Nepal में आए सैलाब में बह गए अरबों के बैंक, लापता हुए 35 कर्मचारी और खुली तिजोरियों पर टूटी भीड़
Nepal Flash Flood: पहाड़ी देश नेपाल में प्रकृति के भयानक रूप ने जनजीवन के साथ साथ पूरी आर्थिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. भोटेकोशी नदी में आए जबर्दस्त उफान ने रसुवा और नुवाकोट जिलों में ऐसी तबाही मचाई है जिसकी भरपाई में लंबा समय लग सकता है. नदी का तेज बहाव अपने रास्ते में आने वाले मकानों, पुलों और सड़कों को तो बहा ही ले गया, साथ ही इन इलाकों में मौजूद मजबूत बैंकिंग ढांचे को भी पूरी तरह तहस नहस कर दिया. इस भयानक जल प्रलय में 11 वाणिज्यिक बैंकों की करीब 17 शाखाएं पानी में विलीन हो चुकी हैं. इन शाखाओं से हजारों खाताधारकों की उम्मीदें और उनकी जीवन भर की कमाई जुड़ी हुई थी, जिस पर अब पानी फिरता नजर आ रहा है.
अरबों रुपये के वित्तीय रिकॉर्ड पर संकट
बाढ़ की चपेट में आई इन बैंक शाखाओं का दायरा काफी बड़ा था. आधिकारिक जानकारी के अनुसार इन प्रभावित शाखाओं में लगभग 73 हजार से अधिक जमा खाते सक्रिय थे, जिनमें करीब 43.5 अरब नेपाली रुपये की राशि दर्ज थी. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर कारोबारियों और आम लोगों को बांटे गए 24.2 अरब नेपाली रुपये के कर्ज से जुड़े 2 हजार से अधिक खाते भी इन्हीं शाखाओं से संचालित हो रहे थे. हालांकि बैंकिंग जानकारों का कहना है कि इसका यह मतलब कतई नहीं है कि यह पूरी नकदी पानी में बह गई है. यह रकम खातों में दर्ज जमा और निकासी का ब्योरा है. असली चुनौती यह पता लगाने की है कि शाखाओं के अंदर रखी हार्ड कैश, बंधक रखा सोना, चांदी और जरूरी दस्तावेज कितनी मात्रा में नष्ट हुए हैं.
जलविद्युत परियोजनाओं को भारी चोट
रसुवा और उसके आसपास के पहाड़ी इलाकों में कई बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं संचालित हो रही हैं, जिनमें देश के बड़े बैंकों ने भारी निवेश कर रखा है. भोटेकोशी के उफान ने इन विद्युत परियोजनाओं को भी भारी क्षति पहुंचाई है. राहत की बात यह है कि इस तरह की विशाल परियोजनाओं के लिए कर्ज देने का फैसला बैंकों के केंद्रीय कार्यालयों से कई बैंकों के समूह द्वारा मिलकर किया जाता है. इसलिए इनका हिसाब किताब स्थानीय ग्रामीण शाखाओं के खाते में सीधे तौर पर शामिल नहीं होता. इसके बावजूद हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स को पहुंचे नुकसान से पूरे देश के बैंकिंग सेक्टर पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका पैदा हो गई है.
नदी में बहीं तिजोरियां और लूट की कोशिश
आपदा के बीच कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आईं जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया. तिमुरे और स्याफ्रुबेंसी जैसे इलाकों में पानी का बहाव इतना तेज था कि बैंकों के मजबूत लॉकर और तिजोरियां भी तिनके की तरह बह गईं. सोशल मीडिया पर चर्चा फैल गई कि कई तिजोरियां बहकर गलछी इलाके तक पहुंच गई हैं. अधिकारियों के मुताबिक एक तिजोरी में करीब 12.5 करोड़ नेपाली रुपये की बड़ी नकदी रखी हुई थी. जब यह भारी भरकम तिजोरी त्रिशूली नदी के किनारे टूटी हालत में मिली तो कुछ लोगों ने आपदा को अवसर समझकर उसमें से नकदी निकालनी शुरू कर दी. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके से 29 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इन लोगों के पास से करीब 92 लाख रुपये से अधिक की नकदी बरामद की गई है.
लापता कर्मचारियों की तलाश पहली प्राथमिकता
इस भयानक हादसे में संपत्ति के नुकसान से भी ज्यादा दर्दनाक बात यह है कि बैंकों से जुड़े 35 कर्मचारी अब भी लापता हैं. इनमें वाणिज्यिक बैंकों के 27 कर्मचारी, माइक्रोफाइनेंस से जुड़े 6 कर्मी और इलाके के दौरे पर गए 2 अन्य कर्मचारी शामिल हैं. बाढ़ के कई दिन बीत जाने के बाद भी इनसे कोई संपर्क नहीं हो सका है. बैंकों और वित्तीय संस्थानों का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता अपने लापता साथियों को सुरक्षित खोजना है. इसके लिए सोशल मीडिया और स्थानीय प्रशासन की मदद से लगातार तलाश अभियान चलाया जा रहा है.
नुकसान के आकलन में जुटा केंद्रीय बैंक
नेपाल के केंद्रीय बैंक, नेपाल राष्ट्र बैंक ने सभी प्रभावित संस्थानों से स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. राष्ट्र बैंक के अधिकारियों का कहना है कि भौतिक और मानवीय दोनों तरह के नुकसान का हिसाब लगाया जा रहा है. प्राथमिक ब्योरा जुटाने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी. वहीं नेपाल बैंकर्स एसोसिएशन ने भी सभी सदस्य बैंकों से जमा, कर्ज, सोना, चांदी और क्षतिग्रस्त ढांचों का पूरा डेटा मांगा है. प्रशासन का प्रयास है कि जल्द से जल्द हालात पर काबू पाकर बैंकिंग नेटवर्क को दोबारा पटरी पर लाया जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके.
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