कश्मीरी पंडितों पर मजाक को लेकर Samay Raina और Sharon Verma की आलोचना, Peace Forum ने जताई नाराजगी
कॉमेडी शो इंडियाज गॉट लेटेंट सीजन 2 एक बार फिर विवादों में है। शो के होस्ट समय रैना और कॉमेडियन शेरॉन वर्मा के बीच कश्मीर और बिहार से जुड़े मजाक को लेकर जम्मू-कश्मीर पीस फोरम ने नाराजगी जताई है। फोरम ने रविवार को दोनों कॉमेडियंस की आलोचना की। समय रैना कश्मीरी पंडित हैं, जबकि शेरॉन वर्मा बिहार से आती हैं। शो के दौरान दोनों ने एक-दूसरे की पृष्ठभूमि को लेकर मजाक और रोस्ट किया था।
कॉमेडी की आजादी के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
जम्मू-कश्मीर पीस फोरम के चेयरमैन सतीश महलदार ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि कॉमेडी में बोलने की आजादी जरूरी है, लेकिन इस आजादी के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि बिहार कोई अपमान नहीं है और कश्मीर कोई पंचलाइन नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और उनके दर्द को किसी आसान मजाक, सोशल मीडिया क्लिप या प्रचार के मौके तक सीमित नहीं किया जा सकता।
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तीन दशक से विस्थापन का दर्द झेल रहे कश्मीरी पंडित
सतीश महलदार ने कश्मीरी पंडितों के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि तीन दशक से ज्यादा समय से समुदाय विस्थापन, अपने घरों से दूर रहने और अपनेपन की भावना खोने जैसी परेशानियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि समय रैना भी सार्वजनिक रूप से अपने परिवार के विस्थापन और कश्मीर छोड़ने से जुड़े दर्द के बारे में बात कर चुके हैं।
सेंसरशिप नहीं, संवेदनशीलता चाहिए
महलदार ने कहा कि इस तरह के मुद्दों को सेंसरशिप के जरिए नहीं, बल्कि संवेदनशीलता के साथ संभालने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मौजूदा विवाद का परिपक्व तरीके से जवाब दिया जाना चाहिए। फोरम सेंसरशिप की मांग नहीं कर रहा है, बल्कि वह सिर्फ संवेदनशीलता की अपील कर रहा है।
कश्मीरी पंडित और कश्मीरी मुस्लिमों के बीच विवाद न बने
फोरम ने इस विवाद को कश्मीरी पंडितों और कश्मीरी मुस्लिमों या कश्मीरियों और बिहारियों के बीच दुश्मनी में बदलने की कोशिशों को भी खारिज किया। महलदार ने कहा कि किसी एक व्यक्ति के शब्दों के आधार पर पूरे समुदाय को नहीं आंका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कश्मीर का इतिहास जटिल है और इसके भविष्य की नींव सच्चाई, मेल-मिलाप, न्याय और आपसी सम्मान पर रखी जानी चाहिए।
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क्या है पूरा विवाद?
इंडियाज गॉट लेटेंट सीजन 2 के हालिया एपिसोड में शेरॉन वर्मा और शो के होस्ट समय रैना के बीच एक-दूसरे की पृष्ठभूमि को लेकर मजाक हुआ। शेरॉन वर्मा पहले शो के सीजन 1 में कंटेस्टेंट के तौर पर नजर आई थीं। नए एपिसोड में उन्होंने समय रैना के कश्मीर से होने का जिक्र करते हुए उनके बारे में स्टोनएड (stoned) होने से जुड़ा मजाक किया। इसके जवाब में समय रैना ने शेरॉन वर्मा के बिहारी होने और काम के लिए दूसरे राज्यों में जाने से जुड़े कुछ आम स्टीरियोटाइप्स पर तंज किया।
इसके बाद शेरॉन वर्मा ने जवाब देते हुए कहा, “कम से कम मैंने अपना राज्य अपनी मर्जी से छोड़ा।” उनका यह बयान शो के 2025 के एक एपिसोड में किए गए एक पुराने मजाक को लेकर हुए विवाद की ओर इशारा करता था। इसी बातचीत और मजाक को लेकर अब जम्मू-कश्मीर पीस फोरम ने दोनों कॉमेडियंस की आलोचना की है और विवाद को संवेदनशीलता के साथ संभालने की अपील की है।
असम में मादक पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 2021 से अब तक 26500 से अधिक गिरफ्तार
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को कहा कि 2021 से अब तक पूरे असम में 26,500 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 3,253 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किये गए। उन्होंने कहा कि भारी मात्रा में मादक पदार्थ म्यांमा से आते हैं और मिजोरम व मणिपुर के अलग-अलग रास्तों से होते हुए असम में दाखिल होते हैं, ताकि उन्हें भारत के बाकी हिस्सों में आगे वितरित किया जा सके। शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “2021 से, हमारे मिशन ‘मादक पदार्थ के खिलाफ असम’ पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करते हुए, हमारी पुलिस और सहयोगी एजेंसियों ने मादक द्रव्यों के व्यापार के खिलाफ लगातार और रोजाना लड़ाई लड़ी है।
आंकड़े अपनी कहानी खुद बयां करते हैं - इस अभियान के शुरू होने के बाद से 3,253 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं और 26,500 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।” उन्होंने कहा कि गिरफ्तारियों की संख्या 2021 में 4,175 से बढ़कर 2025 में 4,901 हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कोई एक बार चलाया गया अभियान नहीं, बल्कि मादक पदार्थों के खिलाफ “लगातार और संस्थागत लड़ाई” है। असम में भाजपा के लगातार दूसरी बार सत्ता में आने के बाद, 2021 में शर्मा पहली बार मुख्यमंत्री बने।
मादक पदार्थों की तस्करी के रास्ते और उनके स्रोत के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “असम की भौगोलिक स्थिति चुनौतीपूर्ण है - यह म्यांमा से आने वाले मादक पदार्थों के लिए एक आवाजाही का रास्ता है, जो मिजोरम और मणिपुर से होते हुए देश के भीतरी इलाकों तक पहुंचता है।” उन्होंने कहा कि सरगना अक्सर देश की सीमाओं के बाहर से काम करते हैं, और इसीलिए यह लड़ाई अकेले असम की नहीं हो सकती। शर्मा ने कहा, “यहीं पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व और केंद्र के मजबूत समर्थन ने असल फर्क डाला है - म्यांमा के साथ बेहतर तालमेल, राज्यों की सीमाओं पर कड़ी निगरानी, खुफिया सूचनाओं की बेहतर साझेदारी और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से हमारे बल खेप को आगे वितरित होने से पहले ही रोक पा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि असम पुलिस ने अकेले काम नहीं किया है, बल्कि मादक पदार्थ की समस्या को खत्म करने के राष्ट्रीय संकल्प के हिस्से के तौर पर काम किया है।
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