फर्क डाला है। म्यांमा के साथ बेहतर तालमेल, राज्यों की सीमाओं पर कड़ी निगरानी, खुफिया सूचनाओं की बेहतर साझेदारी और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से हमारे बल खेप को आगे वितरित होने से पहले ही रोक पा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि असम पुलिस ने अकेले काम नहीं किया है, बल्कि मादक पदार्थ की समस्या को खत्म करने के राष्ट्रीय संकल्प के हिस्से के तौर पर काम किया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात सुनने के बाद शर्मा ने कहा, ‘‘मैं सोच रहा था कि मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई कोई बिखरी हुई कोशिश नहीं हो सकती- इसे केंद्र और हर राज्य में समान संकल्प के साथ आगे बढ़ाए जाने वाले एक राष्ट्रीय मिशन के तौर पर चलाया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि ‘नशा मुक्त भारत’ और ‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान’ को लेकर प्रधानमंत्री का नजरिया उस सोच से मेल खाता है, जिसे असम ने बरसों से अपनाया है और जिसपर अमल किया है- यानी युवा ही सबसे बड़ी संपत्ति हैं और उन्हें नशीले पदार्थों के जहर से बचाना एक पवित्र कर्तव्य है। शर्मा ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी जी ने हमेशा कहा है कि नशा न तो ‘कूल’ है और न ही कोई स्टाइल स्टेटमेंट; मादक पदार्थ परिवारों और समुदायों के लिए केवल बर्बादी और तबाही लाते हैं। इस तरह, उनका ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’, जिसमें जमीनी स्तर पर सौ हफ्तों तक करोड़ों युवा भारतीयों तक पहुंचने का काम किया गया, हर राज्य के लिए एक आह्वान है कि वे अपने इरादों के अनुरूप ऊर्जा दिखाएं।” उन्होंने कहा कि भारत के भविष्य के लिए अहम इस मिशन में एक अहम सहयोगी के तौर पर असम गर्व के साथ इस बुलावे का जवाब दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में देश ‘नशा मुक्त भारत’ की ओर बढ़ रहा है। असम सरकार केंद्र के साथ मिलकर लगातार, समन्वित और दृढ़ता से काम करती रहेगी, जब तक कि हमारी सीमाओं पर मौजूद ड्रग नेटवर्क पूरी तरह से खत्म न हो जाए और असम का हर युवा इस खतरे से मुक्त होकर बड़ा न हो।” उन्होंने कहा कि चुनौती के दायरे को अच्छी तरह समझते हुए, असम की लड़ाई रुकेगी नहीं।
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